एक साल पहले भारत ने जो जख्म दिया था उसकी टीस आज भी पाकिस्तान के आतंकियों को सोने नहीं दे रही है। जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी आज खुद रो-रो कर दुनिया को बता रहे हैं कि उस रात भारत ने उन्हें कैसे धूल चटाई थी। बहावलपुर में भारत के वार से मस्जिद सुभान अल्लाह की दीवारें ठह रही थी, तब मसूद अजहर और उसके पालतू आतंकी चूहे किस तरह बिल में छिपे थे। यह ऑपरेशन सिंदूर का वो खौफ है जिसे पाकिस्तान के आतंकी किले को खंडहर बना दिया। जैश-ए-मोहम्मद ने खुद कबूल किया कि भारत की स्ट्राइक ने उनकी कमर तोड़ दी। उनकी सोशल मीडिया पोस्ट उनकी हार का सबसे बड़ा सबूत है। जैश के आतंकियों ने लिखा कि उस रात आसमान से आग नहीं बल्कि उनका काल बरस रहा था। धमाके इतने जोरदार थे कि पाकिस्तान की जमीन दहल गई। खुद को बहादुर बताने वाले आतंकी आज स्वीकार कर रहे हैं कि उस रात उनके पास सिर्फ चीखने और अल्लाहू अकबर के नारे लगाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा था। यह भारत का वो प्रहार था जिसने आतंकियों के गुरूर को मिट्टी में मिला दिया था।
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भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत सीधा प्रहार किया जैश के सबसे सुरक्षित गढ़ बहावलपुर पर। यहां की मस्जिद सुभान अल्लाह कोई इबादत की जगह नहीं बल्कि भारत के खिलाफ जहर उगलने वाली आतंक की फैक्ट्री थी। भारतीय सेना ने चुन-चकर इस ठिकाने को नस्तेनाबूत किया। मसूद अजहर का परिवार और उसके सबसे खूंखार कमांडर जो भारत में बेगुनाहों के खिलाफ साजिश रचते थे। उसी मलबे में दफन हो गए। भारत ने उस वक्त साफ कर दिया कि अब सीमा पार कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं है और खासकर पाकिस्तान के पालतू आतंकियों का। अब जब भारत आतंकियों को मिटा रहा था, धो रहा था, तब पाकिस्तान की फौज अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए बुनियान अल मरसूस यानी शीशे जैसी मजबूत दीवार का ढोंग कर रही थी। लेकिन भारत के शूरवीों ने साबित कर दिखाया कि पाकिस्तान की यह दीवार कागज से ज्यादा कुछ नहीं है। पाकिस्तान दुनिया को अपनी ताकत दिखाने का नाटक करता है। जबकि हकीकत में भारत ने उसके घर में घुसकर उसके आतंकियों की धज्जियां उड़ा दी।
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नाम मजबूत दीवार रखा लेकिन काम एक कांच के घर जैसा भी नहीं निकला। आज जयश की महिला विंग जमात के जरिए नई भर्ती का दावा किया जा रहा है। यह कह रहे हैं कि तीन मरकज शहीद हुए तो क्या हम नई मस्जिद बनाएंगे? लेकिन यह आतंकियों की छटपटाहट है कि उनकी ताकत नहीं। लगभग 2200 महिलाओं को जोड़ने का दावा सिर्फ अपनी हार को छिपाने का एक प्रोपोगेंडा है जैश के आतंकियों का। और भारत ने जो ऑपरेशन सिंदूर के जरिए संदेश दिया वह साफ दिया कि अगर दोबारा सिर उठाया तो अंजाम बहावलपुर से भी भयानक होगा। खैर ऑपरेशन सिंदूर ने दुनिया को दिखा दिया कि नया भारत अब सहता नहीं बल्कि घर में घुसकर जवाब देता है। पाकिस्तान के पालतू आतंकियों को यह समझ लेना चाहिए कि अब उनकी हर साजिश का अंत बहावलपुर जैसा ही होने वाला है या फिर उससे ज्यादा खतरनाक। भारत की वायु सेना और सेना के जांबाज अब रुकने वाले नहीं है। मसूद अजहर या कोई और आतंकी आका अब सबका हिसाब होगा और वह भी उनके ही अपने गढ़ में घुसकर।
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