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ब्लड कैंसर के इलाज की जगी नई उम्मीद, भारत में तैयार होगी जीन थेरेपी, जानें डिटेल​

ब्लड कैंसर शरीर में रक्त, अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो को प्रभावित करता है. जब शरीर में रक्त की असामान्य कोशिकाओं का निर्माण अनियंत्रित तरह से होने लगता है तो इससे हमारे सामान्य रक्त कोशिकाओं का काम में बाधा आती है. इसे ल्योकेमिया, लिंफोमा और मायलोमा या मल्टीपल मायलोमा में बांटा जाता है. इससे शरीर […]

ब्लड कैंसर शरीर में रक्त, अस्थि मज्जा यानी बोन मैरो को प्रभावित करता है. जब शरीर में रक्त की असामान्य कोशिकाओं का निर्माण अनियंत्रित तरह से होने लगता है तो इससे हमारे सामान्य रक्त कोशिकाओं का काम में बाधा आती है. इसे ल्योकेमिया, लिंफोमा और मायलोमा या मल्टीपल मायलोमा में बांटा जाता है. इससे शरीर के इंफेक्शन से लड़ने की क्षमता भी प्रभावित होती है. ब्लड कैंसर का इलाज आज भी बेहद मुश्किल और खर्चीला माना जाता है, लेकिन अब भारत में ये आसान हो सकता है. दरअसल हमारे देश में जीन थेरेपी तैयार करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं.

कैंसर का इलाज भारत में सस्ता करने और लोगों तक इसकी पहुंच बनाने के लिए एक साझेदारी की गई है. जीन थेरेपी तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है जो 2028 तक पूरा होने की संभावना है. चलिए जान लेते हैं विस्तार के साथ.

मायलोमा CART थेरेपी के लिए साझेदारी

कैंसर के इलाज में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ी साझेदारी हुई है. भारत बायोटेक की कंपनी न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स ने हैदराबाद की ही वीजेन बायो के साथ हाथ मिलाया है, ताकि भारत की पहली डुअलटारगेट मायलोमा CART थेरेपी बनाई जा सके. बता दें कि कोविड वैक्सीन की देसी दवा भारत बॉयोटेक ने ही बनाया था.

हैदराबाद स्थित न्यूसेलियन थेराप्यूटिक्स, जो भारत बायोटेक की सब्सिडियरी और एक स्पेशलाइज्ड सेल एंड जीन थैरेपी कंपनी है, अब वीजेन बायो की लीड दवा VL2511 की मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर बनेगी.

ब्लड कैंसर से होगा बचाव

VL2511 एक फर्स्टइनक्लास डुअल BCMA और CD19 ऑटोलॉगस CART थेरेपी है, जो मल्टीपल मायलोमा यानी गंभीर ब्लड कैंसर के लिए है. दो टारगेट पर एक साथ हमला करने से ये कैंसर के एंटीजन एस्केप होने की समस्या को रोकेगी.चीन और अमेरिका में हुए ट्रायल में इस थैरेपी ने EMD वाले मरीजों में बेहतरीन नतीजे दिखाए हैं और सेफ्टी प्रोफाइल भी बेहतर है.

इलाज की लागत होगी कम

इस समझौते के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, प्रोसेस डेवलपमेंट और GMP मैन्युफैक्चरिंग हैदराबाद की उस फैसिलिटी में होगी जो CDSCO, US FDA और EMA स्टैंडर्ड पर बनी है. इसका मकसद है भारत में CART थेरेपी की लागत कम करना और पहुंच बढ़ाना. कंपनी का लक्ष्य है भारत में पहला फेज 1/2 ट्रायल शुरू करना और 2028 तक इसे कमर्शियल लॉन्च करना.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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