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‘बिल्कुल न घबराएं…’, देश में किसी सामान की कमी नहीं होगी, राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा भरोसा

पश्चिम एशिया में लगातार गहराते भू-राजनीतिक संकट का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है. इस बीच देशवासियों के लिए एक बड़ी राहत की खबर है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ कर दिया है कि मुश्किल वैश्विक हालात के बावजूद भारत में किसी भी जरूरी सामान की किल्लत नहीं होने दी जाएगी. उन्होंने जनता से अपील की है कि वे बाजार में किसी भी तरह की घबराहट (पैनिक) का शिकार न हों. दरअसल, पश्चिम एशिया के तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों तथा सप्लाई चेन पर पड़ रहे असर की समीक्षा के लिए मंत्रियों के सशक्त समूह (IGoM) की एक अहम बैठक हुई, जिसके तुरंत बाद रक्षा मंत्री ने देश को यह भरोसा दिया है.

‘बिल्कुल न घबराएं…’, देश में किसी सामान की कमी नहीं होगी, राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा भरोसा
‘बिल्कुल न घबराएं…’, देश में किसी सामान की कमी नहीं होगी, राजनाथ सिंह ने दिया बड़ा भरोसा

सप्लाई चेन बनाए रखने पर सरकार का पूरा फोकस

रक्षा मंत्री ने आईजीओएम की पांचवीं बैठक के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्थिति स्पष्ट की. इस बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति के साथ घरेलू बाजार में आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता पर मंडराते जोखिम का आकलन करना था. राजनाथ सिंह ने आश्वस्त किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है. आपूर्ति श्रृंखला में किसी भी तरह की बाधा या कमी को रोकने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं. ऐसे में आम आदमी को रोजमर्रा की चीजों को लेकर चिंतित होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है.

विदेशी मुद्रा भंडार बचाने पर जोर

इस बैठक तथा रक्षा मंत्री के बयान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस हालिया अपील से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने देशवासियों से आर्थिक मोर्चे पर सहयोग मांगा था. आगामी 15 से 20 मई के बीच नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली सहित यूरोप के अहम दौरे पर रवाना होने से पहले पीएम ने जनता को एक बड़ा संदेश दिया. उन्होंने तेलंगाना में स्पष्ट कहा कि देशवासी कम से कम एक साल तक गैर-जरूरी सोने की खरीदारी से बचें. इसके पीछे का सीधा अर्थशास्त्र यह है कि सोना आयात करने से देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर भारी दबाव पड़ता है. वैश्विक अस्थिरता के इस दौर में मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच होता है.

पेट्रोल डीजल के संयमित इस्तेमाल की जरूरत

सोने के अलावा प्रधानमंत्री ने ऊर्जा संरक्षण पर भी विशेष बल दिया है. भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. ऐसे में ईंधन के सीमित इस्तेमाल की सलाह दी गई है. तेल बचाने से न केवल आयात बिल कम होगा, बल्कि देश की आर्थिक बुनियाद भी मजबूत होगी. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी अपनी पोस्ट में पीएम मोदी की इस अपील का जिक्र करते हुए इसे आत्मनिर्भरता हासिल करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया.

चुनौतीपूर्ण समय में सामूहिक भागीदारी अनिवार्य

मौजूदा समय में पूरी दुनिया आर्थिक उथल-पुथल, सप्लाई चेन में टूटते तार तथा बढ़ती महंगाई से जूझ रही है. इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति को मजबूत बनाए रखना केवल सरकारी नीतियों से संभव नहीं है. इसके लिए हर नागरिक की भागीदारी तय होनी चाहिए. ऊर्जा बचाना तथा गैर-जरूरी खर्चों पर लगाम लगाना इस मुश्किल दौर में देश को आर्थिक मोर्चे पर सुरक्षित रखने का सबसे सटीक तरीका है.

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पेट्रोलियम मंत्रालय का आश्वासन

वहीं आपूर्ति श्रृंखला को लेकर पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी आम जनता की सभी चिंताओं को दूर कर दिया है. मंत्रालय की वरिष्ठ अधिकारी सुजाता शर्मा ने स्पष्ट किया है कि भारत के पास पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. इसके साथ ही, घरेलू रसोई गैस (एलपीजी) की सप्लाई भी पूरी तरह सुचारू है और देश के किसी भी हिस्से में पंप या गैस एजेंसियों के ‘ड्राई आउट’ (खाली होने) जैसी कोई स्थिति नहीं है. भारत सरकार हर नागरिक तक निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है. हालांकि, प्रधानमंत्री की अपील को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने भी लोगों से ईंधन की खपत कम करने का आग्रह किया है.

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