पोलैंड की सरकार रिजर्व में रखे सोना बेचकर हथियार खरीदने की तैयारी में है. इसके लिए प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं. अगर प्रस्ताव पर आम सहमति बन जाती है तो पोलैंड की सरकार इस पर कदम उठा सकती है. पोलैंड रूस का करीबी मुल्क है, जिस पर पुतिन की सेना की नजर है. नाटो कंट्री पोलैंड को यूरोप का करीबी माना जाता है, जो इस वक्त युद्ध में यूक्रेन के साथ है.

फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक सोना से हथियार खरीदने की जो बात है, उसकी चर्चा मार्च महीने में शुरू हुई. पोलैंड केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने एक बयान में इसके बारे में बताया. इसके बाद यह चर्चा आग की तरह फैल गई. पोलैंड के वित्त मंत्री का कहना है कि अभी सिर्फ इसकी चर्चा है. वास्तविक तौर पर कुछ भी फैसला नहीं लिया गया है.
सोना बेचकर हथियार खरीदने का प्रस्ताव
1. पोलैंड के भंडार में फिलहाल 550 टन सोना है. रिजर्व के मामले में पोलैंड पूरी दुनिया में 11वें नंबर पर है. इस साल के आखिर तक पोलैंड के पास 700 टन सोना का भंडार जमा हो जाएगा. पोलैंड सरकार की कोशिश सोने का इस्तेमाल हथियार खरीदने की है.
2. पोलैंड सरकार ने जो रक्षा बजट तैयार किया है, इसके मुताबिक हथियार खरीदने के लिए उसे 47 बिलियन डॉलर की अतिरिक्त राशि जुटानी है. यह पैसा या तो उसे यूरोपीय देशों से कर्ज लेना होगा या उसे अपने राजकोष से निकालना होगा. दोनों ही फैसला लेना सरकार के लिए आसान नहीं है.
3. सरकार के एक अधिकारी का कहना है कि दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है. पहला, क्या सोना को बेचकर ही पैसा जुटाया जा सकता है? या सोना के किसी और इस्तेमाल से पैसा आ सकता है?
4. पोलैंड पर रूस का अब तक कोई सीधा हमला नहीं हुआ है, लेकिन गलती से कई बार मॉस्को ने पौलैंड पर मिसाइल अटैक जरूर किया. इतना ही नहीं, दोनों के बीच साइबर युद्ध भी तेज है. कुल मिलाकर पोलैंड रूस के हिटलिस्ट में है.
पोलैंड को सता रहा बड़े युद्ध का डर
फरवरी 2026 में पोलैंड ने अपने नागरिकों के लिए एक चेतावनी जारी की थी. इसमें पोलैंड ने रूस के साथ भविष्य में बड़े युद्ध की संभावना जताई थी. पोलैंड ने लोगों से इसको लेकर अभी से तैयारियों में जुट जाने के लिए कहा था. दरअसल, पोलैंड को कुछ ऐसे सबूत मिले, जिसके बाद यह चर्चा तेज है कि रूस का अगला टारगेट पोलैंड हो सकता है.
1939 में पोलैंड पर जर्मनी के हमले के बाद ही द्वितीय विश्वयुद्ध की शुरुआत हुई थी. इस युद्ध में एक तरफ रूस, ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों का गठबंधन था. दूसरी तरफ जर्मनी और इटली का गठजोड़ था. इस युद्ध में रूसी गठबंधन को जीत मिली.





