अमेरिका ने रविवार को होर्मुज में बड़े कंटेनर जहाज टुस्का को कब्जे में ले लिया था. यह ईरान की सरकारी शिपिंग कंपनी की एक सहयोगी कंपनी के नियंत्रण में बताया जा रहा है. वॉल स्ट्रीट जनरल की रिपोर्ट के मुताबिक, यह जहाज हाल ही में चीन से लौटा था और ईरान के बंदरगाह बंदर अब्बास की ओर जा रहा था. UN में अमेरिका की पूर्व राजदूत निक्की हेली ने भी दावा किया है कि यह जहाज चीन से ईरान जा रहा था और इसमें मिसाइल से जुड़े केमिकल्स हो सकते हैं. रॉयटर्स ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस जहाज में ऐसी चीजें हो सकती हैं, जिनका मिलिट्री और इंडस्ट्री दोनों के लिए इस्तेमाल हो सकता है.

जब यह होर्मुज के करीब पहुंचा पहुंचा, तो अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत USS स्प्रुअंस ने इसे करीब 6 घंटे तक चेतावनी दी. अमेरिका का कहना था कि यह जहाज उसकी नाकेबंदी का उल्लंघन कर रहा है. जब जहाज नहीं रुका, तो अमेरिकी युद्धपोत ने उसके की, जिससे वह रुक गया. इसके बाद USS त्रिपोली से मरीन कमांडो हेलिकॉप्टर के जरिए जहाज पर उतरे और टुस्का को अपने कब्जे में ले लिया. हालांकि अमेरिका ने अब तक यह नहीं बताया है कि जहाज में क्या सामान था और कोई संदिग्ध चीज मिली या नहीं.
The ship the U.S. seized in the Strait of Hormuz this weekend was headed from China to Iran and is linked to chemical shipments for missiles.
It refused repeated orders to stop.
Another reminder that China is helping prop up Irans regime—a reality that cant be ignored.
— Nikki Haley (@NikkiHaley) April 20, 2026
कैसे होगी टुस्का की जांच?
पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी चार्ली ब्राउन का कहना है कि इतना बड़ा जोखिम तभी लिया जाता है, जब जहाज में कोई बहुत जरूरी या कीमती सामान हो. टुस्का एक बड़ा कंटेनर जहाज है, जिसकी लंबाई 965 फीट और चौड़ाई 107 फीट है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, समुद्र में इतने बड़े जहाज की जांच करना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें हजारों कंटेनर होते हैं. इसलिए इसे किसी बंदरगाह पर ले जाकर ही पूरी तरह चेक किया जा सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, MV टु्स्का अक्सर चीन और ईरान के बीच आता-जाता रहा है. मार्च में यह चीन के झुहाई पोर्ट भी गया था. 2018 में अमेरिका ने इस जहाज पर भी प्रतिबंध लगाया था. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि IRISL से जुड़े जहाज पहले भी चीन से ऐसे केमिकल्स ला चुके हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल फ्यूल बनाने में होता है. हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता है और कहता है कि वह ईरान को हथियार नहीं बेचता.
चीन ने शिप पकड़ने के चिंता जताई
चीन ने इस जहाज को पकड़ने पर चिंता जताई है और कहा है कि इससे क्षेत्र में शांति की कोशिशों पर असर पड़ सकता है. उसने सभी पक्षों से सीजफायर का पालन करने और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम करने की अपील की है.





