Lucknow News: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में फर्जी पुलिस पहचान पत्र और नकली नंबर प्लेट के सहारे कारोबारी का अपहरण कर फिरौती वसूलने वाले एक हाईटेक अंतरराज्यीय गिरोह का कृष्णानगर पुलिस ने पर्दाफाश किया है. पुलिस ने गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है. आरोप है कि बदमाशों ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर कारोबारी को स्कॉर्पियो में अगवा किया और उसकी पत्नी से फिरौती की मांग की. इसके बाद करीब 13 लाख रुपये नकद और जेवर वसूलने के बाद कारोबारी को शहीद पथ के पास छोड़ दिया.

पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य वारदात के दौरान फर्जी पुलिस अधिकारी के पहचान पत्र दिखाकर लोगों पर पुलिस का रौब जमाते थे. कारोबारी को भी इसी तरीके से अगवा किया गया. वारदात में इस्तेमाल स्कॉर्पियो पर आरोपियों ने कूटरचित नंबर प्लेट लगा रखी थी, ताकि वाहन की पहचान न हो सके.
कारोबारी को कब्जे में लेने के बाद आरोपियों ने उसकी पत्नी से संपर्क कर फिरौती की मांग की. पुलिस के अनुसार, परिजनों से 13 लाख रुपये नकद और जेवर वसूले गए. रकम और सामान हासिल करने के बाद बदमाश कारोबारी को शहीद पथ के पास छोड़कर फरार हो गए.
240 CCTV फुटेज खंगालने के बाद मिला सुराग
घटना की सूचना मिलने के बाद कृष्णानगर पुलिस ने जांच शुरू की. आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने इलाके और संभावित रूट के करीब 240 CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली. फुटेज में संदिग्ध स्कॉर्पियो और उसके मूवमेंट की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई. जांच के दौरान पुलिस को गिरोह के सदस्यों के बारे में महत्वपूर्ण सुराग मिले. इसके बाद आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. पुलिस के मुताबिक, गिरोह के तार बुलंदशहर और बिहार समेत कई राज्यों से जुड़े हैं.
अगली वारदात की तैयारी में लौटे थे लखनऊ
पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी लखनऊ में एक और बड़ी वारदात को अंजाम देने की तैयारी में थे. इसी दौरान पुलिस ने उन्हें दबोच लिया. पूछताछ में गिरोह के नेटवर्क और इसके सदस्यों की भूमिका से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आने की बात कही जा रही है. गिरफ्तार आरोपियों के कब्जे से चार कूटरचित पुलिस अधिकारी आईडी कार्ड, 2.50 लाख रुपये नकद, दो तमंचे, तीन कारतूस, घटना में इस्तेमाल स्कॉर्पियो और दो कूटरचित नंबर प्लेट बरामद की गई हैं.
पुलिस अब गिरोह के अन्य सदस्यों और पूर्व में की गई वारदातों के बारे में जानकारी जुटा रही है. अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े होने के कारण पुलिस आरोपियों के संपर्कों और आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.