Chitrakoot flood: उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ का कहर लगातार बढ़ता जा रहा है. मंदाकिनी नदी के रौद्र रूप ने जिले में हालात बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिए हैं. नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंचने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया है. जिले से आनेजाने वाले प्रमुख संपर्क मार्गों पर आवागमन रोक दिया गया है, जबकि बाढ़ प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वे करने के लिए सरकार की ओर से दो हेलीकॉप्टर भेजे गए हैं. प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना और किसी भी तरह की जनहानि को रोकना है.

रामघाट पर मंदाकिनी नदी का खतरे का निशान 126 मीटर है, जबकि नदी का जलस्तर 135 मीटर से ऊपर पहुंच गया है. जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी और नदी के तेज बहाव के कारण नदी किनारे बसे इलाकों में खतरा बढ़ गया है. प्रशासन ने मारकुंडी से मानिकपुर, थाना कर्वी क्षेत्र और नदी किनारे बसे गांवों में अलर्ट जारी कर दिया है. लोगों से अपील की जा रही है कि वे प्रशासन के निर्देशों का पालन करें और खतरे वाले इलाकों से तुरंत सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं.
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए चित्रकूट से जुड़े प्रमुख संपर्क मार्गों पर तत्काल रोक लगा दी गई है. बांदा, कौशांबी, प्रयागराज, झांसी और फतेहपुर की ओर जाने वाले रास्तों पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है. चित्रकूट पुलिस की टीमें जिले की सीमाओं और प्रमुख बॉर्डर प्वाइंट पर तैनात हैं. जगहजगह बैरिकेडिंग कर लोगों को आगे जाने से रोका जा रहा है. पुलिस और प्रशासन लोगों से अनावश्यक यात्रा न करने की अपील कर रहे हैं.
रामघाट और उसके आसपास के इलाकों में बाढ़ का सबसे अधिक असर दिखाई दे रहा है. मतगजेंद्रनाथ मंदिर समेत नदी के बीच और आसपास स्थित कई मंदिरों तथा मकानों में लोगों के फंसे होने की सूचना पर राहत और बचाव टीमें सक्रिय हो गई हैं. तेज बहाव के बीच मोटरबोट और नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है. प्रशासन के सामने चुनौती यह भी है कि अलर्ट के बावजूद कुछ लोग अपने घरों को छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे लोगों को समझाने के साथ जरूरत पड़ने पर रेस्क्यू किया जा रहा है.
प्रशासन का कहना है कि मध्य प्रदेश के कई इलाकों में लगातार हो रही बारिश के कारण मंदाकिनी नदी में पानी का दबाव बना हुआ है. ऐसे में फिलहाल जलस्तर में तत्काल कमी आने की संभावना कम बताई जा रही है. नदी का बहाव तेज होने से राहत और बचाव अभियान में भी मुश्किलें आ रही हैं. सभी प्रमुख घाटों पर पुलिस बल और प्रशासनिक टीमें तैनात कर दी गई हैं. नदी के आसपास किसी भी तरह की आवाजाही करने वालों पर नजर रखी जा रही है. खतरे वाले स्थानों पर फंसे लोगों को गोताखोरों और मोटरबोट की मदद से बाहर निकाला जा रहा है.
बाढ़ की भयावह स्थिति को देखते हुए सरकार की ओर से दो हेलीकॉप्टर भी भेजे गए हैं. हेलीकॉप्टर के जरिए रामघाट समेत मंदाकिनी और यमुना के तटवर्ती इलाकों का हवाई सर्वे किया जा रहा है. प्रशासन प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति का आकलन कर राहत सामग्री और जरूरी संसाधनों को जरूरतमंदों तक पहुंचाने की योजना बना रहा है. चित्रकूट धाम के कमिश्नर और DIG भी रामघाट पहुंचकर हालात का जायजा ले रहे हैं और राहतबचाव तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं.
बाढ़ का असर सड़क यातायात के साथ रेलवे संचालन पर भी पड़ने लगा है. चित्रकूट धाम रेलवे स्टेशन से गुजरने वाली ट्रेनें मंदाकिनी नदी के बढ़े जलस्तर को देखते हुए पुल से बेहद धीमी और सतर्क गति से गुजारी जा रही हैं. वहीं मानिकपुरसतना रेलवे लाइन पर सुरक्षा के मद्देनजर कई रेलगाड़ियों को काफी देर तक रोककर रखा गया है. रेलवे प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और स्थिति के अनुसार ट्रेनों के संचालन को लेकर फैसला कर रहा है.
प्रशासन के अनुसार मौजूदा बाढ़ की स्थिति वर्ष 2003 और पिछले वर्ष की बाढ़ से भी अधिक गंभीर बताई जा रही है. मंदाकिनी और यमुना के बढ़ते जलस्तर ने जिला प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. फिलहाल राहत और बचाव टीमें पूरी तरह अलर्ट पर हैं. प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों से बचें, नदी और बाढ़ग्रस्त इलाकों से दूर रहें तथा किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचना दें.