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पहले तेल से किया खेल, अब डिजिटल जाल बिछाने की तैयारी में है ईरान, इन कंपनियों को होगा नुकसान!

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बिल्कुल भी कम होने का नाम नहीं ले रहा. युद्ध विराम के ऐलान के बाद से ही दोनों देश शांतिवार्ता करने के लिए अपनी शर्ते एक दूसरे को भेज रहे हैं और दोनों देश एक-दूसरे के प्रस्ताव को खारिज कर रहे हैं. इसी तनावपूर्ण माहौल के बीच में ईरान ने अपनी कमाई करने का एक तरीख खोज निकाला है. महंगे कच्चे तेल और होर्मुज का चुंगी लगाकर तो वह अपनी झोली भर ही रहा है. मगर अब इस खाड़ी देश ने डिजिटल जाल बिछाने का प्लान बनाया है.

पहले तेल से किया खेल, अब डिजिटल जाल बिछाने की तैयारी में है ईरान, इन कंपनियों को होगा नुकसान!
पहले तेल से किया खेल, अब डिजिटल जाल बिछाने की तैयारी में है ईरान, इन कंपनियों को होगा नुकसान!

CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब इस जलमार्ग के नीचे बिछी समुद्री केबलों से पैसे कमाने की सोच रहा है. रिपोर्ट के अनुसार, ईरान अब Google, Amazon और Meta जैसी बड़ी टेक कंपनियों से इन समुद्री केबलों का इस्तेमाल करने के लिए शुल्क लेने की योजना बना रहा है. ईरानी सेना के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने पिछले हफ्ते X पर घोषणा की और कहा कि हम इंटरनेट केबलों पर शुल्क लगाएंगे.

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इंटरनेट हो सकता है बंद!

वहां की सरकार से जुड़े मीडिया संस्थानों ने साफ तौर पर नहीं, लेकिन इशारों में चेतावनी दी है कि अगर कंपनियां ईरान के साथ काम करने से मना करेंगी, तो इलाके में इंटरनेट बंद हो सकता है. इससे इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होंगी, ऑनलाइन खरीदारी में परेशानी आ सकती है और पैसों का लेन-देन भी रुक सकता है. बड़ी टेक कंपनियों को ईरान के नियम मानने होंगे, जबकि समुद्र के नीचे केबल बिछाने वाली कंपनियों को लाइसेंस फीस देनी होगी. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान मरम्मत और रखरखाव का काम सिर्फ ईरानी कंपनियों को देना चाहता है.

हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि Google, Amazon और Meta जैसी कंपनियां, जो समुद्र के नीचे बिछी केबलों का इस्तेमाल करती हैं, अमेरिका के प्रतिबंधों के बीच ईरान को पेमेंट कैसे करेंगी. अप्रैल में अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के अध्यक्ष ने समुद्री संचार केबलों से जुड़े बढ़ते राष्ट्रीय सुरक्षा खतरे को देखते हुए नए कदम उठाने की मांग की थी. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के समुद्र तल में कई फाइबर-ऑप्टिक केबलें बिछी हैं, जो भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया को खाड़ी देशों और मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ती हैं.

समुद्री केबलें क्यों जरूरी हैं?

समुद्र के नीचे बिछी केबलें ऐसी तारें होती हैं, जिनसे डेटा और बिजली पहुंचाई जाती है. डिजिटल तकनीक से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी International Telecommunication Union (ITU) के मुताबिक, दुनिया का करीब 99% इंटरनेट ट्रैफिक इन्हीं के जरिए चलता है. ये अलग-अलग देशों के बीच फोन, इंटरनेट और बिजली की सेवाएं पहुंचाती हैं. क्लाउड सर्विस, ऑनलाइन बातचीत और इंटरनेट चलाने के लिए ये बेहद जरूरी हैं.

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