केंद्र सरकार शुक्रवार को शाम 4:00 बजे (IST) FY26 की जनवरी-मार्च तिमाही के GDP आंकड़े, साथ ही पूरे साल की ग्रोथ के आंकड़े जारी करेगी. पूरे साल के GDP आंकड़े नए बेस ईयर 2022-23 के साथ जारी किए जाएंगे. इकोनॉमिस्ट्स पूरे साल (FY26) की ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान लगा रहे हैं, जो दूसरे एडवांस एस्टिमेट्स (SAE) से 20 बेसिस पॉइंट कम है.

FY27 के लिए RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान 6.9% लगाया है, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और संभावित एल नीनो की स्थिति इस अनुमान के लिए बड़ा रिस्क बन सकती हैं. रिपोर्ट के मुताबिक RBI जून की पॉलिसी मीटिंग में FY27 के लिए अपने ग्रोथ और महंगाई के अनुमानों में बदलाव कर सकता है.
1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP)
GDP किसी तय समय के दौरान देश के भीतर तैयार की गई सभी फाइनल गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू को दिखाता है. यह इकोनॉमी में कुल डिमांड का संकेत देता है. GDP से पता चलता है कि इकोनॉमी बढ़ रही है या धीमी पड़ रही है. यह सरकार की फिस्कल पॉलिसी, RBI की मॉनेटरी पॉलिसी, कॉर्पोरेट इन्वेस्टमेंट और शेयर बाजार के लिए अहम इंडिकेटर है. GDP को रियल और नॉमिनल दोनों रूपों में मापा जाता है. रियल GDP में महंगाई का असर शामिल नहीं होता, जबकि नॉमिनल GDP में महंगाई शामिल होती है. नॉमिनल GDP सरकार के बजट और फिस्कल डेफिसिट का लक्ष्य तय करने में अहम भूमिका निभाता है.
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2. सकल मूल्य वर्धित (GVA)
GVA किसी सेक्टर, इंडस्ट्री या प्रोड्यूसर द्वारा तैयार किए गए गुड्स और सर्विसेज की कुल वैल्यू को मापता है. इसमें प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल हुए कच्चे माल, बिजली और दूसरी सर्विसेज जैसी इनपुट कॉस्ट घटा दी जाती है. यह दिखाता है कि हर स्टेज पर वास्तव में कितना नया वैल्यू एड हुआ है, ताकि एक ही चीज की दो बार गिनती न हो. GVA को GDP में सब्सिडी जोड़कर और टैक्स घटाकर निकाला जाता है. FY26 में GVA ग्रोथ 7.7% रहने की उम्मीद है, जो FY25 के 7.3% से ज्यादा है.
3. निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE)
PFCE परिवारों द्वारा फाइनल गुड्स और सर्विसेज पर किए गए कुल खर्च को दर्शाता है. यह भारत की GDP का सबसे बड़ा हिस्सा है और इसका योगदान करीब 55-56% है. इसमें रोजमर्रा का राशन, कपड़े, किराया, हेयरकट, मूवी टिकट जैसी सभी चीजें शामिल होती हैं. यह इकोनॉमी में कंजम्प्शन की रफ्तार को मापने का पैमाना है. SAE के मुताबिक FY26 में PFCE ग्रोथ 8.9% रहने का अनुमान है, जो FY25 के 9.7% से कम है.
4. सरकारी अंतिम खपत खर्च (GFCE)
GFCE केंद्र, राज्य और स्थानीय सरकारों द्वारा जनता को पब्लिक गुड्स और सर्विसेज उपलब्ध कराने के लिए किए गए खर्च को मापता है. इसमें रेवेन्यू और कैपिटल एक्सपेंडिचर दोनों शामिल होते हैं. GDP में इसका योगदान करीब 10-11% है. FY26 में GFCE ग्रोथ 9.6% रहने की उम्मीद है, जो FY25 के 10.5% से कम है.
5. सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF)
GFCF किसी तय अवधि में इकोनॉमी के भीतर फिक्स्ड एसेट्स में किए गए कुल निवेश को दिखाता है. इसमें नई मशीनरी, फैक्ट्रियां, टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर में कंपनियों का निवेश, साथ ही सरकार द्वारा सड़क, रेलवे और एयरपोर्ट जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर खर्च शामिल होता है. इसमें परिवारों द्वारा नए घर खरीदना भी शामिल है. GDP में GFCF की हिस्सेदारी करीब 32% है और इसे इकोनॉमी में निवेश का सबसे अहम पैमाना माना जाता है. SAE के मुताबिक FY26 में GFCF ग्रोथ 7.1% रहने की संभावना है, जो FY25 के 6.4% से ज्यादा है.
6. शुद्ध निर्यात (Net Exports)
नेट एक्सपोर्ट्स यानी एक्सपोर्ट में से इम्पोर्ट घटाने के बाद बची रकम. यह GDP की गणना का एक अहम हिस्सा है, जिससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि सिर्फ देश के भीतर तैयार हुए प्रोडक्शन को ही गिना जाए. जब कोई विदेशी ग्राहक भारत में बना सामान खरीदता है, तो वह खर्च PFCE में शामिल नहीं होता. इसलिए एक्सपोर्ट्स को GDP में जोड़ा जाता है ताकि विदेशों में बिके भारतीय प्रोडक्ट्स की पूरी वैल्यू शामिल हो सके. वहीं, इंपोर्ट किए गए सामान की खरीदारी PFCE में दर्ज हो जाती है. लेकिन क्योंकि उसका प्रोडक्शन विदेश में हुआ था, इसलिए उससे भारत में कोई आर्थिक गतिविधि नहीं हुई. इसी वजह से इम्पोर्ट्स को GDP की गणना से घटाया जाता है, ताकि आंकड़े वास्तविक तस्वीर दिखाएं और कृत्रिम रूप से बढ़े हुए न लगें.












