Tejas MK-1A Fighter Jet: देसी राफेल के नाम से मशहूर तेजस मार्क-1A फाइटर जेट को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. भारतीय वायुसेना में फाइटर स्क्वॉड्रन की कमी को पूरा करने के लिए HAL के साथ 180 LCA तेजस मार्क-1A विमानों का कॉन्ट्रैक्ट किया गया था, लेकिन अब तक एक भी फाइटर एयरक्राफ्ट की डिलीवरी नहीं हो पाई है. रडार की परफॉर्मेंस और कुछ अन्य सिस्टम्स में सुधार के बाद हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड को मई महीने में इंडियन एयरफोर्स के सामने रिव्यू के लिए प्रेजेंटेशन देना था, लेकिन यह बैठक नहीं हो सकी. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यह रिव्यू मीटिंग अगले महीने तक के लिए टल गई है. अब जून में तेजस मार्क-1A को लेकर महत्वपूर्ण रिव्यू बैठक होने की संभावना है. वायुसेना के सूत्र पहले ही कई बार स्पष्ट कर चुके हैं कि नॉन-नेगोशिएबल ऑपरेशनल जरूरतों पर किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा. हालांकि, कुछ समझौतावादी बिंदुओं पर एचएएल को सीमित राहत मिल सकती है.
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जून में होने वाली यह बैठक इसलिए भी अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें तेजस मार्क-1A की डिलीवरी की संभावित तारीख तय हो सकती है. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यदि कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय मानकों में कुछ मामूली कमी रह जाती है (जैसे कोई तकनीक ऑटोमैटिक की बजाय मैनुअल तरीके से संचालित हो) तो उस पर विचार किया जा सकता है. रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, इस मामले में अंतिम फैसला रक्षा मंत्रालय को लेना है, क्योंकि कॉन्ट्रैक्ट रक्षा मंत्रालय और एचएएल के बीच हुई है. यदि कॉन्ट्रैक्ट में किसी तरह का बदलाव किया जाता है, तो उसकी मंजूरी भी मंत्रालय स्तर पर ही होगी.
एचएएल के पूर्व सीएमडी डॉ. डीके सुनील पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि डिजाइन और डेवलपमेंट से जुड़े 1-2 बिंदुओं पर अभी काम बाकी था. माना जा रहा है कि यही कारण मई की बैठक टलने की वजह बना. तेजस मार्क-1A की डिलीवरी की समयसीमा पहले भी कई बार आगे बढ़ चुकी है और अब उम्मीद की जा रही है कि जून की संभावित बैठक में स्थिति स्पष्ट हो सकती है. अधिकारियों के मुताबिक, HAL के नए सीएमडी रवी कोटा ने दिल्ली का दौरा किया था. और वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात की थी.
प्रोग्रेस रिपोर्ट
प्रस्तावित बैठक में एचएएल को तेजस मार्क-1A की मेजर, माइनर और अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतों की प्रगति रिपोर्ट पेश करनी है. एचएएल के पूर्व सीएमडी डॉ. डीके सुनील ने पहले बताया था कि 21 एयरक्राफ्ट तैयार हैं और उनका कैट-बी इंजन के साथ परीक्षण भी किया जा चुका है. उन्होंने यह भी बताया था कि पिछले साल दिसंबर में वायुसेना के साथ हुई रिव्यू मीटिंग में बीवीआर एयर-टू-एयर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और रडार इंटीग्रेशन का काम पूरा होने की जानकारी दी गई थी. हालांकि, रडार की परफॉर्मेंस में सुधार समेत कुछ अन्य पहलुओं पर काम बाकी था.
डिलीवरी पर संकट!
रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, यदि एचएएल अनिवार्य ऑपरेशनल जरूरतों को पूरा कर देता है, तो तेजस मार्क-1A की डिलीवरी की तारीख तय हो सकती है. वहीं, यदि ये जरूरतें पूरी नहीं होतीं, तो डिलीवरी में फिर देरी हो सकती है. इस बैठक के नतीजे काफी हद तक तय करेंगे कि HAL पहला एयरक्राफ्ट वायुसेना को कब तक सौंप पाएगा. इस प्रक्रिया के पूरी होने के बाद भी तेजस मार्क-1A को एयर स्टाफ क्वालिटी रिक्वायरमेंट मानकों पर खरा उतरना होगा. यानी कॉन्ट्रैक्ट के तहत तय तकनीकी और ऑपरेशनल मानकों को पूरा करना जरूरी होगा. किसी भी एयरक्राफ्ट को वायुसेना में शामिल होने से पहले सख्त परीक्षण और निरीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है.
तकनीकी मूल्यांकन
एचएएल द्वारा तैयार किए गए एयरक्राफ्ट का पहले तकनीकी मूल्यांकन होगा, उसके बाद वायुसेना के टेस्ट पायलट उसकी उड़ान भरेंगे. इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विमान एएसओआर मानकों पर खरा उतरता है या नहीं. निरीक्षण के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी. यदि कोई कमी पाई जाती है, तो एचएएल को उसे दूर करने के लिए कहा जाएगा. इसके बाद ही भारतीय वायुसेना को पहला तेजस मार्क 1ए मिलने का रास्ता साफ होगा. तेजस प्रोग्राम अब तक धीमी गति से आगे बढ़ रहा था, जिसकी मुख्य वजह इंजन की डिलीवरी में देरी भी थी. हालांकि, अब धीरे-धीरे इंजन मिलने शुरू हो गए हैं. तेजस मार्क 1ए प्रोग्राम के लिए इंजन की डील अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ 2021 में हुई थी. इस समझौते के तहत भारत को कुल 99 F404 इंजन मिलने हैं. फाइटर जेट की डिलीवरी में देरी को लेकर भारतीय वायुसेना प्रमुख भी नाराजगी जता चुके हैं. तेजस के कई वेरिएंट हैं – तेजस मार्क-1, तेजस मार्क-1A, तेजस ट्रेनर एयरक्राफ्ट और तेजस मार्क-2. इनमें तेजस मार्क-2 सबसे एडवांस वर्जन होगा, जिस पर फिलहाल काम जारी है.





