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देश के इस राज्य के शहद की US में खूब डिमांड, किसानों को मिलेंगे 43% ज्यादा दाम

असम के बक्सा जिले का शहद अब अमेरिका तक पहुंच गया है. भारत सरकार की One District One Product यानी ODOP योजना के तहत पहली बार असम के आकांक्षी जिले बक्सा से शहद का निर्यात अमेरिका किया गया है. यह भारत के कृषि निर्यात और पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है.

देश के इस राज्य के शहद की US में खूब डिमांड, किसानों को मिलेंगे 43% ज्यादा दाम
देश के इस राज्य के शहद की US में खूब डिमांड, किसानों को मिलेंगे 43% ज्यादा दाम

अमेरिका भेजा गया 20 मीट्रिक टन शहद

करीब 20 मीट्रिक टन शहद की यह खेप 9 मई को रवाना की गई. इस निर्यात को Agricultural and Processed Food Products Export Development Authority यानी APEDA की पहल पर पूरा किया गया. निर्यात का काम Salt Range Foods Pvt. Ltd. ने किया, जो APEDA में रजिस्टर्ड एक्सपोर्टर है. यह शहद गुवाहाटी स्थित कंपनी की प्रोसेसिंग यूनिट में तैयार और पैक किया गया, जिसके बाद इसे अमेरिका भेजा गया.

असम में शहद उत्पादन की बड़ी क्षमता

राज्य सरकार के मुताबिक, असम में घने जंगल, समृद्ध जैव विविधता और पारंपरिक मधुमक्खी पालन की वजह से शहद उत्पादन की काफी संभावनाएं हैं. यहां करबी, मिशिंग और बोडो जैसी जनजातियां सदियों से शहद इकट्ठा करती रही हैं. इन समुदायों में शहद का इस्तेमाल खाने, दवा और धार्मिक परंपराओं में होता रहा है.

Assam के बक्सा, कोकराझार, चिरांग, उदलगुड़ी और तमुलपुर जिले शहद उत्पादन के बड़े केंद्र माने जाते हैं. FY 2023-24 में असम में करीब 1,650 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हुआ.

बक्सा का शहद क्यों है खास?

बक्सा जिले का शहद पर्यावरण के अनुकूल और कीटनाशक-मुक्त इलाकों से जुटाया जाता है. इसकी शुद्धता, फूलों की विविधता और पोषण गुणों की वजह से इसकी काफी मांग है. सरकार ने इसे ODOP योजना में शामिल किया है ताकि स्थानीय किसानों और मधुमक्खी पालकों को ज्यादा फायदा मिल सके.

किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

सरकार का कहना है कि इस निर्यात से स्थानीय किसानों और मधुमक्खी पालकों को बड़ा फायदा होगा. उन्हें स्थानीय बाजार के मुकाबले करीब 43% ज्यादा कीमत मिलने की उम्मीद है. इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार और आय दोनों बढ़ेंगे.

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पूर्वोत्तर भारत के लिए बड़ी उपलब्धि

यह पहल दिखाती है कि पूर्वोत्तर भारत के कृषि उत्पाद अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्र के दूसरे खास कृषि उत्पादों के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.

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