कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में सोमवार को एक ऐसा ऐतिहासिक, भावुक और प्रेरणादायी अध्याय जुड़ गया, जिसने लोकतंत्र की असली ताकत को दुनिया के सामने लाकर रख दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नई भाजपा सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार में आउसग्राम विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित विधायक कलिता माझी ने राज्यमंत्री पद की गोपनीयता की शपथ ली।
दूसरों के घरों में बर्तन मांजने वाली कलिता माझी बनीं शुभेंदु कैबिनेट में मंत्री, जानिए उनका फर्श से अर्श तक का सफर…
कभी दूसरों के घरों में घरेलू सहायिका के रूप में चौका-बर्तन का काम कर महज 4,000 रुपये महीना कमाने वाली कलिता माझी का राजभवन में मंत्री पद तक पहुंचना भारतीय राजनीति में संघर्ष, धैर्य और कड़े परिश्रम की सबसे बड़ी मिसाल बन गया है। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कलिता के इस जज्बे की सराहना कर चुके हैं।
अभावों में बीता जीवन: सुबह घरों में काम, शाम को राजनैतिक प्रचार
गुसकरा नगरपालिका के वार्ड नंबर तीन स्थित माझपुकुर पाड़ की रहने वाली कलिता माझी का पूरा जीवन घोर आर्थिक तंगहाली और अभावों के बीच बीता है। एक अत्यंत गरीब परिवार में जन्मीं कलिता की शादी मंगलकोट क्षेत्र के सुब्रत माझी से हुई थी, जो पेशे से प्लंबर (नलसाज) हैं। उनका इकलौता बेटा हाल ही में 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुका है।
बता दें, शुरुआत में कलिता राजनीति में कदम रखने से डरती थीं कि परिवार का पेट कैसे पलेगा। लेकिन जनसेवा की ललक के कारण उन्होंने साल 2014 में भाजपा के एक आम बूथ कार्यकर्ता के रूप में अपनी यात्रा शुरू की। एक दशक तक कलिता की दिनचर्या यह रही कि वह सुबह दो घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन का काम निपटाती थीं और शाम को पार्टी के झंडे-बैनर लेकर जनसंपर्क और प्रचार में जुट जाती थीं। उनकी इसी निष्ठा को देखकर संगठन ने उन्हें नगर संपदिका से लेकर जिला कमेटी तक की जिम्मेदारी सौंपी।
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2021 की हार से नहीं खोया हौसला, 2026 में दर्ज की ऐतिहासिक जीत
पार्टी ने उनकी जमीनी पकड़ को देखते हुए साल 2021 के विधानसभा चुनाव में आउसग्राम सीट से उम्मीदवार बनाया था, लेकिन तब वह 11,815 वोटों से चुनाव हार गईं। इस शिकस्त के बाद भी कलिता ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार 5 साल तक जनता के सुख-दुख में डटी रहीं।
परिणाम स्वरूप, विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया। इस बार कलिता माझी ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कद्दावर उम्मीदवार श्यामाप्रसन्न लोहार को 12,535 मतों के भारी अंतर से करारी शिकस्त देकर विधानसभा में कदम रखा। चुनाव प्रचार के लिए उन्होंने जिन घरों से एक महीने की छुट्टी ली थी, वे परिवार भी आज उनकी इस कामयाबी पर गर्व कर रहे हैं।
आउसग्राम और जंगलमहल के विकास का लिया संकल्प
एक आम और गरीब परिवार से आने के कारण कलिता अपने क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं को बहुत गहराई से समझती हैं। राज्यमंत्री के रूप में पदभार संभालते ही उन्होंने अपनी प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट कर दी हैं:
बता दें, आउसग्राम और जंगलमहल के इलाके में स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी बदहाली है। कलिता का सबसे पहला संकल्प क्षेत्र में एक सर्वसुविधायुक्त अस्पताल बनवाना है, ताकि स्थानीय लोगों को इलाज के लिए बर्द्धमान न भागना पड़े। गांवों में पेयजल , पक्की सड़कें और हर गरीब को पक्के मकान मुहैया कराना उनका मुख्य लक्ष्य है। क्षेत्र में ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ को शत-प्रतिशत धरातल पर उतारना, पिछड़े वर्गों का उत्थान, युवाओं को रोजगार और महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना उनके विजन का मुख्य हिस्सा है।
“अब मुझे सिर्फ आउसग्राम नहीं, पूरे बंगाल के लिए सोचना है” — कलिता माझी
मंत्री पद की शपथ लेने के बाद कलिता माझी बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“मैंने कभी जीवन में विधायक बनने तक के बारे में नहीं सोचा था, ऐसे में सूबे की सरकार में मंत्री बनना तो मेरे लिए बिल्कुल अकल्पनीय और एक सुखद सपने जैसा है। जब मैं केवल चुनाव जीतकर आई थी, तब मेरी सोच सिर्फ आउसग्राम विधानसभा तक ही सीमित थी। लेकिन अब संगठन और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी जी ने मुझे जो बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है, उसके बाद मेरा दायरा बड़ा हो गया है। अब मुझे पूरे पश्चिम बंगाल के विकास, प्रगति और यहां की जनता की भलाई के लिए पूरी ईमानदारी से काम करना है।”
कलिता ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का पूरा श्रेय भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को देते हुए अपनी यह जीत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन को समर्पित की है।