दुनिया भर में कोलेस्ट्रॉल से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं. लेकिन इस बीच कोलेस्ट्रॉल के बढ़े हुए स्तर से जूझ रहे लाखों हृदय रोगियों (Heart Patients) के लिए उम्मीद की एक नई किरण बनी है. वैज्ञानिकों ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए यह साबित कर दिया है कि एक बार की जीन थेरेपी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को कम से कम एक साल तक काफी हद तक कम कर सकती है. इससे आगे चलकर यह भी हो सकता है कि दिल के कुछ मरीजों को जिंदगी भर कोलेस्ट्रॉल की दवा लेने से निजात मिल जाएगी.

प्रतिष्ठित दवा कंपनी एली लिली की ओर से टेस्टेड VERVE-102 कोड वाली दवा को नसों के जरिए एक बार दी जाने वाली डोज से, लिवर में बनने वाले PCSK9 नामक प्रोटीन के स्तर में काफी कमी देखी गई है. VERVE-102 एक शुरुआती चरण की ‘इन विवो’ (शरीर के अंदर) जीन एडिटिंग दवा है, जिसे PCSK9 जीन में DNA बेस पेयर में एक सटीक और खास बदलाव करने के लिए तैयार किया गया है. इसे प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले कार्डियो प्रोटेक्टिव (Cardio Protective) PCSK9 वेरिएंट की तरह काम करने और महज एक खुराक से समय के साथ LDL-C यानी ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने के लिए बनाया गया है.
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एक खुराक से PCSK9 लेवल में कमी
यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US Food and Drug Administration) ने VERVE-102 को उन मरीजों के LDL-C का स्तर कम करने के लिए ‘फास्ट-ट्रैक’ मंजूरी भी दी है, जिन्हें हाइपरलिपिडेमिया (खून में ज्यादा लिपिड) की समस्या है और जिन्हें जीवन भर हृदय रोग का सबसे अधिक जोखिम बना रहता है. जहां तक भारत का सवाल है कि 6 से 8 करोड़ लोग हृदय संबंधी बीमारी के साथ जी रहे हैं, जबकि रिपोर्टों के अनुसार हर साल दिल के दौरे के 30 लाख मामले सामने आते हैं.
अंग्रेजी अखबार ET ने ड्रंग कंपनी एली लिली इंडिया के एक प्रवक्ता के हवाले से लिखा, “35 मरीजों के शुरुआती आकलन में, VERVE-102 की महज एक खुराक से ही PCSK9 के स्तर में खुराक के हिसाब से औसत कमी देखी गई है. 0.3 mg/kg और 1.0 mg/kg की खुराक पर यह कमी क्रमशः 51% से 88% तक रही. इसी तरह, LDL-C के स्तर में भी क्रमशः 0.3 mg/kg और 1.0 mg/kg की खुराक पर 9% से 62% तक की कमी दर्ज की गई.”
बार्ट्स हेल्थ NHS ट्रस्ट के हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में कार्डियोलॉजी के प्रोफेसर रियाज एस पटेल ने कहा, “ये शुरुआती आंकड़े हमें काफी उत्साहित करने वाले हैं. जिन मरीजों में LDL-C का स्तर बढ़ा हुआ होता है, उनमें से कई लोग इस पर लगातार नियंत्रण पाने के लिए संघर्ष करते रहते हैं. उनमें हृदय रोग का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है. दुनिया भर में कोरोनरी धमनी बीमारी (Coronary Artery Disease) अभी भी मौत के सबसे अहम कारणों में से एक बनी हुई है, ऐसे में इस समस्या से निपटने के लिए नए तरीकों की सख्त जरूरत है.”
इंडियानापोलिस स्थित एली लिली कंपनी, जो वजन घटाने वाली अपनी बेजोड़ दवाओं ‘Mounjaro’ और ‘Zepbound’ के लिए दुनियाभर में खास पहचान रखती है, ने 2 दिन पहले 25 मई को VERVE-102 के शुरुआती नतीजों की घोषणा की. इस शुरुआती चरण के आंकड़े को ‘European Atherosclerosis Society Congress’ में पेश किया गया तथा ‘The New England Journal of Medicine’ में ये आंकड़े प्रकाशित भी किए गए.
क्या है VERVE-102
VERVE-102 एक शुरुआती जांच वाली इन विवो जीन एडिटिंग मेडिसिन है, जिसे PCSK9 जीन में अकेला, सटीक DNA बेस पेयर चेंज करने के लिए तैयार किया गया है. VERVE-102 को स्वाभाविक रूप से पाए जाने वाले कार्डियोप्रोटेक्टिव PCSK9 वेरिएंट की नकल करने और एक बार इन्फ्यूजन के बाद LDL-C को लंबे समय तक कम रखने के लिए तैयार किया गया है.
दवा कैसे काम करती है?
VERVE-102 में एक एडेनिन बेस एडिटर (एक तरह का जीन एडिटिंग टूल) के लिए मैसेंजर RNA (राइबोन्यूक्लिक एसिड- जो प्रोटीन बनाने और जीन को कंट्रोल करने के लिए जिम्मेदार होता है) और PCSK9 को टारगेट करने वाला एक गाइड RNA होता है.
ये सभी एक लिपिड नैनोपार्टिकल में बंद होते हैं, जिसे लिवर को टारगेट करने के लिए बनाया गया है. लिवर सेल्स के अंदर, PCSK9 जीन को इस दवा की मदद से सटीक रूप से एडिट किया जाता है और फिर बंद कर दिया जाता है.
PCSK9 क्या, क्यों बनाया गया?
PCSK9, लिवर द्वारा बनाया जाने वाला एक प्रोटीन है, जो LDL रिसेप्टर्स को तोड़ता है. ये रिसेप्टर्स खून से खराब कोलेस्ट्रॉल को साफ करते हैं. जिन लोगों में जन्म से ही PCSK9 स्वाभाविक रूप से निष्क्रिय होता है, उनमें जीवन भर LDL-C का स्तर कम रहता है.
साथ ही, उनमें कोरोनरी धमनी रोग (Coronary Artery Disease) का खतरा भी जीवन भर के लिए 88 फीसदी तक कम हो जाता है, और इसका कोई भी बुरा असर भी देखने को नहीं मिलता. इससे यह पता चलता है कि LDL-C का स्तर जितने लंबे समय तक कम रहेगा, सुरक्षा भी उतनी ही अधिक मिलेगी.
PCSK9 के लिए क्या कोई और दवा?
PCSK9 इनहिबिटर के नाम से जानी जाने वाली कुछ दवाओं में प्रैलुएंट (Praluent), रेप्था (Repatha) और लिगवियो (Leqvio) शामिल हैं. लेकिन ये जीन एडिटिंग दवाएं नहीं हैं. इन्हें हर कुछ हफ्तों में या फिर साल में 2 बार लेना पड़ता है.
Lilly के पास लिपोडिसिरन (Lepodisiran) नाम की एक और दवा है जो क्लिनिकल ट्रायल के एडवांस स्टेज में है. इस दवा के लिए साल में एक बार इन्फ्यूजन की जरूरत होती है. अमेरिका की कंपनी मर्क (Merck) PCSK9 को टारगेट करने वाली एक खाने वाली गोली बना रही है, जिसका नाम Enlicitide है.
35 मरीजों के इस अंतरिम विश्लेषण में, VERVE-102 के एक बार के सेवन से PCSK9 में खुराक के आधार पर 51 से 88% की औसत कमी देखी गई. इस साल की शुरुआत में डेटा कट-ऑफ की तारीख तक, औसत फॉलो-अप अवधि करीब 9 महीने थी, जिसमें 15 मरीजों पर कम से कम एक साल तक नजर रखी गई. सबसे लंबे समय तक फॉलो-अप वाले प्रतिभागियों में 18 महीने तक इसका असर दिखा.
क्या फायदा होगा
भारत में, 6 से 8 करोड़ मरीज दिल की बीमारियों के साथ जी रहे हैं, जबकि रिपोर्टों से पता चलता है कि हर साल दिल के दौरे के 30 लाख से अधिक मामले सामने आते हैं. इलाज की सुविधा पहले से भी मौजूद है, लेकिन मरीजों को कोलेस्ट्रॉल की पुरानी समस्याओं के लिए लंबे समय तक इलाज के नियमों का पालन करने में खासी दिक्कत होती है.
लेकिन VERVE-102 पहली इन विवो जीन-एडिटिंग दवा हो सकती है, जो हृदय रोगों की कठिन देखभाल की प्रक्रिया को महज एक बार के इलाज में बदल सकती है. VERVE-102 के बड़े ट्रायल से पुरानी बीमारियों के लिए एक बार के इलाज के व्यापक प्रयासों में मदद मिलने की उम्मीद है.





