देश की राजधानी में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या को कम करने के लिए प्रशासन ने एक नई रणनीति पर काम शुरू कर दिया है. उपराज्यपाल (LG) के निर्देशों के बाद शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट संगम’ के तहत ट्रैफिक प्रबंधन को ज्यादा संगठित और प्रभावी बनाने की दिशा में कई अहम कदम उठाए जा रहे हैं. इसमें स्थानीय स्तर पर सुझाव लेकर उन्हें लागू करने की प्रक्रिया भी तेज की गई है.

ट्रैफिक पुलिस ने इस परियोजना के जरिए जाम की समस्या को केवल नियमों से नहीं, बल्कि स्थानीय भागीदारी के जरिए हल करने की योजना बनाई है. इसके तहत अलग-अलग इलाकों में बैठकों का आयोजन कर लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं ताकि वास्तविक समस्याओं को समझा जा सके.
बैठकों से मिले सुझावों के आधार पर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्ती बढ़ाई गई है. बड़ी संख्या में ई-चालान जारी किए गए हैं और टोंइंग की कार्रवाई भी की जा रही है. साथ ही, सड़कों के डिजाइन, साइन बोर्ड, फुट ओवरब्रिज और अन्य बुनियादी सुधारों के लिए संबंधित एजेंसियों को प्रस्ताव भेजे गए हैं.
कई इलाकों में ई-रिक्शा स्टैंड की अव्यवस्थित स्थिति को जाम की बड़ी वजह माना गया है. इस पर कार्रवाई करते हुए स्टैंड को शिफ्ट करने, अवैध पार्किंग हटाने और यातायात को सुचारु बनाने के उपाय सुझाए गए हैं. पुलिस ने इन सुझावों को लागू करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है.
परियोजना के तहत ट्रैफिक पुलिस, नगर निगम, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जा रहा है. संयुक्त बैठकों में समस्याओं पर चर्चा कर उनके व्यावहारिक समाधान निकालने पर जोर दिया जा रहा है ताकि काम में देरी न हो.
सभी सुझावों और उनकी प्रगति को एक डिजिटल सिस्टम में दर्ज किया जा रहा है. इससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि किसी भी समस्या का समाधान लंबित न रहे और हर स्तर पर उसकी निगरानी हो सके. शहर के कई भीड़भाड़ वाले इलाकों जैसे बाजारों, रिहायशी कॉलोनियों और मुख्य सड़कों को इस पहल में शामिल किया गया है. यहां नियमित बैठकों और कार्रवाई के जरिए ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने की कोशिश की जा रही है.





