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ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर, SEBI का नया नियम बदल देगा ऑप्शंस ट्रेडिंग का तरीका

बाजार नियामक संस्था भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने वायदा कारोबार यानी फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग की राह को और आसान बनाने के लिए एक अहम प्रस्ताव पेश किया है. अक्सर बाजार में अचानक आने वाले भारी उतार-चढ़ाव के दौरान ट्रेडर्स को सही स्ट्राइक प्राइस चुनने में काफी परेशानी होती है. इसी समस्या को दूर करने के लिए सेबी ने एक नया प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रस्ताव के तहत स्टॉक एक्सचेंजों को बाजार की चाल के हिसाब से तुरंत नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने या हटाने की आजादी मिलेगी. इसका सीधा फायदा ट्रेडर्स को होगा, जिन्हें भारी वोलैटिलिटी के बीच भी ट्रेडिंग के विकल्प मिलते रहेंगे और वे बाजार की चाल के हिसाब से अपने सौदे सही भाव पर कर सकेंगे.

ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर, SEBI का नया नियम बदल देगा ऑप्शंस ट्रेडिंग का तरीका
ट्रेडर्स के लिए बड़ी खबर, SEBI का नया नियम बदल देगा ऑप्शंस ट्रेडिंग का तरीका

तेज उतार-चढ़ाव में ट्रेडर्स की सबसे बड़ी परेशानी

स्ट्राइक प्राइस वह भाव है जिस पर किसी शेयर या इंडेक्स का सौदा पक्का होता है. आम तौर पर ट्रेडर बाजार के रुख को भांपकर अपना स्ट्राइक प्राइस चुनते हैं ताकि अपने निवेश को बड़े जोखिम से सुरक्षित रख सकें. लेकिन असली दिक्कत तब शुरू होती है जब बाजार में किसी दिन अचानक भारी तेजी या बड़ी गिरावट आ जाती है. मान लीजिए कि निफ्टी 25,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है. ऐसे में ट्रेडर्स के पास 24,900, 25,000 से लेकर 25,100 तक के स्ट्राइक प्राइस आसानी से उपलब्ध होते हैं.

पर अगर कोई बड़ी खबर आ जाए जिससे निफ्टी अचानक छलांग लगाकर 25,700 पर पहुंच जाए, तो वहां नए स्ट्राइक प्राइस ही मौजूद नहीं होते. इस स्थिति में ट्रेडर्स को अपनी रणनीति के हिसाब से सही ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल पाता है. इसी परेशानी को जड़ से खत्म करने के लिए सेबी ने यह नया ड्राफ्ट तैयार किया है.

लाइव मार्केट में जुड़ सकेंगे नए कॉन्ट्रैक्ट्स

सेबी के नए प्रस्ताव के लागू होने के बाद, अगर बाजार के दौरान अचानक से कोई बड़ा मूवमेंट आता है, तो लाइव ट्रेडिंग में ही नए स्ट्राइक प्राइस जोड़े जा सकेंगे. इसका सीधा मतलब है कि निवेशकों के पास बाजार की दिशा के अनुरूप ट्रेड लेने के लिए पर्याप्त विकल्प मौजूद होंगे. सभी एक्सचेंजों को यह सुनिश्चित करना होगा कि बाजार भाव के आसपास इन-द-मनी (ITM) और आउट-ऑफ-द-मनी (OTM) स्ट्राइक की पर्याप्त संख्या मौजूद रहे. इसके लिए एक्सचेंजों को रोजाना बाजार की समीक्षा करनी होगी. जो स्ट्राइक प्राइस बाजार भाव से बहुत दूर जा चुके हैं, जिनका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा है, उन्हें सिस्टम से हटाने की व्यवस्था भी की जाएगी.

हालांकि, सेबी ने यह साफ किया है कि यह पूरी प्रक्रिया इस तरह से डिजाइन होनी चाहिए जिससे ब्रोकिंग कंपनियों के तकनीकी सिस्टम पर कोई अतिरिक्त दबाव न पड़े. ऐसा इसलिए क्योंकि स्ट्राइक इंटरवल का सीधा असर ब्रोकरों के प्लेटफॉर्म पर पड़ता है. लाइव मार्केट में नए कॉन्ट्रैक्ट जुड़ने से ब्रोकरों को अपने सिस्टम में कोई रुकावट या फेरबदल न करना पड़े, इस बात का खास ध्यान रखा जाएगा.

एक्सचेंजों को मिलेगी ज्यादा छूट

इस नई व्यवस्था में नियमों का मूल ढांचा तो पूरे बाजार के लिए एक समान रहेगा, लेकिन एक्सचेंजों को इसे लागू करने के मामले में कुछ व्यावहारिक फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलेगी. वे खुद यह तय कर सकेंगे कि दो स्ट्राइक प्राइस के बीच कितना अंतर रखा जाए. इसके साथ ही, बाजार में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सभी एक्सचेंजों को अपने स्ट्राइक प्राइस प्रबंधन से जुड़े नियमों की पूरी जानकारी अपनी वेबसाइट पर प्रकाशित करनी होगी. बाजार सहभागियों से समय-समय पर बात करके इन नियमों की समीक्षा भी करनी होगी ताकि जरूरत पड़ने पर इनमें सुधार किया जा सके.

Khabar Monkey

बता दें, सेबी ने इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर निवेशकों, ब्रोकरों से लेकर सभी बाजार सहभागियों से उनकी राय मांगी है. आम निवेशक भी 15 जून 2026 तक इस मसौदे पर अपने सुझाव भेज सकते हैं.

khabarmonkey@gmail.com

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