रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने मंगलवार को कहा कि टाटा संस की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग और टाटा ग्रुप की लीडरशिप में बदलाव से ग्रुप की कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग पर तत्काल असर पड़ने की संभावना नहीं है. हालांकि, लंबे समय में इससे समूह समर्थन और फाइनेंशियल पॉलिसी के आकलन में बदलाव हो सकता है. एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने एक रिपोर्ट में कहा कि टाटा ग्रुप के लंबे इतिहास और अपेक्षाकृत रूढ़िवादी प्रबंधन दृष्टिकोण को देखते हुए फाइनेंशियल पॉलिसी में कोई भी बदलाव धीरेधीरे होने का अनुमान है. उसने कहा कि टाटा संस की लिस्टिंग और नेतृत्व परिवर्तन फिलहाल ग्रुप की कंपनियों की रेटिंग पर असर नहीं डालेंगे.

कंपनियों की रेटिंग में होगी बढ़ोतरी
रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रुप की रेटिंग वाली कंपनियां स्वतंत्र पेशेवर प्रबंधन के तहत संचालित होती हैं, लेकिन टाटा संस उनकी रणनीति को प्रभावित करती है. एसएंडपी फिलहाल समूह की कंपनियों—टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स, टाटा पावर, टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी, टाटा कैपिटल और जगुआर लैंड रोवर की रेटिंग करती है. रेटिंग एजेंसी इन सभी कंपनियों को टाटा संस के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानती है और समूह के समर्थन के कारण उनकी रेटिंग में अधिकतम तीन पायदान तक की बढ़ोतरी का आकलन करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, नेतृत्व, ग्रुप स्ट्रक्चर या बेनिफिशरीज की प्राथमिकताओं में बदलाव से लंबे समय में टाटा की रणनीति और वित्तीय नीति की निरंतरता तथा समूह समर्थन की संभावना को लेकर सवाल उठ सकते हैं. यह टाटा स्टील, टाटा पावर और टाटा कैपिटल जैसी कंपनियों के लिए खास तौर पर अहम हो सकता है, जिनकी वृद्धि की बड़ी योजनाएं हैं. वहीं, जगुआर लैंड रोवर कारोबारी बदलाव के दौर में है.
कैसा रहेगा लिस्टिंग का असर?
एसएंडपी ने कहा कि टाटा संस की मौजूदा स्वरूप में सामान्य तरीके से लिस्टिंग ग्रुप की कंपनियों के क्रेडिट प्रोफाइल के लिए तटस्थ होगी. हालांकि, सार्वजनिक शेयरधारकों के आने से निवेश फैसलों, पूंजी आवंटन और कमजोर समूह कंपनियों को समर्थन पर अधिक निगरानी हो सकती है. एजेंसी ने कहा कि लिस्टिंग का असर धीरेधीरे सामने आएगा, क्योंकि संभावित आईपीओ का आकार बड़ा होगा और सार्वजनिक शेयरधारकों को स्वामित्व ढांचे में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी हासिल करने में समय लगेगा. एसएंडपी ने कहा कि उसका मौजूदा समूह समर्थन आकलन इस आधार पर है कि टाटा संस एक प्रमुख नियंत्रक इकाई है और उसकी मजबूती विभिन्न क्षेत्रों में फैली कंपनियों के पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी से आती है.