सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए 202627 सप्लाई ईयर आपूर्ति वर्ष की ताजा खरीद निविदा में गन्ने के रस, चीनी की चाशनी और ‘बीहेवी शीरे’ से बने एथेनॉल को शामिल नहीं किया है. सरकार ने यह कदम घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता बनाए रखने और पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के देशव्यापी कार्यक्रम को जारी रखने के लिए उठाया है. भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 16 अक्टूबर को पेट्रोलियम मार्केटिंग कंपनियों की ओर से जारी टेंडर में नवंबर से शुरू होने वाले आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल की खरीद के लिए बोलियां मांगी हैं. इसका उद्देश्य पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिलाने की जरूरत को पूरा करना है. टेंडर में मक्के से बने एथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि भी घटाकर 68.86 रुपए प्रति लीटर कर दी गई है, जो पहले 71.86 रुपए प्रति लीटर थी.

किस तरह का आएगा बदलाव
टेंडर में कहा गया कि भारत सरकार ने निर्देश दिया है कि 202627 एथेनॉल आपूर्ति वर्ष के लिए एथेनॉल प्रोडक्शन में चीनी के इस्तेमाल को शून्य किया जाए. इसमें कहा गया है कि इस मात्रा आधारित खरीद टेंडर में गन्ने के रस, चीनी या चीनी की चाशनी और बीहेवी शीरे से उत्पादित एथेनॉल के लिए बोलियां नहीं मांगी गई हैं. इस पाबंदी से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के कार्यक्रम के लिए कच्चे माल की खरीद की रणनीति में बदलाव होगा. इस कार्यक्रम में कच्चे तेल के आयात को कम करने और वाहनों से होने वाले उत्सर्जन में कटौती के लिए अनाज और गन्ने, दोनों से बने एथेनॉल का इस्तेमाल किया जाता रहा है. टेंडर डॉक्युमेंट्स के अनुसार, मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम द्वारा खरीदे गए अधिशेष चावल और सीहेवी शीरे से बने एथनॉल की आपूर्ति के लिए बोलियां लगाई जा सकती हैं.
चीनी की कीमतों को कम करने का प्लान
मक्के से बने एथेनॉल पर प्रोत्साहन राशि 5.79 रुपए से घटाकर 2.79 रुपए प्रति लीटर किए जाने से इस अनाज से एथेनॉल बनाने वाली कंपनियों का मुनाफा घटने की आशंका है. वहीं, चीनी आधारित कच्चे माल को निविदा से बाहर किए जाने से वैकल्पिक कच्चे माल का महत्व बढ़ जाएगा. यह कदम घरेलू स्तर पर चीनी की उपलब्धता को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है. महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कम बारिश के कारण उत्पादन घटने और कीमतें बढ़ने का जोखिम पैदा हुआ है. दुनिया में चीनी के सबसे बड़े उपभोक्ता भारत ने आयातित कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का इस्तेमाल तेजी से बढ़ाया है. हालांकि, ईंधन उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी का इस्तेमाल होने से खाद्य खपत के लिए इनकी उपलब्धता प्रभावित हो सकती है, खासकर तब जब उत्पादन कम रहने की आशंका हो.