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ग्लोबल मार्केट में भारतीय कंपनियों ने मचाया धमाल, अप्रैल में दोगुना किया निवेश

भारतीय कंपनियों का दूसरे देशों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश अप्रैल में इससे पिछले महीने की तुलना में दोगुना होकर 3.36 अरब डॉलर से अधिक रहा है. भारतीय रिजर्व बैंक ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. ऑफिशियल आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम एशिया संघर्ष से उपजे जियो-पॉलिटिकल टेंशन और रुपये में तेज गिरावट के बावजूद भारतीय कंपनियों के विदेशी निवेश में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से कोफोर्ज के निवेश के कारण हुई.

Khabar Monkey

ग्लोबल मार्केट में भारतीय कंपनियों ने मचाया धमाल, अप्रैल में दोगुना किया निवेश
ग्लोबल मार्केट में भारतीय कंपनियों ने मचाया धमाल, अप्रैल में दोगुना किया निवेश

आरबीआई के अनुसार, मार्च में भारतीय कंपनियों का विदेशों में प्रत्यक्ष निवेश 1.61 अरब डॉलर था, जबकि एक साल पहले अप्रैल, 2025 में यह 1.96 अरब डॉलर रहा था. अप्रैल, 2026 में टॉप पांच कंपनियों की हिस्सेदारी इक्विटी के जरिए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में करीब 86 प्रतिशत रही. इसमें कोफोर्ज के दो निवेश डील शामिल हैं, जिनकी राशि 1.37 अरब डॉलर और 99.4 करोड़ डॉलर रही. आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार, कोफोर्ज के बाद ल्यूपिन का निवेश 22.9 करोड़ डॉलर, विंगिफाई सॉफ्टवेयर का 15.68 करोड़ डॉलर, नैक ग्लोबल का 8.29 करोड़ डॉलर और क्लार टेक्नोलॉजी इंडिया का 5.40 करोड़ डॉलर रहा.

बॉन्ड में हुई बढ़ोतरी

बॉन्ड और गारंटी सहित कुल फाइनेंशियल कमिटमेंट अप्रैल में मंथली बेसिस पर केवल 11 प्रतिशत बढ़कर 5.64 अरब डॉलर रही, जो इससे पिछले महीने यानी मार्च में 5.08 अरब डॉलर थी. हालांकि, सालाना आधार पर कुल फाइनेंशियल कमिटमेंट में 10.81 प्रतिशत की गिरावट आई है, जो अप्रैल, 2025 में 6.329 अरब डॉलर थी.

आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल में कुल फाइनेंशियल कमिटमेंट में बढ़ोतरी की मुख्य वजह इक्विटी निवेश में आया भारी उछाल रहा. दूसरी ओर, पिछले महीने की तुलना में बॉन्ड और गारंटी के मामलों में गिरावट देखी गई. अप्रैल, 2026 में बॉन्ड कमिटमेंट्स घटकर 51.77 करोड़ डॉलर रह गईं, जो मार्च में 77.06 करोड़ डॉलर और अप्रैल, 2025 में 1.121 अरब डॉलर थीं. अप्रैल में जारी गारंटी का मूल्य 1.75 अरब डॉलर रहा, जबकि मार्च में यह 2.701 अरब डॉलर और अप्रैल, 2025 में 3.23 अरब डॉलर था.

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