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गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास

गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास

गोरखपुर। रेलवे भर्ती बोर्ड (आरआरबी) गोरखपुर का दफ्तर एक बार फिर विवादों में घिर गया है। सहायक लोको पायलट भर्ती में फर्जीवाड़े की सीबीआई जांच अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि अब नए चेयरमैन और एक पूर्व सेना अधिकारी के बीच नर्सिंग सुपरिटेंडेंट की ज्वाइनिंग को लेकर जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाते हुए महाप्रबंधक और उच्चाधिकारियों तक शिकायत पहुँचा दी है, जिससे पूरे रेलवे महकमे में हलचल मच गई है।

गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास
गोरखपुर रेलवे भर्ती बोर्ड की मुश्किलें नहीं हो रही खत्म, फर्जीवाड़े और भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास

पूर्व सेना अधिकारी ने चेयरमैन पर लगाया दुर्व्यवहार का आरोप

Khabar Monkey

पूर्व सेना अधिकारी मेजर नेहा सिंह ने आरआरबी अध्यक्ष पंकज जायसवाल पर दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे के महाप्रबंधक को भेजे पत्र और ईमेल में पूरे मामले की निष्पक्ष जाँच की गुहार लगाई है।

चेयरमैन ने भी दिया करारा जवाब

उधर, आरआरबी अध्यक्ष ने प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी (पीसीपीओ) को पत्र लिखकर पलटवार किया है। उन्होंने पूर्वोत्तर रेलवे कर्मचारी संघ की सदस्य और अभ्यर्थी नेहा सिंह पर अनावश्यक दबाव बनाने और कार्यालय में अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया है। अब सबकी निगाहें जाँच रिपोर्ट पर टिकी हैं कि आखिर ज्वाइनिंग में देरी की असल वजह क्या है।

2018 से शुरू हुआ फर्जीवाड़े का सिलसिला

आरआरबी गोरखपुर में भ्रष्टाचार का इतिहास कोई नया नहीं है। साल 2018-19 में सहायक लोको पायलट (एएलपी) की भर्ती के दौरान बड़े पैमाने पर गड़बड़ियाँ सामने आई थीं। आरोप है कि तत्कालीन चेयरमैन ने कर्मचारियों की मिलीभगत से पैनल बनाने, मेडिकल जाँच और अभिलेखों की जाँच में हेराफेरी करवाई। दफ्तर में धन उगाही का ऐसा बाजार गर्म हुआ कि अधिकारी-कर्मचारी गिरोह बनाकर मनमानी नियुक्तियाँ करने लगे।

तत्कालीन चेयरमैन गए, पर बदमाशी नहीं गई

नवंबर 2022 में मामला उजागर होने पर रेलवे बोर्ड ने तत्कालीन चेयरमैन पीके राय को हटा दिया, जो बाद में सेवामुक्त भी हो गए। इस मामले की जाँच फिलहाल सीबीआई कर रही है। लेकिन अध्यक्ष बदलने के बाद भी मनमानी नहीं रुकी। इसके बाद नियुक्त हुए चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी के कार्यकाल में भी कार्यालय के दो कर्मचारियों ने 26 अप्रैल, 2024 को जारी पैनल में फर्जी तरीके से अपने बेटों का नाम शामिल कर दिया। बिना फार्म भरे, बिना परीक्षा दिए और बिना मेडिकल के ही वे मॉडर्न कोच फैक्ट्री रायबरेली में फिटर बन गए। बरेली में जब यह फर्जीवाड़ा पकड़ा गया तो रेलवे प्रशासन के हाथ-पाँव फूल गए।

एक और चेयरमैन निलंबित, फिर बहाल

इस प्रकरण में तत्कालीन चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी को निलंबित कर दिया गया था, हालाँकि रेलवे बोर्ड ने बाद में उनका निलंबन बहाल कर दिया। फर्जीवाड़े में शामिल कर्मचारी चंद्र शेखर आर्या और राम सजीवन इस समय कैंट थाने में गैंगस्टर के आरोपी हैं। कई अन्य कर्मचारियों को मूल विभागों में वापस भेज दिया गया, कुछ का स्थानांतरण हुआ, लेकिन आरआरबी गोरखपुर की छवि पर लगा दाग धुलता नहीं दिख रहा। अब चेयरमैन और अभ्यर्थी के बीच नई तकरार ने एक बार फिर इस कार्यालय की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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