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गर्मी की मार और 20 रुपये की राइड, रैपिडो ड्राइवर की हकीकत ने खोल दी सिस्टम की परतें

आजकल रैपिडो जैसी App सर्विस ने हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है. कहीं भी जाना हो, बस कुछ ही मिनटों में बाइक या कैब मिल जाती है. इससे समय भी बचता है और झंझट भी कम हो जाता है. लेकिन इस सुविधा के पीछे एक दूसरी सच्चाई भी है, जिसे अक्सर लोग नजरअंदाज कर देते हैं. यह सच्चाई उन ड्राइवरों की है जो हर मौसम में, हर परिस्थिति में सड़क पर काम करते हैं.

गर्मी की मार और 20 रुपये की राइड, रैपिडो ड्राइवर की हकीकत ने खोल दी सिस्टम की परतें
गर्मी की मार और 20 रुपये की राइड, रैपिडो ड्राइवर की हकीकत ने खोल दी सिस्टम की परतें

हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो सामने आया है, जिसे RajveerIND नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है. इस वीडियो ने लोगों का ध्यान इस तरफ खींचा है कि आखिर इन राइडिंग सेवाओं के पीछे काम करने वाले लोगों की स्थिति कैसी होती है. वीडियो में एक रैपिडो राइडर अपनी परेशानी बताते हुए नजर आता है. उसका कहना है कि तेज गर्मी की वजह से उसका मोबाइल फोन ठीक से काम नहीं कर रहा है और ऐप बार-बार हैंग हो रहा है.

क्या दिखा इस वीडियो में?

ड्राइवर बताता है कि इतनी अधिक गर्मी में फोन का गर्म होना और काम करना बंद कर देना आम बात हो गई है, लेकिन इसी वजह से उसे लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐप सही से न चलने के कारण उसे राइड मिलने और पूरी करने में दिक्कत होती है. इसी बीच कस्टमर के लगातार कॉल भी आते रहते हैं, जिन्हें यह समझ नहीं आता कि देरी क्यों हो रही है. ग्राहक सोचते हैं कि ड्राइवर जानबूझकर लेट कर रहा है, जबकि असल वजह तकनीकी समस्या और मौसम की मार होती है.

वीडियो में ड्राइवर यह भी कहता है कि इतनी भीषण गर्मी में भी उसे सिर्फ 20 रुपये जैसी कम कीमत वाली राइड स्वीकार करनी पड़ती है. इतने कम पैसे में काम करना उसके लिए न सिर्फ मुश्किल है, बल्कि उसके संसाधनों पर भी असर डालता है. वह यह भी संकेत देता है कि लगातार धूप और गर्मी में मोबाइल का इस्तेमाल करना उसके फोन को भी नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन उसके पास कोई विकल्प नहीं होता क्योंकि उसे रोज कमाई करनी होती है.

इस वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कई यूजर्स ने राइडर की बात से सहमति जताई और कहा कि हम सभी लोग इन्हीं डिलीवरी और राइडिंग पार्टनर्स की वजह से घर बैठे आराम से अपनी जरूरतें पूरी कर पाते हैं. हमें कम समय में सुविधा चाहिए होती है, लेकिन हम यह नहीं सोचते कि इसके लिए कौन व्यक्ति बाहर मेहनत कर रहा है और किन परिस्थितियों में काम कर रहा है.

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि अगर ऐप कंपनियां बढ़ती मांग के नाम पर ग्राहकों से अतिरिक्त पैसे ले सकती हैं, तो फिर उन ड्राइवरों को भी बेहतर भुगतान और एक्सट्रा इंसेंटिव मिलना चाहिए जो कठिन मौसम में काम कर रहे हैं. खासकर गर्मी के मौसम में जब तापमान काफी ज्यादा होता है, तब ऐसे राइडर्स के लिए काम करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है.

कई लोगों ने यह भी सुझाव दिया कि कंपनियों को हीट अलाउंस या गर्मी भत्ता जैसी सुविधा पर विचार करना चाहिए, ताकि ड्राइवरों को उनके कठिन काम के लिए अतिरिक्त सहायता मिल सके. इसके अलावा यह भी बात उठी कि ऐप कंपनियों को अपने सिस्टम को और बेहतर बनाना चाहिए ताकि तकनीकी समस्याओं के कारण ड्राइवरों को नुकसान न उठाना पड़े.

यहां देखिए वीडियो

khabarmonkey@gmail.com

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