आईसीसी (ICC) की एक बड़ी बैठक में टेस्ट क्रिकेट को लेकर एक नया और दिलचस्प नियम बनाने का फैसला लिया गया है। आम तौर पर जब किसी टेस्ट मैच के दौरान आसमान में अंधेरा छा जाता है या रोशनी कम हो जाती है, तो खेल को रोक दिया जाता है। लेकिन अब नए नियम के मुताबिक, अगर कम रोशनी की वजह से स्टेडियम की फ्लड लाइट्स जलानी पड़ती हैं, तो खेल रोकने के बजाय रेड बॉल की जगह पिंक बॉल से मैच खेला जाएगा। हालांकि, यह नियम अभी स्थायी नहीं है और इसे सिर्फ एक ट्रायल के रूप में शुरू किया जा रहा है। अगर इस ट्रायल के दौरान खिलाड़ियों को पिंक बॉल से खेलने में कोई परेशानी नहीं होती है, तो आईसीसी आने वाले समय में इसे क्रिकेट का एक परमानेंट नियम बना देगी।
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टेस्ट मैच को लेकर ICC का बड़ा फैसला
आईसीसी (ICC) के नए नियम के अनुसार, अब टेस्ट मैच के दौरान अगर रोशनी कम हो जाती है, तो दोनों टीमों की सहमति से लाल गेंद की जगह पिंक बॉल का इस्तेमाल किया जा सकेगा। दरअसल स्टेडियम की फ्लड लाइट्स में लाल गेंद के मुकाबले पिंक बॉल ज्यादा साफ नजर आती है। हालांकि, इस गेंद से गेंदबाजों को पिच से थोड़ी अधिक मदद मिलती है, जिससे बल्लेबाजी कर रही टीम के लिए चुनौती बढ़ सकती है।
इस नियम को आसान भाषा में समझें तो अगर किसी दिन मैच में कुल 90 ओवर फेंके जाने हैं और 75 ओवर पूरे होने के बाद रोशनी खराब हो जाती है, तो अंपायर मैच रोकने के बजाय फ्लड लाइट्स ऑन कर देंगे। इसके बाद बचे हुए 15 ओवर का खेल पिंक बॉल से होगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि खराब रोशनी के कारण खेल बर्बाद नहीं होगा और फैंस को पूरे 90 ओवर का रोमांच देखने को मिलेगा। लेकिन ऐसा तभी संभव होगा जब दोनों टीमें पिंक बॉल से खेलने के लिए सहमत हों।
टेस्ट मैच के दौरान ब्रेक में कोच को मिलेगी मैदान पर जाने की अनुमति
आईसीसी (ICC) के नए नियमों के मुताबिक, अब टी20 मैचों की तरह टेस्ट क्रिकेट में भी ब्रेक के दौरान टीम के हेड कोच मैदान पर आकर अपने खिलाड़ियों से बातचीत कर सकेंगे। इसके अलावा, अगर ऑन फिल्ड अंपायर को किसी गेंदबाज के बॉलिंग एक्शन पर कोई शक होता है, तो वे उसकी जांच के लिए हॉक-आई (Hawk-Eye) की मदद ले सकेंगे। माना जा रहा है कि इन बदलावों से टेस्ट क्रिकेट का रोमांच और बढ़ जाएगा।












