आज के समय में कैंसर सिर्फ एक बीमारी नहीं रह गई है, इसके कारण लोग मानसिक और शारीरिक तौर पर आदमी परेशान होता है। इस कारण पूरा परिवार कई प्रकार की समस्याओं से जूझने लगता है। आजकल महिलाओं में गर्भाशय कैंसर यानी एंडोमेट्रियल कैंसर एक चिंता का विषय बनकर सामने आया है। कैंसर हीलर सेंटर में मैनेजिंग डायरेक्टर, डॉ. तरंग कृष्णा, कहते हैं कि कई महिलाएं इसको लेकर लापरवाही बरतती हैं या फिर इसके शुरुआती संकेतों को नहीं समझ पाती और जब तक बीमारी का पता चलता है, तब तक स्थिति काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसे में इसको लेकर पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

खराब जीवनशैली बनती है एंडोमेट्रियल कैंसर की वजह
एंडोमेट्रियल कैंसर मुख्य रूप से एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के असंतुलन के कारण होता है। भारत में महिलाओं की जीवनशैली, खान-पान, तनाव, हार्मोनल असंतुलन, देर से शादी, देर से मां बनना, मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और बढ़ते प्रदूषण जैसे कई कारणों से गर्भाशय से जुड़े कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है।
सर्वाइकल कैंसर और गर्भाशय कैंसर है एक दूसरे से अलग
कई बार सर्वाइकल कैंसर और गर्भाशय कैंसर को लोग एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों अलग स्थितियां हैं। गर्भाशय के अंदरूनी भाग में होने वाला कैंसर एंडोमेट्रियल कैंसर कहलाता है, जबकि गर्भाशय ग्रीवा यानी सर्विक्स में होने वाला कैंसर सर्वाइकल कैंसर कहलाता है। दोनों के कारण, लक्षण और जोखिम अलग हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के लिए दोनों के प्रति जागरूक होना जरूरी है।
किन महिलाओं को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है?
वे महिलाएं जो लंबे समय तक हार्मोनल असंतुलन से जूझ रही हैं। जिन महिलाओं में पीरियड्स अनियमित रहते हैं, अत्यधिक ब्लीडिंग होती है, पीसीओडी या पीसीओएस जैसी समस्याएं हैं, उन्हें अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लंबे समय तक असंतुलन गर्भाशय की परत पर प्रभाव डाल सकता है। मोटापे के कारण शरीर में अतिरिक्त एस्ट्रोजन बन सकता है, जो गर्भाशय कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित महिलाओं में भी जोखिम बढ़ जाता है।
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किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए?
अगर पीरियड्स के बीच में ब्लीडिंग हो रही है, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो रही है, लगातार सफेद पानी आ रहा है, पेल्विक दर्द बना रहता है, अचानक वजन कम हो रहा है, कमजोरी महसूस हो रही है या पेट में भारीपन महसूस होता है, तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाना है ज़रूरी:
स्वस्थ जीवनशैली कैंसर समेत कई बीमारियों से बचाव में अहम भूमिका निभाती है, जिसमें वजन नियंत्रित रखना, नियमित व्यायाम करना, पर्याप्त नींद लेना, ताजा और संतुलित भोजन करना, धूम्रपान और शराब से बचना, प्रोसेस्ड फूड का कम सेवन, मानसिक तनाव को नियंत्रित करना और शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना शामिल है। मजबूत इम्यून सिस्टम शरीर को भीतर से सशक्त बनाता है, जिससे कोशिकाओं की मरम्मत बेहतर होती है और बीमारियों से लड़ने की क्षमता बनी रहती है।
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