वियतनाम के राष्ट्रपति To Lam इस हफ्ते भारत दौरे पर हैं और नई दिल्ली में कई अहम बैठकों का हिस्सा बनेंगे. माना जा रहा है कि इस दौरान भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर बातचीत होगी. खास तौर पर ब्रह्मोस मिसाइल की संभावित डील को लेकर चर्चाएं तेज हैं.

ब्रह्मोस मिसाइल खरीद पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, वियतनाम भारत-रूस की संयुक्त परियोजना ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहा है. अगर यह समझौता होता है, तो इसकी कीमत करीब 60 अरब रुपये हो सकती है, जिसमें ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल रहेगा. हालांकि, इस दौरे के दौरान किसी बड़े रक्षा सौदे पर हस्ताक्षर होने की संभावना कम बताई जा रही है.
इंडो-पैसिफिक रणनीति में अहम साझेदारी
भारत के लिए वियतनाम इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम सहयोगी माना जाता है. चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए भारत इस क्षेत्र में अपने रणनीतिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दे रहा है. ऐसे में वियतनाम के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना भारत की बड़ी रणनीति का हिस्सा है.
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पहले भी बढ़े हैं रक्षा संबंध
भारत पहले ही फिलीपींस को ब्रह्मोस मिसाइल बेच चुका है और इंडोनेशिया के साथ भी रक्षा समझौता कर चुका है. इसके अलावा, भारत वियतनाम की सेना को ट्रेनिंग देने में भी मदद करता रहा है. साल 2023 में भारत ने वियतनाम को किरपान नाम की स्वदेशी मिसाइल कोर्वेट भी उपहार में दी थी, जिससे दोनों देशों के रक्षा रिश्ते और मजबूत हुए हैं.
व्यापार और कूटनीति में भी मजबूती
रक्षा के अलावा, भारत और वियतनाम के बीच व्यापारिक रिश्ते भी तेजी से बढ़ रहे हैं. पिछले वित्तीय वर्ष में दोनों देशों के बीच व्यापार 16 अरब डॉलर से ज्यादा रहा. दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को और आगे बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं.
आगे क्या?
राष्ट्रपति तो लाम का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे सकता है. भले ही तुरंत कोई बड़ा सौदा न हो, लेकिन आने वाले समय में भारत-वियतनाम के बीच रक्षा और व्यापारिक सहयोग और गहरा होने की पूरी संभावना है.





