चांदी की कीमतों में पिछले कुछ समय से जारी तेजी पर ब्रेक लग सकता है. क्योंकि तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह इसकी कम सप्लाई थी. बाजार में मांग के मुकाबले चांदी की उपलब्धता कम होने से कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रहा थी. लेकिन अब यह स्थिति धीरेधीरे बदलती नजर आ रही है.

नई रिपोर्ट के मुताबिक, चांदी की सप्लाई से जुड़ी परेशानी कम हो रही है और साल 2027 में बाजार में मांग से ज्यादा सप्लाई हो सकती है. यानी चांदी का बाजार घाटे से निकलकर सरप्लस की स्थिति में पहुंच सकता है. इससे आने वाले समय में चांदी की कीमतों में बड़ी तेजी आना मुश्किल हो सकता है.
सोने के मुकाबले चांदी का कमजोर प्रदर्शन
Metals Focus की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ हफ्तों में चांदी ने सोने के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है. सोने की कीमत 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास बनी हुई है, जबकि चांदी की कीमत गिरकर इस साल के निचले स्तर यानी 50 डॉलर के शुरुआती दायरे में पहुंच गई है. चांदी की कीमतों में गिरावट की एक बड़ी वजह दुनिया में बढ़ता आर्थिक और राजनीतिक तनाव भी है.
2027 में मांग से ज्यादा हो सकती है चांदी की सप्लाई
रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल चांदी की सप्लाई में कमी का अंतर और कम हो सकता है. वहीं, 2027 में बाजार में जरूरत से ज्यादा चांदी उपलब्ध होने का अनुमान है. इसका मतलब है कि आने वाले समय में चांदी की कमी के कारण कीमतों में अचानक बड़ी तेजी आने की संभावना कम हो सकती है. हालांकि, अगर 2027 में ब्याज दरें बढ़ने की आशंका कम होती है, तो चांदी की कीमतों को दोबारा सपोर्ट मिल सकता है. ऐसी स्थिति में निवेशक फिर से चांदी में पैसा लगाना शुरू कर सकते हैं. लेकिन फिलहाल बाजार में कई ऐसी चुनौतियां हैं, जो इसकी कीमतों पर दबाव बना सकती हैं.
सोने के मुकाबले चांदी क्यों हो रही कमजोर?
सोने और चांदी की कीमतों पर अलगअलग कारणों का असर पड़ता है. सोने को दुनिया के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और सुरक्षित निवेश की मांग से सहारा मिल रहा है. आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता के समय बड़े निवेशक सोने में पैसा लगाना पसंद करते हैं.
वहीं, चांदी की मांग का बड़ा हिस्सा उद्योगों से आता है. इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई दूसरे उत्पाद बनाने में होता है. इसलिए इंडस्ट्रियल एक्टिविटी में सुस्ती आने पर चांदी की मांग भी प्रभावित होती है.
इसके अलावा, ऊंची कीमतों के कारण ज्वेलरी और चांदी के बर्तनों की खरीदारी भी कम हो रही है. सोलर पैनल बनाने वाली कंपनियां भी चांदी का इस्तेमाल कम करने और उसकी जगह दूसरे मटेरियल का उपयोग करने की कोशिश कर रही हैं. इससे औद्योगिक मांग पर दबाव बढ़ रहा है.
दुनिया के बाजारों में बढ़ रहा चांदी का स्टॉक
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर के आखिर तक लंदन के वॉल्ट में चांदी का कुल स्टॉक बढ़कर 93.2 करोड़ ट्रॉय औंस पहुंच गया. यह करीब चार साल का सबसे ऊंचा स्तर है. हालांकि, इसमें से एक्सचेंज ट्रेडेड प्रोडक्ट्स में रखी चांदी को हटा दें, तो कारोबार के लिए उपलब्ध चांदी का स्टॉक करीब 26.7 करोड़ औंस है. अक्टूबर 2025 में दर्ज निचले स्तर के मुकाबले यह लगभग दोगुना है. अ
मेरिका, चीन और भारत के प्रमुख कमोडिटी एक्सचेंजों पर भी चांदी का स्टॉक पिछले कुछ महीनों में बढ़ा है. इसकी एक वजह निवेशकों की घटती दिलचस्पी भी है. साल 2025 में निवेशकों ने चांदी से जुड़े ETP में बड़ी रकम लगाई थी. इससे बाजार में उपलब्ध चांदी का बड़ा हिस्सा निवेश के लिए जमा हो गया था. लेकिन इस साल इन उत्पादों से करीब 6 करोड़ औंस चांदी निकल चुकी है. इससे बाजार में चांदी की उपलब्धता बढ़ गई है.
चांदी के सिक्कों की खरीदारी में भी भारी गिरावट
चांदी में निवेश करने वाले लोगों की दिलचस्पी कम होने का असर सिक्कों की बिक्री पर भी दिख रहा है. Metals Focus के सर्वे के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में बड़ी टकसालों की ओर से चांदी के बुलियन सिक्कों की बिक्री पहली तिमाही के मुकाबले 80 फीसदी से ज्यादा गिर गई. यह 2010 में सर्वे शुरू होने के बाद किसी भी तिमाही का सबसे निचला स्तर था.