पाकिस्तान में महिलाओं को आज भी बराबरी, सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ता है। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक अधिकारों में प्रगति के बावजूद कई मामलों में महिलाएं पितृसत्तात्मक सोच, हिंसा और सामाजिक दबाव का सामना कर रही हैं।

ऐसी ही टिप्पणियां सोशल मीडिया हैंडल X पर चल रही हैं। क्योंकि पाकिस्तान के कराची में औरत मार्च निकालने वालों को वहां की पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इसी कारण महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई का नाम बन चुकीं शीमा करमानी एक बार फिर सुर्खियों में हैं।
कराची में औरत मार्च से जुड़े कार्यक्रम के दौरान पुलिस ने उन्हें और अन्य कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया, जिसके बाद पाकिस्तान में अभिव्यक्ति की आजादी, महिला अधिकारों जैसे मुद्दों और राज्य के रवैये पर नई बहस छिड़ गई है।
दरअसल कराची में रविवार को औरत मार्च निकलने वाली थी। जिसके लिए मंगलवार को औरत मार्च से जुड़ी सात महिला एक्टिविस्ट्स नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) की मांग को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने कराची प्रेस क्लब जा रही थीं। इस दौरान कराची पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
हिरासत में ली गई महिलाओं में मशहूर सामाजिक कार्यकर्ता शीमा करमानी और कराची सिटी काउंसिल की सदस्य शहजादी राय भी शामिल थीं। हालांकि बाद में सिंध के गृह मंत्रीजियाउल हसन लांजर के आदेश पर सभी लोगों को रिहा कर दिया गया, लेकिन इस घटना के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। कई नेटिजन्स ने इसे पाकिस्तान में सिकुड़ती नागरिक आजादी और महिलाओं की आवाज दबाने की कोशिश करार दिया।
पूर्व मिस यूनिवर्स पाकिस्तान का भी फूटा गुस्सा
पूर्व मिस यूनिवर्स पाकिस्तान एरिका रॉबिन Eने पाकिस्तान में महिलाओं के अधिकारों को लेकर हो रही राजनीति और महिलाओं द्वारा ही दूसरी महिलाओं को निशाना बनाए जाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर शीमा करमानी का वीडियो शेयर कर उनकी गिरफ्तारी पर प्रतिक्रिया दी।
एरिका ने कहा कि जब महिलाएं अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाती हैं, तब सबसे दुखद बात यह होती है कि दूसरी महिलाएं ही उन्हें नीचा दिखाने लगती हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महिलाएं एक-दूसरे का साथ नहीं देंगी, तो समाज में बदलाव कैसे आएगा।
इस मामले के बाद शीमा करमानी काफी ज्यादा सुर्खियों में आ गई हैं। ऐसे में उनके बारे में और जिस औरत मार्च को लेकर उन्हें हिरासत में लिया गया उसके बारे में जानना जरूरी है। आइये बताते हैं…
कौन हैं शीमा करमानी?
शीमा करमानी पाकिस्तान की जानी-मानी सामाजिक कार्यकर्ता, क्लासिकल डांसर, थिएटर आर्टिस्ट और महिला अधिकारों की आवाज़ हैं। उनका जन्म 1951 में हुआ था और उन्होंने अपने करियर में कला को सामाजिक बदलाव का माध्यम बनाया। वह खास तौर पर भरतनाट्यम जैसी भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली को पाकिस्तान में आगे बढ़ाने के लिए जानी जाती हैं।
महिलाओं के लिए शीमा करमानी की पहल
उन्होंने ‘तहरीक-ए-निस्वां’ नाम का सांस्कृतिक संगठन शुरू किया, जो थिएटर, नृत्य और कला के जरिए महिलाओं के अधिकार, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय के मुद्दे उठाता है। यह संगठन पाकिस्तान के गरीब और पिछड़े इलाकों में जाकर महिलाओं को जागरूक करने का काम करता रहा है।
जिया-उल-हक दौर में विरोध की आवाज बनीं
शीमा करमानी का नाम पाकिस्तान में उस दौर से जुड़ा है जब जनरल जिया-उल-हक के शासन में महिलाओं और कला पर कई पाबंदियां लगाई गई थीं। उस समय उन्होंने खुले तौर पर इन नीतियों का विरोध किया। उन्होंने नृत्य और थिएटर के जरिए कट्टरपंथ और महिलाओं पर हो रहे अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई।
उनकी पहचान सिर्फ कलाकार होने तक सीमित नहीं, बल्कि वो ऐसा चेहरा बन गईं जिसने पाकिस्तान में महिलाओं की स्वतंत्रता और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के लिए लगातार संघर्ष किया।
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क्या है औरत मार्च और शीमा करमानी का इससे क्या है रिश्ता?
औरत मार्च पाकिस्तान का बड़ा महिला आंदोलन माना जाता है, जिसमें महिलाएं समान अधिकार, घरेलू हिंसा के खिलाफ कानून, सुरक्षित सार्वजनिक जगहें और लैंगिक बराबरी की मांग करती हैं। शीमा करमानी लंबे समय से इस आंदोलन का हिस्सा रही हैं और हर साल इसके कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
सम्मान और पहचान
शीमा करमानी को पाकिस्तान में कला और महिला अधिकारों के क्षेत्र में योगदान के लिए कई सम्मान मिल चुके हैं। उन्हें 2023 में पाकिस्तान सरकार ने ‘प्राइड ऑफ परफॉर्मेंस’ सम्मान भी दिया गया था। इसके अलावा वह नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित होने वाली पाकिस्तान की प्रभावशाली महिलाओं में भी शामिल रही हैं।
आज शीमा करमानी सिर्फ एक कलाकार नहीं, बल्कि पाकिस्तान में महिलाओं की आजादी, अभिव्यक्ति और बराबरी की लड़ाई का मजबूत चेहरा बन चुकी हैं। उनकी हिरासत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पाकिस्तान में महिलाओं की आवाज को अब भी सहजता से स्वीकार नहीं किया जाता।
इस गाने से जानते हैं ज्यादातर लोग
साल 2022 में आया गाना ‘पसूरी’ भारत में भी काफी लोकप्रिय हुआ था। ज्यादातर लोग शीमा करमानी को इस गीत से जानते हैं। ये एक पाकिस्तानी गाना था, जिसे अली सेठी और शाए गिल ने गाया था। ये गाना दो बिछड़े प्रेमियों की भावनाओं और उनकी तड़प को बेहद खूबसूरती से बयां करता है। इसमें शीमा करमानी को बेहद खूबसूरती से उस दर्द को बयां करते हुए दिखाया गया था।





