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कोई सोच नहीं सकता छोटा भाई ही काल बन जाएगा, बड़े भाई, भाभी और 2 बच्चों को एकसाथ मार डाला, कैमूर सूटकेस कांड का सनसनीखेज खुलासा

कोई सोच नहीं सकता छोटा भाई ही काल बन जाएगा, बड़े भाई, भाभी और 2 बच्चों को एकसाथ मार डाला, कैमूर सूटकेस कांड का सनसनीखेज खुलासा

बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में सूटकेस और बोरों में मिले चार टुकड़े-टुकड़े शवों के दिल दहला देने वाले हत्याकांड का खुलासा पुलिस ने कर दिया है. बीते दिनों मोहनिया-रामगढ़ मार्ग पर दुर्गावती नदी पुल के नीचे पड़े दो सूटकेसों से जब इंसानी अंग बरामद हुए, तब किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि यह एक ही परिवार के चार लोगों की इतनी बेरहमी से की गई हत्या का मामला होगा. कुछ ही दिनों बाद नहर किनारे बोरों में मिले शवों के अन्य टुकड़ों ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी. पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि एक भाई ने अपने ही बड़े भाई, भाभी और दो मासूम बच्चों को मौत के घाट उतार दिया. हत्या के बाद शवों को 18 टुकड़ों में काटकर अलग-अलग जगह फेंक दिया गया, ताकि पहचान मिटाई जा सके.

सूटकेस और बोरों में मिले थे 4 शव के टुकड़े

कैमूर एसपी हरिमोहन शुक्ला ने मीडिया से बातचीत में इस भयावह और दिल दहला देने वाले मामले का खुलासा करते हुए बताया कि 10 मई को मोहनिया-रामगढ़ मार्ग पर दुर्गावती नदी पुल के नीचे दो सूटकेस में कटे हुए शवों के अंग मिले थे. पुलिस अनुसंधान में जुटी ही थी कि 12 मई को अभयदेय गांव के पास नहर किनारे दो बोरों में मानव अंगों के कटे टुकड़े बरामद हुए. कुल मिलाकर एक महिला, एक पुरुष और दो बच्चों के शव थे, जिन्हें हत्यारों ने 18 टुकड़ों में काटा था.

पहचान से खुली गुत्थी, छोटे भाई ने कबूला जुर्म

पुलिस जांच में शवों की पहचान रामगढ़ थाना क्षेत्र के डहरक गांव निवासी कृष्ण मुरारी गुप्ता, उनकी पत्नी दुर्गेश कुमारी और दो मासूम बच्चों के रूप में हुई. इसके बाद एसपी के नेतृत्व में गठित SIT टीम ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर छोटे भाई विकास गुप्ता को हिरासत में लेकर पूछताछ की. विकास ने अपने भाई, भाभी और दो बच्चों की हत्या कर शवों को सूटकेस और बोरे में भरकर स्कूटी से फेंकने की बात कबूल की. उसकी निशानदेही पर पुलिस ने दो मृतकों के सिर, एक देसी कट्टा, तीन कारतूस, हत्या में प्रयुक्त चाकू, स्कूटी और लोहे का फाइटर बरामद किया.

मां की शिकायत पर रची गई थी हत्या की साजिश

एसपी हरिमोहन शुक्ला ने बताया कि परिवार में हमेशा पारिवारिक कलह चलता था. इसको लेकर मृतक कृष्ण मुरारी गुप्ता अपने भाई और मां के साथ मारपीट कर देता था. 5 मई को भी किसी बात पर कृष्ण मुरारी का अपनी मां से झगड़ा हुआ. इसके बाद मां ने महाराष्ट्र में काम कर रहे अपने छोटे बेटे विकास गुप्ता को फोन कर मारपीट की सूचना दी और उसे बुला लिया. इसी के बाद विकास ने कृष्ण मुरारी को जान से मारने का मन बना लिया. उसने अपने साथ काम कर रहे मित्र दीपक राजपूत के साथ हत्या की योजना बनाई और उसे लेकर डहरक गांव स्थित घर आ गया.

पहले पति-पत्नी, फिर दो बच्चों की कर दी हत्या

बीते 7 मई को विकास गुप्ता, उसका छोटा भाई राहुल उर्फ गौतम और दीपक राजपूत मिलकर चाकू से हमला कर कृष्ण मुरारी की हत्या कर देते हैं. मृतक की पत्नी ने जब यह नजारा देखा तो घबराकर भागने लगी. तब तीनों ने उसे भी पकड़कर चाकू से गोद-गोदकर मार डाला. उस समय दोनों बच्चे पढ़ने गए थे. जब बच्चे लौटे और अपने माता-पिता को खोजने लगे तो उनकी भी हत्या कर दी गई. यह सब मृतक की मां और विकास गुप्ता की पत्नी के सामने होता रहा.

18 टुकड़ों में काटकर सूटकेस और बोरे में फेंके शव

हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए चारों शवों को 18 टुकड़ों में काटकर बोरी और सूटकेस में भरकर अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया गया. एसपी ने बताया कि इस हत्या में मृतक के दो सगे भाई, एक भाभी, मृतक की मां और विकास का दोस्त दीपक राजपूत शामिल हैं. दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की छापेमारी जारी है.

परिवार-समाज के लिए क्या संदेश ?

मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखें तो यह घटना सिर्फ एक हत्याकांड नहीं, बल्कि टूटते पारिवारिक रिश्तों, बढ़ते गुस्से और संवादहीनता की खतरनाक तस्वीर भी है. छोटे-छोटे विवाद जब नफरत और हिंसा में बदल जाते हैं, तब उसका अंजाम पूरे परिवार को खत्म कर देता है. समाज और परिवारों को यह समझने की जरूरत है कि विवाद का समाधान बातचीत और कानून से हो सकता है, हिंसा से नहीं. मासूम बच्चों की मौत इस बात की सीख देती है कि किसी भी परिस्थिति में इंसानियत नहीं मरनी चाहिए.

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