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किस दिग्गज ने कहा-शेयर बाजार की ‘फेरारी’ है भारत, कर दी सेंसेक्स के 3 लाख पहुंचने की भविष्यवाणी

जब मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल उथल-पुथल के बीच दलाल स्ट्रीट पर बुल्स और बेयर्स के बीच टकराव चल रहा है, तब मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज़ के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने कहा कि ग्लोबल मार्केट में भारत एक फेरारी है, और मल्टी-बैगर स्टॉक्स के लिए दुनिया के सबसे अच्छे हंटिंग ग्राउंड्स में से एक बना हुआ है.

किस दिग्गज ने कहा-शेयर बाजार की ‘फेरारी’ है भारत, कर दी सेंसेक्स के 3 लाख पहुंचने की भविष्यवाणी
किस दिग्गज ने कहा-शेयर बाजार की ‘फेरारी’ है भारत, कर दी सेंसेक्स के 3 लाख पहुंचने की भविष्यवाणी

ग्रो इंडिया इंवेस्टर फेस्टिवल 2026 में बोलते हुए, रामदेव अग्रवाल ने कहा कि दशकों की कंपाउंडिंग, बढ़ते फाइनेंशियलाइजेशन और स्ट्रक्चरल ग्रोथ के ट्रेंड्स ने भारतीय मार्केट की एक मजबूत नींव रखी है. अग्रवाल ने कहा कि मैंने 40 सालों में सेंसेक्स को 100 से बढ़कर 80,000 तक पहुंचते देखा है. मेरे लिए यह मानना ​​कि अगले 40 सालों में यह सफर कुछ अलग होगा, इसके लिए कोई तर्क नहीं है.

साउथ कोरिया और जापान के मार्केट में हाल ही में काफी जबरदस्त उछाल देखने को मिला है और वो रिकॉर्ड लेवल पर पहुंच गए हैं. जबकि भारतीय शेयर बाजार ने तुलनात्मक रूप से कम रिटर्न दिया है. कई एनालिस्ट्स ने बताया कि AI बूम की वजह से इन मार्केट में से कई में मजबूत कमाई देखने को मिल रही है, जो उन मार्केट में FPI के निवेश को आकर्षित कर रही है. हालांकि, अग्रवाल ने इस बात को दोहराया कि भारत का लॉन्ग-टर्म स्ट्रक्चरल रास्ता बेजोड़ बना है, साथ ही उन्होंने यह भी माना कि कुछ सेक्टर अभी AI-बेस्ड कमाई के साइकिल से फायदा उठा रहे हैं.

भारत के सेंसेक्स और साउथ कोरिया के कॉस्पी के बीच तुलना करते हुए—जो दोनों जनवरी 1980 में लॉन्च हुए थे—अग्रवाल ने बताया कि जहां कोरियन बेंचमार्क इंडेक्स आज लगभग 5,000 पॉइंट्स पर है, वहीं सेंसेक्स 80,000 के पार पहुंच गया है. उन्होंने इस इवेंट में कहा कि फॉर्म शायद कुछ समय के लिए हो, लेकिन क्लास हमेशा के लिए होती है. भारत ही सही रास्ता है.

मार्केट एक्सपर्ट ने बताया कि पिछले दो दशकों में डॉलर के हिसाब से भारत का मार्केट कैपिटलाइजेशन सालाना लगभग 14 फीसदी की दर से बढ़ा है, जबकि US मार्केट के लिए यह लगभग 7 फीसदी रहा है. उन्होंने आगे कहा कि हर पाँच से छह सालों में, आप दोगुना हो जाते हैं. यही इसकी रफ्तार है.

भारत में ज्यादा मल्टीबैगर क्यों बनते हैं?

MOFSL के चेयरमैन ने कहा कि उनकी निवेश की सोच हमेशा से ऐसे बिजनेस ढूंढने पर रही है जो तेजी से बढ़ती इकोनॉमीज के अंदर तेजी से बढ़ते उद्योगों में काम कर रहे हों. थॉमस फेल्प्स की किताब 100 to 1 in the Stock Market से प्रेरित एक अंदरूनी स्टडी का ज़िक्र करते हुए, अग्रवाल ने कहा कि एनएसई 500 में शामिल लगभग 20 फीसदी कंपनियों ने एक दशक तक 25 फीसदी से ज्यादा सालाना रिटर्न दिया — जो असल में 10-मल्टीबैगर बन गईं. उन्होंने कहा कि एसएंडपी 500 में यह आंकड़ा सिर्फ 7% के आस-पास था.

उन्होंने कहा कि मल्टी-बैगिंग वहीं होती है जहां ग्रोथ सबसे तेज होती है. आपको सबसे ज्यादा मल्टी-बैगर उस देश में मिलते हैं जो सबसे तेजी से बढ़ रहा हो और उस उद्योग में मिलते हैं जो सबसे तेजी से बढ़ रहा हो. बाजार के इस अनुभवी खिलाड़ी के अनुसार, दूरदृष्टि, हिम्मत और सब्र — ये तीन चीजें ही बड़े विनर शेयरों को पहचानने का फॉर्मूला हैं. उन्होंने आगे कहा कि जब भी आप किसी बड़े शेयर पर दांव लगाते हैं, तो ज्यादातर आप अकेले ही होते हैं. उस शेयर के साथ टिके रहने के लिए आपको पक्का यकीन होना चाहिए.

अग्रवाल ने कहा कि निवेशक अक्सर इस बात को कम आंकते हैं कि लंबे समय में कंपाउंडिंग कैसे काम करती है. उन्होंने बताया कि अगर कोई शेयर दो दशकों में 100 गुना रिटर्न देता है, तो ज्यादातर दौलत आमतौर पर आखिरी कुछ सालों में ही बनती है. उन्होंने कहा कि आप 19 साल तक इंतजार करते हैं, क्योंकि ज्यादातार कंपाउंडिंग 19वें और 20वें साल में ही होती है.

किस कंपनी में किया था शुरुआती निवेश

रामदेव अग्रवाल ने भारती एयरटेल में अपने शुरुआती निवेश को याद किया. 2003 में, नेटवर्क कारोबार के अर्थशास्त्र का अध्ययन करने और सुनील भारती मित्तल से बात करने के बाद, यह मार्केट एक्सपर्ट इस बात से आश्वस्त हो गया कि भारत की मोबाइल क्रांति बहुत बड़ा वैल्यू पैदा करेगी.

उस समय, एक अरब से ज्यादा आबादी वाले भारत में केवल 50 मिलियन के आस-पास फिक्स्ड-लाइन फोन थे. अग्रवाल ने अनुमान लगाया कि भारती एयरटेल अगले पांच वर्षों में 27,00028,000 करोड़ रुपए का मुनाफा कमा सकती है, भले ही उसका मार्केट कैपिटलाइजेशन उस समय केवल 5,000 करोड़ रुपए के आस-पास था.

उन्होंने अपने साथियों और दोस्तों के संदेह के बावजूद, भारती एयरटेल के शेयर लगभग 1930 रुपए प्रति शेयर के भाव पर खरीदे. उन्होंने याद करते हुए कहा कि मैं पूरे समय अकेला था. हालांकि उन्होंने दबाव में आकर कुछ शेयर जल्दी बेच दिए थे, लेकिन उन्होंने एक बड़ा हिस्सा अपने पास बनाए रखा, क्योंकि शेयर का मूल्य कई गुना बढ़ गया था. उनका अंतिम निकास कई साल बाद लगभग 650 रुपए के भाव पर हुआ, जिससे उन्हें लगभग 25 गुना का रिटर्न मिला.

नेक्स्ट जेरनेशन के विनर्स

अग्रवाल ने बताया कि भारत का बढ़ता कैपिटल मार्केट इकोसिस्टम मल्टी-बैगर्स (कई गुना रिटर्न देने वाले शेयर) की नेक्स्ट वेव पैदा कर सकता है. उन्होंने कहा कि हम हर महीने लगभग 3 मिलियन नए ग्राहक जोड़ रहे हैं… हमारे पास पहले से ही 220 मिलियन से ज्यादा डीमैट अकाउंट हैं. 203132 तक, हम 500600 मिलियन तक पहुंच सकते हैं.

उन्होंने कहा कि रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी से ब्रोकर्स, एक्सचेंज, एसेट मैनेजर्स, वेल्थ प्लेटफॉर्म और डिपॉजिटरीज में अवसर पैदा होंगे. उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस क्षेत्र की गहरी समझ होने के बावजूद, वे BSE में आई जबरदस्त तेजी का फायदा उठाने से चूक गए. उन्होंने हंसते हुए कहा कि शेयर का भाव लगभग 50 गुना बढ़ गया, और मैंने एक भी पैसा नहीं कमाया. आज की क्विक कॉमर्स की गति 2003 की भारती एयरटेल जैसी ही है

अग्रवाल ने भारत के क्विक कॉमर्स उद्योग और टेलीकॉम के शुरुआती दिनों के बीच समानताएं बताईं. उन्होंने कहा कि इस सेक्टर में काम करने वाली कंपनियां अभी भी भारी कैश खर्च (cash-burn) के दौर से गुजर रही हैं, लेकिन इसके अंतर्निहित नेटवर्क प्रभाव अंततः बहुत बड़े कारोबार खड़े कर सकते हैं.

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किस तरह की कंपनियों से रहें दूर?

ग्रोथ (बढ़ोतरी) के प्रति अपनी चाहत के बावजूद, अग्रवाल ने कहा कि वे बिजनेस का वैल्यूएशन करते समय कुछ सख्त फिल्टर अपनाते हैं. वे ऐसी कंपनियों से दूर रहते हैं जिनका ‘रिटर्न ऑन इक्विटी’ 20 फीसदी से कम होता है, और बिजनेस की क्वालिटी के एक संकेत के तौर पर वे ‘रिसीवेबल्स साइकिल’ (पैसे आने-जाने के साइकिल) पर खास ध्यान देते हैं.

उन्होंने कहा कि अगर ‘रिटर्न ऑन इक्विटी’ 9 या 10 फीसदी है, तो मैं मीटिंग में जाना भी नहीं चाहता. उन्होंने आगे कहा कि मैनेजमेंट की क्वालिटी उनके लिए सबसे बड़ा फिल्टर है. उन्होंने उन प्रमोटर्स का जिक्र करते हुए कहा कि वे तो खुद तो बर्बाद होंगे ही, आपको भी अपने साथ ले डूबेंगे. अग्रवाल ने इस बात पर भी जोर दिया कि सिर्फ मैनेजमेंट की प्रेजेंटेशन पर निर्भर रहने के बजाय, फैक्ट्रियों का दौरा करना और वहां के कामकाज को खुद अपनी आंखों से देखना ज्यादा जरूरी है.

क्या 2036 तक सेंसेक्स जाएगा 3 लाख के पार?

अग्रवाल भारत की लंबी अवधि की मैक्रोइकोनॉमिक दिशा को लेकर काफी आशावादी दिखे. उन्होंने अनुमान लगाया कि अगले छह से सात सालों में प्रति व्यक्ति आय दोगुनी हो सकती है. शेयर बाजार के इस अनुभवी खिलाड़ी का मानना ​​है कि लगातार बढ़ती कमाई और फाइनेंशियल एसेट्स में लोगों की बढ़ती भागीदारी के चलते, 2030 तक सेंसेक्स 1.5 लाख के आंकड़े को छू सकता है, और संभवतः 2036 तक 3 लाख तक पहुंच सकता है. उन्होंने कहा कि छह सालों में 1.5 लाख तक पहुंचना जितना पक्का है, उससे कहीं ज्यादा पक्का यह है कि 12 सालों में सेंसेक्स 3 लाख तक पहुंच जाएगा. इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि कंपाउंडिंग इसी तरह काम करती है.

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