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किसानों की बढ़ेगी कमाई! खेतों में फसल के साथ बिजली बनाने की तैयारी, नई पॉलिसी लाएगी सरकार​

भारत सरकार खेती के साथ सौर ऊर्जा बनाने को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार कर रही है. इसके तहत किसान अपनी जमीन पर फसल उगाने के साथ सोलर पैनल लगाकर बिजली भी बना सकेंगे. सरकार का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना और सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अलग से जमीन की जरूरत कम […]

भारत सरकार खेती के साथ सौर ऊर्जा बनाने को बढ़ावा देने के लिए नई नीति तैयार कर रही है. इसके तहत किसान अपनी जमीन पर फसल उगाने के साथ सोलर पैनल लगाकर बिजली भी बना सकेंगे. सरकार का मकसद किसानों की आमदनी बढ़ाना और सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए अलग से जमीन की जरूरत कम करना है. शुरुआती चरण में अगले कुछ वर्षों में 5 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है.

क्या है एग्रीवोल्टिक्स, जिससे किसानों को होगा फायदा?

एग्रीवोल्टिक्स एक ऐसी व्यवस्था है, जिसमें एक ही जमीन पर खेती और सौर बिजली उत्पादन दोनों काम किए जाते हैं. इसके लिए खेतों में फसलों के ऊपर ऊंचे स्ट्रक्चर पर सोलर पैनल लगाए जाते हैं. इससे खेती की जमीन का इस्तेमाल बिजली बनाने के लिए भी किया जा सकता है. केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने बुधवार को नई दिल्ली में आयोजित एग्रीवोल्टिक्स वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस 2026 में बताया कि भारत में कुल 16 करोड़ हेक्टेयर कृषि भूमि में से करीब 30 प्रतिशत जमीन पर एग्रीवोल्टिक्स परियोजनाएं लगाई जा सकती हैं. इससे देश में सौर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की बड़ी उम्मीद है.

मंत्री के मुताबिक, भारत में लगभग 85 प्रतिशत किसान छोटे और सीमांत किसान हैं. ऐसे किसान अपनी जमीन का एक हिस्सा खेती बंद करके सोलर प्रोजेक्ट के लिए नहीं दे सकते. एग्रीवोल्टिक्स के जरिए वे खेती करते हुए बिजली उत्पादन से भी कमाई कर सकते हैं.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा संभावना

महाराष्ट्र, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तर प्रदेश में एग्रीवोल्टिक्स की काफी संभावनाएं हैं. इन छह राज्यों में देश की कुल अनुमानित एग्रीवोल्टिक्स क्षमता का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा मौजूद है. सरकार के मुताबिक, सामान्य तौर पर 1 मेगावाट सौर ऊर्जा क्षमता स्थापित करने के लिए करीब 4 एकड़ जमीन की जरूरत होती है. एग्रीवोल्टिक्स से उसी जमीन पर खेती और बिजली उत्पादन को साथसाथ किया जा सकता है.

सोलर बिजली बनाने की लागत है बड़ी चुनौती

एग्रीवोल्टिक्स को बढ़ावा देने में सबसे बड़ी चुनौती इसकी लागत है. खेतों में फसलों के ऊपर ऊंचे ढांचे पर सोलर पैनल लगाने के कारण इसकी शुरुआती लागत सामान्य सोलर परियोजनाओं से 25 से 30 प्रतिशत ज्यादा हो सकती है. मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक, ऊंचे ढांचे पर लगे सोलर पैनल से बिजली बनाने की लागत करीब 3.20 रुपये प्रति यूनिट है. वहीं, जमीन पर लगाए जाने वाले सामान्य सोलर पैनल से बिजली बनाने की लागत करीब 2.60 रुपये प्रति यूनिट है. ऐसे में दोनों के बीच लागत का अंतर कम करना जरूरी होगा, ताकि यह व्यवस्था किसानों और बिजली परियोजना संचालकों के लिए आर्थिक रूप से फायदेमंद बन सके.

5 गीगावाट क्षमता का शुरुआती लक्ष्य

नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के सचिव संतोष कुमार सारंगी ने बताया कि एग्रीवोल्टिक्स को बढ़ावा देने के लिए नई नीति पर काम चल रहा है. पॉलिसी का ड्राफ्ट सुझाव के लिए लोगों के बीच लेकर जाया जाएगा. राज्यों से भी सुझाव मांगे जाएंगे और उनके आधार पर बदलाव किए जा सकते हैं. सरकार शुरुआती तौर पर अगले कुछ वर्षों में 5 गीगावाट क्षमता विकसित करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. इसके अलावा, प्रस्तावित पीएमकुसुम 2.0 योजना में फसलों के साथ सोलर पैनल लगाने को बढ़ावा देने के लिए 10 गीगावाट क्षमता का अलग प्रावधान भी शामिल किए जाने की उम्मीद है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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