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Automobile

कार के इन पार्ट्स पर आता है सबसे ज्यादा खर्च, इंश्योरेंस क्लेम में बढ़ जाता है बिल​

कार चलाते समय छोटीमोटी खरोंच या डेंट लगना आम बात है. लेकिन अगर एक्सीडेंट थोड़ा बड़ा हो जाए, तो कार की मरम्मत का खर्च अचानक काफी बढ़ सकता है. खासकर तब, जब नुकसान कार के उन हिस्सों में हुआ हो जिनकी कीमत ज्यादा होती है. ऐसे में इंश्योरेंस पॉलिसी होने पर बड़ा खर्च क्लेम के […]

कार चलाते समय छोटीमोटी खरोंच या डेंट लगना आम बात है. लेकिन अगर एक्सीडेंट थोड़ा बड़ा हो जाए, तो कार की मरम्मत का खर्च अचानक काफी बढ़ सकता है. खासकर तब, जब नुकसान कार के उन हिस्सों में हुआ हो जिनकी कीमत ज्यादा होती है. ऐसे में इंश्योरेंस पॉलिसी होने पर बड़ा खर्च क्लेम के जरिए कवर हो सकता है, लेकिन यह जानना भी जरूरी है कि कार के किन पार्ट्स की मरम्मत या रिप्लेसमेंट जेब पर सबसे ज्यादा असर डाल सकती है.

बंपर और बॉडी पार्ट्स

में सबसे पहले नुकसान अक्सर कार के बाहरी हिस्सों को होता है. बंपर, फेंडर, बोनट, डोर और टेलगेट जैसे पार्ट्स टूट या डैमेज हो सकते हैं. अगर सिर्फ डेंट या खरोंच है तो रिपेयर से काम चल सकता है, लेकिन ज्यादा नुकसान होने पर पूरा पार्ट बदलना पड़ सकता है. इसके साथ पेंट और लेबर का खर्च भी जुड़ जाता है.

हेडलाइट और टेललाइट

कार की लाइटें भी महंगे पार्ट्स में शामिल हो सकती हैं. खासकर नई कारों में और स्मार्ट लाइटिंग सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ गया है. इन लाइट्स में सिर्फ बल्ब नहीं, बल्कि कई इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट भी होते हैं. इसलिए इनके टूटने पर रिप्लेसमेंट बिल काफी बढ़ सकता है.

विंडशील्ड और ग्लास

एक्सीडेंट या सड़क पर पत्थर लगने से कार का विंडशील्ड टूट सकता है. अगर नुकसान ज्यादा है तो इसे बदलना पड़ता है. कुछ कारों में विंडशील्ड के साथ कैमरा या सेंसर भी जुड़े होते हैं. ऐसे मामलों में ग्लास बदलने के बाद सेंसर की कैलिब्रेशन का खर्च भी जुड़ सकता है.

अलॉय व्हील और टायर

तेज टक्कर या गड्ढे में जोर से पहिया लगने पर टायर और अलॉय व्हील दोनों खराब हो सकते हैं. अगर अलॉय मुड़ जाए या टूट जाए, तो इसे बदलने की जरूरत पड़ सकती है. प्रीमियम कारों में बड़े साइज के अलॉय और महंगे टायर होने की वजह से खर्च और बढ़ सकता है.

इंजन और दूसरे अंदरूनी पार्ट्स

बड़े एक्सीडेंट में नुकसान सिर्फ बाहर तक सीमित नहीं रहता. इंजन, रेडिएटर, सस्पेंशन, एयरबैग और दूसरे मैकेनिकल या इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स भी प्रभावित हो सकते हैं. इनमें से कुछ पार्ट्स की कीमत काफी ज्यादा होती है, इसलिए ऐसे मामलों में रिपेयर बिल हजारों से लेकर लाखों रुपये तक पहुंच सकता है.

इंश्योरेंस क्लेम से मिल सकती है राहत

कार इंश्योरेंस का काम ऐसे ही बड़े खर्च के समय आर्थिक मदद देना है. हालांकि कितना पैसा मिलेगा, यह आपकी पॉलिसी के कवरेज, डिडक्टिबल, कार की उम्र और नुकसान की स्थिति पर निर्भर करता है. इसलिए पॉलिसी लेते समय सिर्फ प्रीमियम नहीं, बल्कि उसमें शामिल कवरेज और नियमों को समझना भी जरूरी है.

कुल मिलाकर, कार के बाहरी बॉडी पार्ट्स से लेकर लाइट, ग्लास, टायर और अंदर के मैकेनिकल पार्ट्स तक, कई चीजें एक्सीडेंट के बाद रिपेयर बिल को बढ़ा सकती हैं. सही इंश्योरेंस कवरेज ऐसी स्थिति में जेब पर पड़ने वाले बड़े बोझ को कम करने में मदद कर सकता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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