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इस देश में बच्चों को हर महीने 15,000 रुपए देगी सरकार, 18 साल में बन सकते हैं लाखों के मालिक

क्या आपने कभी सुना है कि कोई सरकार देश के हर बच्चों को हर महीने 15000 रुपए की मदद करेगी. नहीं सुना न .. लेकिन आज आपको बताते हैं कि दुनिया में एक ऐसा भी देश हैं जहां की सरकार ने इस तरह की घोषणा की है. आइए जानते हैं कौन सा है ये देश और किस सरकार ने ऐसा फैसला लिया है.

इस देश में बच्चों को हर महीने 15,000 रुपए देगी सरकार, 18 साल में बन सकते हैं लाखों के मालिक
इस देश में बच्चों को हर महीने 15,000 रुपए देगी सरकार, 18 साल में बन सकते हैं लाखों के मालिक

दरअसल यहां बात हो रही है ताइवान की. ताइवान में लगातार घटती जन्मदर को देखते हुए यहां की सरकार ने 6 से 18 साल के बच्चों के लिए एक खास पॉलिसी की घोषणा की है. इस स्कीम के तहत बच्चों के लिए इन्वेस्टमेंट खाते खोले जाएंगे. इस स्कीम के तहत ताइवान के हर ऐसे बच्चे जिनकी उम्र 6 से 18 साल के बीच है. उन्हें 5000 ताइवानी डॉलर यानी करीब 15000 रुपए का मंथली अनाउंस दिया जाएगा.

क्यों लिया गया ये फैसला

ताइवान सरकार ने ये फैसला इसलिए लिया है क्योंकि यहां जन्मदर में लगातार कटौती होती जा रही है. ताइवान की घटती जन्मदर को रोकने के लिए सरकार ने इस स्कीम की घोषणा की है. सीएनबीसी टीवी 18 की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार इन खातों को मैनेज करने लिए प्रोफेशनल्स की भी नियुक्तियां करेगी. रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों 15000 रुपए तो मिलेगा ही साथ ही इन खातों में दो साल की एफडी पर ब्याज भी मिलेगा. ताकि बच्चों को आर्थिक मदद मिल सके.

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क्या है चाइल्ड इन्वेस्टमेंट स्कीम

ताइवान सरकार की ये स्कीम एक तरह से बच्चों के लिए मंथली बाल भत्ते की तरह काम करेगी. इस स्कीम के तहत 18 साल के कम उम्र के बच्चों को यह सुविधा मिलेगी. इस मॉडल के तहत सरकार बच्चों के नाम पर निवेश या बचत फंड तैयार करने की दिशा में काम करती है. कई मामलों में माता-पिता को भी इसमें योगदान देने का विकल्प दिया जाता है. इस स्कीम का मकसद यह होता है कि बच्चा जब बड़ा हो,जोए तब उसके पास शिक्षा, करियर या अन्य जरूरतों के लिए एक मजबूत आर्थिक आधार मौजूद हो.

क्या भारत में भी हैं ऐसी योजनाएं

भारत में भी इस तरह की योजनाओं को लेकर चर्चा होती रही है. हालांकि यहां सुकन्या समृद्धि योजना और पीपीएफ जैसी बचत योजनाएं मौजूद हैं, लेकिन सरकार की ओर से सीधे निवेश आधारित चाइल्ड फंड मॉडल अभी व्यापक स्तर पर लागू नहीं है. जानकारों का मानना है कि अगर भारत जैसे बड़े देश में बच्चों के भविष्य के लिए ऐसा मॉडल लागू होता है, तो यह मिडिल क्लास और लोअर मिडिल क्लास के परिवारों के लिए बड़ा सहारा बन सकता है.

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