पाकिस्तान खासकर सेना प्रमुख आसिम मुनीर के काफी मान-मनौव्वल के बावजूद ईरान पीस डील पर बैठक को तैयार नहीं है. अमेरिका के साथ यह बैठक इस्लामाबाद में प्रस्तावित है. इस बैठक में अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु को लेकर समझौता होना है. हालांकि, ईरान के टालमटोल रवैए को लेकर सवाल उठ रहे हैं. क्योंकि, ईरान को बातचीत में आने के लिए खुद सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने तेहरान का दौरा किया था. मुनीर 48 घंटे तक तेहारन में रुके थे. इसके बावजूद ईरान ने इस्लामाबाद पर भरोसा नहीं किया.

डॉन अखबार के मुताबिक इस्लामाबाद को वार्ता की उम्मीद अब भी है. हालांकि, ईरान की तरफ से उसे कोई ग्रीन सिग्नल नहीं मिला है. सवाल उठ रहा है कि आखिर ऐसा क्यों?
ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं, 3 फैक्ट्स
1. फाइनेंशियल टाइम्स ने एक रिपोर्ट की है. इसमें कहा गया है कि ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है. इसकी एक वजह यह है कि जंग में जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर हमला किया, तब पाकिस्तान ने ईरान के समर्थन में कुछ नहीं कहा. अमेरिका के हर मामले में पाकिस्तान चुप है. इतना ही नहीं, पाकिस्तान ईरान पर वार्ता के लिए लगातार प्रेशर तो बना रहा है, लेकिन अमेरिका को लेकर कोई गारंटी लेने को तैयार नहीं है. इससे यह शक गहरा रहा है कि पाकिस्तान में अमेरिका के इशारे पर यह सब कुछ कर रहा है.
2. अटलांटिक काउंसिल में ईरान मामलों के एक्सपर्ट एलेक्स वेतंका के मुताबिक ईरान को पाकिस्तान पर भरोसा नहीं है. ईरान जानता है कि आगे अगर अमेरिका अपने ही वादे को तोड़ता है तो पाकिस्तान इस पर कुछ नहीं कर पाएगा. पिछली बार चीन के कहने पर ईरान ने अपना डेलिगेशन इस्लामाबाद भेजा था. इस बार चीन भी सीजफायर की प्रक्रिया को लेकर साइलेंट है.
3. ईरान के पूर्व उप राष्ट्रपति अमीर होसेन गाजीदेह ने एक बयान में कहा कि जिस देश को सऊदी से फंड मिलता है. जिस देश को अमेरिका से हथियार मिलता है. जो अमेरिका के लिए अपना बेस खोल सकता है. उस पर बतौर मध्यस्थ कैसे भरोसा किया जा सकता है? पाकिस्तान मध्यस्थता के लिए बिल्कुल उपर्युक्त नहीं है.
मुनीर ने खुद संभाली कूटनीति की कमान
ईरान और अमेरिका के बीच आसिम मुनीर ने खुद कूटनीति की कमान संभाली थी. फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक मुनीर ने वार्ता को सफल बनाने के लिए अपारंपरिक तरीका भी अपनाया. खुद मुनीर सेना के ड्रेस में तेहरान गए. वहां से आकर उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति को फीड दिया.
मुनीर लगातार अमेरिका के संपर्क में बने रहे. अमेरिका को इसी हफ्ते डील फाइनल हो जाने की उम्मीद थी, लेकिन आखिर वक्त में ईरान ने बैठक में शामिल होने से इनकार कर दिया. यह मुनीर की डिप्लोमेसी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.





