Thursday, April 23, 2026
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काम का दबाव, नौकरी जाने का डर…टॉक्सिक वर्क कल्चर से हर साल हो रहीं 8 लाख 40 हजार मौतें: रिपोर्ट

नौकरी, रहन-सहन को बेहतर, आत्मनिर्भरता, परिवार की देख-रेख और एक गरिमामय जीवन जीने में सहायक के लिए होती है, इसी उम्मीद से ज्यादातर लोग अपने शहरों से कंफर्ट को छोड़कर दूसरे शहरों का रुख करते हैं. लेकिन, वही नौकरियां, टॉक्सिक वर्क कल्चर की वजह से जब आपके लिए जानलेवा साबित हो जाएं तो फिर चिंता बढ़ती है. GENEVA अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के नए आंकड़े चौकाने वाले हैं. नई वैश्विक रिपोर्ट के मुताबिक, हर साल 840,000 से ज्यादा ऐसे लोग हैं जिनकी मौत मनोसामाजिक जोखिमों (psychosocial risks) से जुड़ी होती हैं. अब सवाल ये है कि लोगों में ये साइकोसोशल रिस्क आता कहां से है?

काम का दबाव, नौकरी जाने का डर…टॉक्सिक वर्क कल्चर से हर साल हो रहीं 8 लाख 40 हजार मौतें: रिपोर्ट
काम का दबाव, नौकरी जाने का डर…टॉक्सिक वर्क कल्चर से हर साल हो रहीं 8 लाख 40 हजार मौतें: रिपोर्ट

लोगों को काम से जुड़ी चिंताएं, ज्यादा घंटों तक काम में समय देना, नौकरी खोने का डर… इन सभी वजहों से साइकोसोशल रिस्क जन्म लेता है, इस वजह से लोगों में हार्ट और ब्रेन से जुड़ी बीमारियां उनपर हावी होकर जानलेवा साबित होती हैं. कुछ मामलों में मानसिक तनाव की वजह से कर्मचारी सुसाइड भी कर लेते हैं.

GDP में भी नुकसान का अनुमान

रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि इन रिस्क की वजह से हर साल लगभग 45 मिलियन ‘विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष’ (DALYs) का नुकसान होता है. यानी ये बीमारी की वजह से विकलांगता या समय से पहले लोगों मौत के आंकड़ों को उजागर करता है. ऐसे में अनुमान लगाया गया है हर साल वैश्विक GDP के 1.37 प्रतिशत के बराबर आर्थिक नुकसान होता है.

इस रिपोर्ट को अगर सरल शब्दों में समझने की कोशिश करें तो इसका मतलब है वर्क प्लेस पर साइकोलॉजिकल वर्किंग एनवायरमेंट किन बातों पर निर्भर करता है. इसमें सबसे पहली बात है काम करने के तरीके को कैसे डिजाइन और मैनेज किया गया है, ताकि कर्मचारी को अपनी टार्गेट्स को पूरा करने में सुविधा हो सके.

वहीं दूसरी और अहम बात है, ऑफिस या वर्कप्लेस का माहौल कैसा है, जिन कलीग और सीनियर्स और मैनेजमेंट के साथ कर्मचारी काम करता है, उनके साथ रिश्ते और बातचीत किस तरीके का है, क्योंकि ये वजह भी मानसिक बीमारियों का कारण बनती है.इसमें तीसरी चीज ऑफिस की पॉलिसी और नियम कैसे हैं. जैसे तबीयत खराब होने, घर या खुद के काम के लिए समय पर छुट्टियां, हेल्थ से जुड़ी सुविधाएं आदि.

8 लाख 40 हजार मौत के आंकड़े कैसे सामने आए?

इसमें पहला सोर्स है, दुनिया भर में काम पर मौजूद पांच बड़े मनो-सामाजिक रिस्क के वजहों का डेटा

  • ये रिस्क जुड़े हैं, जॉब स्ट्रेन (बहुत ज्यादा काम का दबाव)
  • मेहनत ज्यादा, इनाम कम
  • नौकरी की असुरक्षा (job insecurity)
  • लबे काम के घंटे

दूसरा सोर्स है, वैज्ञानिक अध्ययनों का डेटा, जो बताते हैं कि ऊपर वाले रिस्क कैसे दिल की बीमारी, स्ट्रोक और मानसिक बीमारियों का खतरा लोगों में बढ़ाने में अहम कारक की भूमिका निभाते हैं. इन दोनों को मिलाकर, ILO ने WHO और Global Burden of Disease (GBD) स्टडी से ग्लोबल मौत और हेल्थ डेटा पर ये रिस्क लागू करके आंकड़े जारी किए हैं.

khabarmonkey@gmail.com

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