गुरुवार, 8 अक्टूबर 2026 ब्रेकिंग
Nana Patekar: क्या है सेना की मानद रैंक, नाना पाटेकर कैसे बने कैप्टन? जानें सैलरी-पेंशन के नियम​ | FASTag Minimum Balance: FASTag में कितना बैलेंस रखना जरूरी? जानिए Blacklist होने की वजह​ | SBI FD Calculator: ₹1 लाख के निवेश पर किस अवधि में मिलेगा सबसे तगड़ा रिटर्न?​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Automobile

इलेक्ट्रिक कार की बैटरी बदलना अब होगा सस्ता? भारत में तेजी से बदल रही है तस्वीर​

इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय लोगों के मन में सिर्फ रेंज और चार्जिंग को लेकर ही सवाल नहीं होते, बल्कि बैटरी खराब होने पर उसे बदलने का खर्च भी चिंता बढ़ाता है. बैटरी EV के सबसे महंगे हिस्सों में से एक होती है. हालांकि, बैटरी टेक्नोलॉजी में लगातार हो रहे सुधार और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन […]

इलेक्ट्रिक कार खरीदते समय लोगों के मन में सिर्फ रेंज और चार्जिंग को लेकर ही सवाल नहीं होते, बल्कि बैटरी खराब होने पर उसे बदलने का खर्च भी चिंता बढ़ाता है. बैटरी EV के सबसे महंगे हिस्सों में से एक होती है. हालांकि, बैटरी टेक्नोलॉजी में लगातार हो रहे सुधार और बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन से इसकी लागत घटाने के नए रास्ते खुल रहे हैं.

बैटरी बनाने की टेक्नोलॉजी में क्या बदला?

बैटरी कंपनियां अब बेहतर सेल केमिस्ट्री, नए डिजाइन और ज्यादा आसान मैन्युफैक्चरिंग तरीकों पर काम कर रही हैं. इससे कम मटीरियल में ज्यादा एनर्जी स्टोर करने और प्रोडेक्सन के दौरान होने वाली बर्बादी घटाने में मदद मिल सकती है. नए बैटरी पैक में कुछ अतिरिक्त पार्ट्स की जरूरत भी कम हो सकती है, जिससे उनका स्ट्रक्चर आसान बनता है.

इसे स्मार्टफोन की टेक्नोलॉजी से समझ सकते हैं. समय के साथ फोन के प्रोसेसर, कैमरे और बैटरी बेहतर हुए हैं. साथ ही, बड़े पैमाने पर प्रोडक्शन से कई पुराने कंपोनेंट बनाना सस्ता हुआ है. EV बैटरी इंडस्ट्री में भी कुछ ऐसा ही बदलाव देखने को मिल रहा है.

ज्यादा प्रोडक्शन और नई केमिस्ट्री का फायदा

जब कंपनियां बड़ी संख्या में बैटरी सेल बनाती हैं, तो फैक्ट्रियों की क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होता है. सप्लायर भी बड़े स्तर पर काम कर पाते हैं और उत्पादन का खर्च ज्यादा यूनिट्स में बंट जाता है. दूसरी ओर, कंपनियों के बीच बढ़ती मुकाबला भी लागत घटाने का दबाव बनाती है.

बैटरी केमिस्ट्री में बदलाव भी अहम है. लिथियम आयरन फॉस्फेट यानी LFP बैटरी इसका एक उदाहरण है. कई EV में यह अपेक्षाकृत कम लागत वाला विकल्प साबित हो सकती है. हालांकि, हर गाड़ी के लिए यही बैटरी सही नहीं होती. कंपनियां रेंज, परफॉर्मेंस, कीमत और टिकाऊपन को ध्यान में रखकर अलगअलग टेक्नोलॉजी चुनती हैं.

क्या पुरानी EV की बैटरी बदलना भी सस्ता होगा?

बैटरी बनाने की लागत कम होने से आने वाले समय में रिप्लेसमेंट पैक सस्ते होने की संभावना बढ़ सकती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर इलेक्ट्रिक कार की बैटरी बदलने का खर्च अपने आप घट जाएगा. नई बैटरी का कार के सॉफ्टवेयर, इलेक्ट्रिकल सिस्टम, आकार और सेफ्टी जरूरतों के साथ मेल खाना जरूरी है.

इसके अलावा, हर समस्या में पूरा बैटरी पैक बदलना जरूरी नहीं होता. अगर खराबी किसी खास सेल या सेक्शन तक सीमित है, तो कुछ मामलों में उसकी मरम्मत संभव हो सकती है. बेहतर सर्विस नेटवर्क और रिपेयर टेक्नोलॉजी से EV मालिकों को आगे चलकर ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं.

भारत में क्यों अहम है बैटरी मैन्युफैक्चरिंग?

भारत में बैटरी बनाने की घरेलू क्षमता बढ़ाने के लिए सरकारी योजनाओं के जरिए भी काम किया जा रहा है. एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल के उत्पादन को बढ़ावा देने वाली PLI स्कीम इसी दिशा में एक कदम है. स्थानीय सप्लाई चेन और बैटरी रीसाइक्लिंग का विस्तार भी लंबे समय में मददगार हो सकता है.

हालांकि, कच्चे माल की कीमत, आयात पर निर्भरता और सप्लाई चेन में बदलाव बैटरी की लागत को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए हर मॉडल की रिप्लेसमेंट कीमत घटने की गारंटी नहीं है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY