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इंडियाबुल्स पर कसा शिकंजा.. 1574 करोड़ के लेन-देन पर सुप्रीम कोर्ट ने दिए कड़े आदेश​

सुप्रीम कोर्ट ने देश की जानीमानी फाइनेंस कंपनी ‘इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस’ पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. अदालत ने इस कंपनी और इससे जुड़ी अन्य संस्थाओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उठाए गए सभी छह गंभीर आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के हवाले कर दी है. दिल्ली पुलिस की जांच दरकिनार सुप्रीम कोर्ट […]

सुप्रीम कोर्ट ने देश की जानीमानी फाइनेंस कंपनी ‘इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस’ पर कड़ा रुख अख्तियार किया है. अदालत ने इस कंपनी और इससे जुड़ी अन्य संस्थाओं के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उठाए गए सभी छह गंभीर आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो के हवाले कर दी है.

दिल्ली पुलिस की जांच दरकिनार

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कर दिया है कि वह इस मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा की पुरानी जांच रिपोर्ट से कोई प्रभाव नहीं लेगा. दरअसल, ईडी द्वारा बताए गए जिन छह आरोपों की बात हो रही है, उनमें से पांच मामलों की शुरुआती जांच EOW कर चुकी है. लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए अब शीर्ष अदालत ने पूरी कमान CBI के हाथों में दे दी है. अदालत ने CBI के साथसाथ EOW को भी सख्त निर्देश दिया है कि वे जल्द से जल्द अपनी नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करें.

1574 करोड़ का संदिग्ध मामला

इस पूरे विवाद में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला मामला 1,574 करोड़ रुपये के एक भारीभरकम लेनदेन का है. यह ईडी की जांच में सामने आया छठा आरोप है. इसे लेकर चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं. पीठ ने मुंबई स्थित धन शोधन निवारण अधिनियम के स्पेशल जज को आदेश दिया है कि वे इस बड़े ट्रांज़ैक्शन की आगे की जांच के लिए CBI की याचिका पर अगले दो हफ्तों के भीतर अपना फैसला सुनाएं. यह समय सीमा दिखाती है कि अदालत इस मामले को लटकाना नहीं चाहती.

सिटिजन व्हिसलब्लोअर फोरम का खुलासा

इस पूरे कानूनी मामले की जड़ ‘सिटिजन व्हिसलब्लोअर फोरम’ नाम के संगठन की एक याचिका है. इस संगठन ने ही सबसे पहले अदालत का दरवाजा खटखटाया था. याचिका में आरोप लगाया गया है कि इंडियाबुल्स से जुड़ी कंपनियों ने कई स्तरों पर वित्तीय गड़बड़ियां की हैं. इनमें संदिग्ध तरीके से बांटे गए लोन और कंपनी के फंड का गलत इस्तेमाल शामिल है. इसके अलावा, बाजार में शेयर की कीमतों में जानबूझकर हेरफेर करने की बात भी कही गई है.

लोन एवरग्रीनिंग का चक्रव्यूह

याचिका में ‘लोन की एवरग्रीनिंग’ का भी गंभीर आरोप है. इसका मतलब ये होता है कि कंपनी अपने पुराने और डूबते हुए कर्ज को चुकाने के लिए ही नए कर्ज ले रही थी. ये एक ऐसा खतरनाक वित्तीय चक्रव्यूह है जो किसी भी संस्था को खोखला कर सकता है.

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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