केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने सोमवार(18 मई) को कहा कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कोई सार्वजनिक संस्था नहीं है,इसलिए वह आरटीआई कानून के तहत किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए जिम्मेदार नहीं है। सीआईसी ने अपने ही 2018 के आदेश को पलटते हुए यह फैसला सुनाया है।

सूचना आयुक्त पीआर रमेश ने कहा कि (BCCI) क्रिकेट प्रबंधन और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भारत के प्रतिनिधित्व से जुड़े जरूरी सार्वजनिक काम करने के बावजूद उसे सार्वजनिक संस्था नहीं माना जा सकता क्योंकि न तो इसका मालिकाना हक है, न ही इसे सरकार संचालित करती है और न ही इसे वित्तीय मदद करती है।
क्या जानकारी मांगी गई थी
पीआर रमेश ने आदेश में कहा, ‘बीसीसीआई को सूचना के अधिकार (RTI) कानून के खंड 2(एच) के तहत ‘सार्वजनिक संस्था’ नहीं माना जा सकता और इसलिए इस मामले के तथ्य और हालात को देखते हुए कानून के नियम उस पर लागू नहीं होते।’ खारिज किए गए अपील में उन नियमों और अधिकारों के बारे में जानकारी मांगी गई थी जिनके तहत बीसीसीआई भारत का प्रतिनिधित्व करता है और राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट के लिए खिलाड़ियों को चुनता है।
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दूसरे बड़े क्रिकेट बोर्ड भी ऐसे ही करते हैं काम
बीसीसीआई का अभी का स्ट्रक्चर और काम करने का तरीका मोटे तौर पर दुनिया भर के दूसरे बड़े क्रिकेट बोर्ड जैसा ही है, जिसमें इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज और पाकिस्तान के बोर्ड भी शामिल हैं। ये बोर्ड जवाब देने वाले कानूनों के सीधे दायरे से बाहर स्वायत या स्वतंत्र निकाय के तौर पर काम करते हैं। हालांकि, कई बोर्ड अपनी मर्जी से वित्तीय और प्रशासनिक जानकारी देते हैं।





