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‘आत्मनिर्भर भारत’ का समर्थन करने वाला साउथ कोरिया इंडिया के लिए कितना अहम और जरूरी?

दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्यूंग 3 दिन के राजकीय दौरे पर भारत में हैं. एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उनका देश भारत के आत्मनिर्भर भारत इनिशिएटिव का पूरा समर्थन करता है. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल भारत के औद्योगिक और आर्थिक विकास के लिए बहुत अहम है. हालांकि म्यूंग ने यह भी माना कि पूरी तरह आत्मनिर्भर बनना अकेले संभव नहीं होता और दक्षिण कोरिया की तरक्की भी दूसरे देशों के सहयोग से ही हुई है. उन्होंने ‘मेक इन इंडिया, टुगेदर विद कोरिया’ की परिकल्पना को साकार करने की बात कही.

‘आत्मनिर्भर भारत’ का समर्थन करने वाला साउथ कोरिया इंडिया के लिए कितना अहम और जरूरी?
‘आत्मनिर्भर भारत’ का समर्थन करने वाला साउथ कोरिया इंडिया के लिए कितना अहम और जरूरी?

म्यूंग ने कहा कि दक्षिण कोरिया भारत का मजबूत साझेदार बनना चाहता है, खासकर रक्षा क्षेत्र में. K9 वज्र होवित्जर प्रोजेक्ट को उन्होंने दोनों देशों के बीच सफल सहयोग का उदाहरण बताया. इस प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 60% से ज्यादा निर्माण भारत में हो रहा है. उन्होंने आगे कहा कि दोनों देश मिलकर टेक्नोलॉजी शेयरिंग, जॉइंट प्रोडक्शन, ऑपरेशन और मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाएंगे, ताकि दोनों की रक्षा इंडस्ट्री एक साथ आगे बढ़ सके. आइए जानते हैं भारत-दक्षिण कोरिया के संबंध कैसे रहे हैं और साउथ कोरिया, भारत के लिए कितना जरूरी है?

1. भारत-साउथ कोरिया के द्विपक्षीय संबंध

दोनों देशों के संबंध काफी स्थिर और मजबूत रहे हैं. दोनों देश अपना स्वतंत्रता दिवस 15 अगस्त को मनाते हैं. भारत और दक्षिण कोरिया ने 1973 में औपचारिक रूप से राजनयिक संबंध स्थापित किए. दोनों देशों ने वर्ष 2023 में अपने राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न मनाया. माना जाता है कि अयोध्या की राजकुमारी सुरिरत्ना ने 48 ईस्वी में कोरिया की यात्रा की और वहां के राजा किम-सुरो से शादी की, जिसके बाद वे रानी हेओ ह्वांग-ओक बनीं.

2. भारत-साउथ कोरिया व्यापार

दोनों देशों ने FY 2024-25 में 27.8 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार किया, जिसे 2030 तक तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने का टारगेट है. अभी तक साउथ कोरिया भारत में 2000 से 2025 तक करीब 6.8 अरब डॉलर का निवेश (FDI) कर चुका है. इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, स्टील और टेक्नोलॉजी सेक्टर में व्यापार लगातार बढ़ रहा है. सैमसंग, हुंडई, LG जैसी बड़ी कोरियाई कंपनियों ने भारत में बड़ा निवेश किया है. करीब 600 कोरियाई कंपनियां भारत में काम कर रही हैं.

3. सेमीकंडक्टर और EV सेक्टर

दक्षिण कोरिया सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) टेक्नोलॉजी में बहुत आगे है. भारत की ताकत सॉफ्टवेयर, आईटी और स्टार्टअप में है. भारत अपनी 90% से ज्यादा सेमीकंडक्टर जरूरतें विदेशों से आयात करता है. भारत के इंटीग्रेटेड सर्किट चिप का करीब 88% चीन से आता है. दक्षिण कोरिया की कंपनियां जैसे सैमसंग और SK हाइनिक्स दुनिया की प्रमुख चिप मैन्युफैक्चरर हैं. अगर भारत कोरिया के साथ मजबूत सप्लाई चेन विकसित करता है, तो उसे सेमीकंडक्टर चिप्स का एक भरोसेमंद वैकल्पिक स्रोत मिलेगा और चीन पर निर्भरता भी कम होगी.

इसके अलावा भारत अपने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के माध्यम से एक ग्लोबल चिप हब बनने की कोशिश कर रहा है, जिसमें दक्षिण कोरियाई तकनीक की भूमिका अहम है. हुंडई भारत में भारी निवेश कर रही है और 2030 तक 5 नई EV लॉन्च करने की योजना बना रही है. दोनों देश मिलकर काम करेंगे तो भारत में चिप मैन्युफैक्चरिंग, EV टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ेगा. इससे भारत को नई तकनीक मिलेगी, रोजगार बढ़ेंगे और मेक इन इंडिया को मजबूती मिलेगी.

4. चीन पर निर्भरता कैसे कम होगी?

भारत 70 से 80% क्रिटिकल मिनरल्स की खरीदारी चीन से करता है. साउथ कोरिया खुद ही 95% से ज्यादा क्रिटिकल मिनरल इंपोर्ट करता है.राष्ट्रपति ली जे म्यूंग ने भारत में दिए इंटरव्यू के दौरान कहा कि किसी एक देश (जैसे चीन) पर ज्यादा निर्भर रहना खतरनाक है. भारत और साउथ कोरिया मिलकर नई सप्लाई चेन बना सकते हैं और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए वैकल्पिक स्रोत तैयार कर सकते हैं. इससे चीन पर निर्भरता कम होगी और दोनों देशों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी.

5. डिफेंस में कैसे मदद मिल रही है?

भारत और साउथ कोरिया के बीच रक्षा क्षेत्र में मजबूत साझेदारी है. K9 वज्र होवित्जर इसका बड़ा उदाहरण है, जिसमें 60% से ज्यादा उत्पादन भारत में हो रहा है. आगे दोनों देश टेक्नोलॉजी शेयरिंग, को प्रोडक्शन, ऑपरेशन और मेंटेनेंस में सहयोग बढ़ाएंगे. इससे भारत की डिफेंस कैपेसिटी और आत्मनिर्भरता दोनों बढ़ेंगी. SIPRI के मुताबिक, 2020 से 24 तक हथियार एक्सपोर्ट के मामले में सा कोरिया दुनिया में 10वें नंबर पर था. टॉप पर अमेरिका, फ्रांस और रूस थे. इस दौरान सा. कोरिया हथियार खरीद के मामले में भारत तीसरे नंबर (7%) पर था. पहले पर पौलैंड (46%) और दूसरे पर फिलीपींस (14%) थे.

6. किन सेक्टर्स में सहयोग बढ़ सकता है?

ऑटोमोबाइल, रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी, स्टील और शिपबिल्डिंग जैसे सेक्टर में बड़ा मौका है. मिडिल ईस्ट युद्ध के कारण सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, ऐसे में जहाज बनाने की क्षमता बढ़ाना भारत के लिए जरूरी हो गया है. दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति के भारत दौरे पर शिप बिल्डिंग को लेकर समझौता हो सकता है. इसके अलावा व्यापार, निवेश, एआई, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण और टेक्नोलॉजी समेत कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने को लेकर भी बात हो सकती है.

khabarmonkey@gmail.com

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