Shani Nakshatra Parivartan 2026: ज्योतिष शास्त्र में शनि के नक्षत्र परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इसका असर व्यक्ति के करियर, आर्थिक स्थिति, रिश्तों और मानसिक स्थिति पर देखने को मिलता है। शनि देव ने हाल ही (17 मई) में रेवती नक्षत्र में प्रवेश किया है और अब वे लंबे समय तक (9 अक्टूबर) इसी नक्षत्र में रहेंगे। इस बार शनि का यह गोचर कुछ राशियों के लिए चुनौतीपूर्ण समय लेकर आ सकता है। तो चलिए जानते हैं किन राशियों को संभलकर रहने की जरूरत है।
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मिथुन राशि वालों पर बढ़ेगा दबाव
ज्योतिषविदों के अनुसार, मिथुन राशि के जातकों के लिए यह समय कामकाज में चुनौतियां बढ़ाने वाला साबित हो सकता है। नौकरी और व्यापार दोनों में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, जिससे मानसिक तनाव और चिड़चिड़ापन महसूस होगा। काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो सकता है। आर्थिक स्थिति भी दबाव में रह सकती है, जिससे कई जरूरी काम प्रभावित हो सकते हैं।
उपाय: इस दौरान बिना योजना के कोई बड़ा फैसला लेने से बचें। हर काम सोच-समझकर करें और पेशेवर जीवन में सावधानी बरतें। नियमित रूप से ॐ शं शनैश्चराय नमः मंत्र का जाप करना लाभकारी माना गया है।
सिंह राशि को रखना होगा खर्चों पर कंट्रोल
आपके लिए आने वाले महीने आर्थिक रूप से थोड़े कठिन रह सकते हैं। अचानक बढ़ते खर्च बजट बिगाड़ सकते हैं और धन की कमी के कारण कुछ जरूरी काम रुक सकते हैं। घरेलू जीवन में भी तनाव बढ़ने के संकेत हैं। इसके अलावा स्वास्थ्य को लेकर भी सतर्क रहने की जरूरत होगी।
उपाय: बिना सोचे-समझे निवेश करने से बचें। कार्यक्षेत्र में सामान्य स्थिति बनाए रखने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ सकती है। रोज सुबह सूर्य देव को अर्घ्य दें और रविवार के दिन गेहूं या गुड़ का दान करें।
धनु राशि पर पड़ेगा मानसिक दबाव
आपके लिए भी यह समय मानसिक दबाव और उलझनों से भरा रह सकता है। शनि की ढैय्या का असर बने बनाए कामों में रुकावट पैदा कर सकता है। कार्यक्षेत्र में लिए गए फैसलों का मनचाहा परिणाम नहीं मिलेगा। वैवाहिक जीवन में भी तनाव बढ़ सकता है और घर का माहौल प्रभावित हो सकता है।
उपाय: हर शनिवार पीपल के पेड़ के सामने सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना गया है। शनि से जुड़ी वस्तुओं का दान करना भी लाभकारी रहेगा। वहीं बुधवार को हरी मूंग का दान करने से बुध देव की कृपा प्राप्त हो सकती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)





