नई दिल्ली के भारत मंडपम में ब्रिक्स समिट का आयोजन किया गया है. यह पहला मौका नहीं है. भारत चौथी बार ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है. इस साल इसका आयोजन होता है, लेकिन इसके सदस्य देश में. यानी हर साल एक अलग सदस्य देश इसका आयोजन करता है और यह जिम्मेदारी सालाना घूमती रहती है.

जो देश उस साल की चेयरशिप संभालता है, वही समिट का आयोजन भी करता है. यह परंपरा 2009 में पहले समिट से चली आ रही है, जब रूस ने येकातेरिनबर्ग में पहली बैठक की मेजबानी की थी. अब सवाल है कि कैसे तय होता है कि अगला समिट किस देश में होगा और क्या होता है इसका मतलब.
अगला आयोजन चीन में
18वां BRICS समिट 1213 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में हो रहा है. भारत ने 1 जनवरी 2026 को ब्राजील से इसकी चेयरशिप संभाली थी. इस साल की थीम है “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”. भारत चौथी बार इसका आयोजन कर रहा है. इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में भी अध्यक्षता कर चुका है. इस साल समिट में ब्राज़ील, रूस, चीन, साउथ अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, इंडोनेशिया और UAE जैसे 11 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं. मेजबान के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में यह आयोजन हो रहा है.
भारत के बाद 19वां BRICS समिट 2027 में चीन में होगा. यह चौथी बार होगा जब चीन इस समिट की मेज़बानी करेगा. इससे पहले चीन 2011 और 2017 में BRICS समिट होस्ट कर चुका है. 2022 में भी बीजिंग में वर्चुअल समिट की अध्यक्षता की थी.
रोटेशन कैसे तय होता है
BRICS में मेजबानी के लिए कोई सख्त अल्फाबेटिकल क्रम तय नहीं है. शुरुआती पांच सदस्य देशों ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका के बीच बारीबारी से चेयरशिप घूमती रही है. सदस्य देश आपसी सहमति से यह तय करते हैं कि अगली बारी किसकी होगी. हाल के वर्षों का क्रम कुछ इस तरह रहा है.
- 2022 — चीन
- 2023 — साउथ अफ्रीका
- 2024 — रूस
- 2025 — ब्राज़ील
- 2026 — भारत
- 2027 — चीन
यह पैटर्न दिखाता है कि मूल पांच देशों में बारी घूम रही है, भले ही 2024 के बाद समूह में नए सदस्य जुड़ चुके हैं.
ब्रिक्स में 11 पूर्ण सदस्य और 10 पार्टनर कंट्री हैं.
BRICS सिर्फ मेजबानी में ही नहीं बदल रही, बल्कि सदस्यता में भी विस्तार हो रहा है. 2024 के कजान समिट में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और UAE पहली बार पूर्ण सदस्य के तौर पर शामिल हुए थे. इसके बाद 2025 में दस और देश बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कज़ाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा, उज़्बेकिस्तान और वियतनाम पार्टनर कंट्री के तौर पर जुड़े. यानी अब BRICS सिर्फ पांच देशों का समूह नहीं, बल्कि दुनिया के एक बड़े हिस्से को साथ लेकर चलने वाला मंच बन चुका है.
ब्रिक्स समिट का रोटेशन क्यों है अहम?
हर साल मेजबान देश ही उस साल के एजेंडे, थीम और प्राथमिकताओं को तय करता है. जैसे भारत ने इस बार ‘पीपलसेंट्रिक’ और ‘ह्यूमैनिटी फर्स्ट’ दृष्टिकोण को आगे रखा है, जो 2025 के रियो समिट में पीएम मोदी के बयान से प्रेरित है. इसी वजह से हर साल का समिट पिछले साल से अलग नज़र आता है.