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अगर आपका BMI नॉर्मल है तब भी आप हो सकते हैं मोटापा के शिकार; डॉक्टरों ने जारी की ओबेसिटी की नई परिभाषा, जानिए

अगर आपका BMI नॉर्मल है तब भी आप हो सकते हैं मोटापा के शिकार; डॉक्टरों ने जारी की ओबेसिटी की नई परिभाषा, जानिए

अब तक हम सभी यही मानते आए हैं कि अगर हमारा बॉडी मास इंडेक्स (BMI) नॉर्मल रेंज में है, तो हम पूरी तरह फिट हैं और मोटापे से कोसों दूर हैं। लेकिन चिकित्सा विज्ञान की एक नई और चौंकाने वाली रिपोर्ट ने सालों पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है। डॉक्टरों और ग्लोबल हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब सिर्फ वजन और लंबाई का पैमाना (BMI) आपके फिट होने की गारंटी नहीं है; सामान्य दिखने वाले लोग भी अंदरूनी मोटापे (Hidden Obesity) के गंभीर शिकार हो सकते हैं। BMI व्यक्ति की लंबाई और वजन के आधार पर यह बताता है कि वो अंडरवेट, सामान्य वजन, ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में आता है या नहीं। लेकिन अब विशेषज्ञों का मानना है कि केवल BMI के आधार पर किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य का सही आकलन नहीं किया जा सकता। डॉक्टरों ने ओबेसिटी यानी मोटापे की परिभाषा में बड़े बदलाव किए हैं। मोटापे (Obesity) को मापने के दशकों पुराने पैमाने फॉर्मूले को लेकर चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। अब डॉक्टर केवल वजन और लंबाई का गणित देखकर किसी को मोटापे का शिकार नहीं मानेंगे, बल्कि शरीर के अंदर छिपे ‘असली खतरे’ की जांच करेंगे, जिसे ‘क्लिनिकल ओबेसिटी’ (Clinical Obesity) नाम दिया गया है।

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अगर आपका BMI नॉर्मल है तब भी आप हो सकते हैं मोटापा के शिकार; डॉक्टरों ने जारी की ओबेसिटी की नई परिभाषा, जानिए
अगर आपका BMI नॉर्मल है तब भी आप हो सकते हैं मोटापा के शिकार; डॉक्टरों ने जारी की ओबेसिटी की नई परिभाषा, जानिए

Aster CMI Hospital, बेंगलुरु में वरिष्ठ सलाहकार एंडोक्रिनोलॉजी,  Dr Mahesh D M के अनुसार, BMI सीधे तौर पर शरीर में मौजूद चर्बी को नहीं मापता और न ही यह बता सकता है कि अतिरिक्त चर्बी किसी व्यक्ति के स्वास्थ्य को किस हद तक प्रभावित कर रही है। एक्सपर्ट ने बताया BMI की सीमाओं को देखते हुए एक्सपर्ट ने क्लिनिकल ओबेसिटी की अवधारणा पेश की है। हाल ही में मेडिकल जर्नल Annals of Internal Medicine में प्रकाशित एक राष्ट्रीय अध्ययन में कहा गया है कि केवल BMI यह नहीं बता सकता कि शरीर में अतिरिक्त चर्बी के कारण किसी अंग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है या नहीं। The Lancet Diabetes & Endocrinology Commission के विशेषज्ञों के अनुसार, क्लीनिकल ओबेसिटी एक ऐसी क्रोनिक बीमारी है जिसमें शरीर में अत्यधिक चर्बी कई तरह की हेल्थ प्रॉब्लम का कारण बनती है।  

BMI और क्लिनिकल ओबेसिटी में क्या अंतर है?

डॉ. महेश बताते हैं कि BMI और क्लिनिकल ओबेसिटी आपस में जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों एक समान नहीं हैं। एक्सपर्ट के  मुताबिक, कोई व्यक्ति बहुत अधिक मांसपेशियों (मसल्स) के कारण उच्च BMI का हो सकता है, जबकि उसके शरीर में अतिरिक्त चर्बी न हो। वहीं कुछ लोगों का BMI सामान्य हो सकता है, लेकिन उनके शरीर में अनहेल्दी स्तर तक चर्बी मौजूद हो सकती है। एक्सपर्ट के मुताबिक BMI एक स्क्रीनिंग टूल है, जबकि क्लिनिकल ओबेसिटी एक मेडिकल डायग्नोसिस है, जो शरीर में चर्बी की मात्रा, लक्षणों और उससे जुड़ी स्वास्थ्य जटिलताओं के आधार पर तय की जाती है।

मोटापे की जांच अब सिर्फ BMI तक सीमित नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार, मोटापे का सही आकलन करने के लिए डॉक्टरों को BMI के अलावा कई अन्य मानकों पर भी ध्यान देना चाहिए जैसे

  • कमर की चौड़ाई,
  • कमर और कूल्हे का अनुपात
  • शरीर में चर्बी का प्रतिशत
  • मेडिकल हिस्ट्री
  • शारीरिक परीक्षण
  • मोटापे से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं
  • कुछ मामलों में शरीर की संरचना (Body Composition) और चर्बी के स्तर को समझने के लिए खास स्कैन और इमेजिंग टेस्ट भी किए जा सकते हैं।

क्लिनिकल ओबेसिटी के संकेत क्या हैं?

डॉ. महेश के अनुसार बॉडी में दिखने वाले कुछ लक्षण क्लिनिकल ओबेसिटी की ओर इशारा कर सकते हैं जैसे

  • रोजमर्रा के कामों में सांस फूलना
  • सीढ़ियां चढ़ने या चलने में परेशानी
  • अत्यधिक थकान महसूस होना
  • नींद संबंधी समस्याएं, जैसे स्लीप एपनिया
  • जोड़ों और पीठ में दर्द
  • गतिशीलता में कमी
  • सामान्य दैनिक कार्य करने में कठिनाई क्लीनिक ओबेसिटी के लक्षण हो सकते हैं।
  • कुछ बीमारियां जैसे टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, फैटी लिवर डिजीज, किडनी रोग, बांझपन (Infertility) की परेशानी के लिए मोटापा ही जिम्मेदार होता है।

क्यों जरूरी है मोटापे की नई परिभाषा?

डॉ. महेश का मानना है कि मोटापे को केवल वजन और BMI के आधार पर नहीं, बल्कि उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव के आधार पर समझना चाहिए। क्लिनिकल ओबेसिटी की नई अवधारणा उन लोगों की पहचान करने में मदद करेगी जिन्हें वास्तव में उपचार और मेडिकल जांच की जरूरत है। मोटापा का पता लगाकर बीमारी की सही पहचान, सटीक इलाज और बेहतर परिणाम हासिल किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer): यह लेख केवल सामान्य जानकारी और पाठक जागरूकता के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। लेख में दी गई जानकारी और मोटापे की नई परिभाषा (क्लीनिकल ओबेसिटी) Aster CMI Hospital के सीनियर एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ. महेश डी एम द्वारा साझा किए गए सुझावों और मेडिकल जर्नल के अध्ययनों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय (Medical Advice) या किसी योग्य डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। अपनी डाइट, लाइफस्टाइल या दवाओं में किसी भी तरह का बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर करें।

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