: के ने शिक्षकों से समाज को बांटने वाली ताकतों के खिलाफ जागरूकता फैलाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि, देश को जातियों और गुटों में बंटे भारत की नहीं, बल्कि ‘एक भारतश्रेष्ठ भारत’ की जरूरत है। समाज को एकजुट रखने और विभाजनकारी सोच को सफल होने से रोकने में शिक्षकों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

रविवार को लखनऊ के आशियाना स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार की ओर से आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने गायत्री मंत्र, भारतीय संस्कृति, सामाजिक एकता और पर्यावरण संरक्षण जैसे मुद्दों पर भी अपने विचार रखे।
गुलामी के दौर का जिक्र कर शिक्षकों को दी नसीहत
याद रखना, इस सृष्टि का पहला मंत्र है गायत्री मंत्र… pic.twitter.com/3hvhh2xF1q
— Yogi Adityanath October 4, 2026
ने कहा कि गुलामी के दौर में समाज को बांटने की कोशिशें हुईं, लेकिन इसी समय कुछ लोगों ने समाज को एकजुट करने और आजादी की आवाज बुलंद करने का काम भी किया। उन्होंने कहा कि आज भी अलगअलग रूपों में ऐसी प्रवृत्तियां देखने को मिलती हैं। CM योगी ने शिक्षकों से अपील की कि वे ऐसी ताकतों को सफल न होने दें और विद्यार्थियों में सामाजिक समरसता, एकता और राष्ट्रभाव की भावना विकसित करें।
‘इस सृष्टि का पहला मंत्र गायत्री मंत्र’
अपने संबोधन में ने गायत्री परिवार के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को याद किया। उन्होंने कहा, “याद रखना, इस सृष्टि का पहला मंत्र है। ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित परमपिता परमेश्वर के तेज से जुड़ने का आह्वान करता है। इस पवित्र मंत्र की शक्ति को जिसने भी अपनाया, उसका कल्याण हुआ। उन्होंने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य चाहते तो संगठन का नाम अपने नाम पर रख सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे ‘गायत्री परिवार’ नाम दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि व्यक्ति से बड़ा परिवार और सामूहिक विचार होता है।
व्यक्ति नहीं, विचार से मजबूत होता है संगठन
ने बिना किसी संगठन का नाम लिए व्यक्तिवादी राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो संगठन किसी एक व्यक्ति के नाम पर चलते हैं, वे कुछ वर्षों बाद कमजोर होकर धराशायी हो सकते हैं। इसके विपरीत विचारधारा और सिद्धांतों पर आधारित संगठन लंबे समय तक आगे बढ़ते हैं। उन्होंने पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य की सराहना करते हुए कहा कि वे उन महापुरुषों में शामिल हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ने का प्रयास किया।
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नदियों को बचाने और पर्यावरण संरक्षण पर जोर
ने पर्यावरण संरक्षण को भी जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि नदियां जीवनदायिनी हैं और यदि उनका अस्तित्व संकट में आया तो पूरी जीवसृष्टि प्रभावित होगी। इसलिए नदियों को स्वच्छ और अविरल बनाए रखना जरूरी है। योगी ने कहा कि गायत्री परिवार ने पिछले 100 वर्षों में यज्ञ की वेदी के माध्यम से समाज की चेतना को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
2047 के विकसित भारत का भी किया जिक्र
ने लोगों से गुलामी की मानसिकता छोड़ने, अपनी विरासत पर गर्व करने और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत आजादी की शताब्दी यानी वर्ष 2047 की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में सभी को विकसित भारत के निर्माण के लिए अपना योगदान देना चाहिए। उन्होंने कहा, अगर हर व्यक्ति अधिकारों से ज्यादा कर्तव्यों को महत्व दे, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत को चुनौती देने की हिम्मत नहीं कर सकती।
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