Warranty Rules: अगर आप दुकान से कोई सामान लेते हैं और उस पर वारंटी दी गई है। अगर आपका सामान वारंटी की समय सीमा के अंदर खराब हो जाता है, तो वारंटी नियम के आधार पर आप उस समान को रिपेयर करवा सकते हो। लेकिन अगर दुकानदार या कंपनी उस सामान को वापस लेने से मना कर देती है, तो जानिए तब क्या करें और इसकी शिकायत कहां करें।

वारंटी से जुड़ी शर्तें?
वारंटी का सीधा अर्थ तय समय के भीतर फ्री या शुल्क के साथ समान रिपेयर करना होता है, यह सामान को पूरी तरह से नया बदलने की गारंटी नहीं है। आइए जानें क्या हैं शर्तें …
1. वारंटी का लाभ उठाने के लिए आपके पास खरीदारी का पक्का बिल होना अनिवार्य है, बिना बिल के सर्विस सेंटर में सुनवाई नहीं होती।
2. वारंटी का मतलब है कि कंपनी या तय अवधि के भीतर समान के खराब फीचर्स को ठीक करेगी या बदलेगी, उस समान को नहीं बदलेगी।
3. कई बार वारंटी में Parts तो मुफ्त होते हैं, लेकिन सर्विस इंजीनियर की विजिटिंग फीस या लेबर चार्ज ग्राहक को खुद चुकाने पड़ते हैं।
4. यदि उत्पाद का गलत इस्तेमाल किया जाए, उसे खोला जाए, लिक्विड, पानी आदि चला जाए या कंपनी द्वारा बताए गए नियमों जैसे समय पर सर्विस न कराना का पालन न किया जाए, तो वारंटी खत्म हो जाती है।
सामान को सही करने से मना करें तो क्या करें
यदि वारंटी में होने के बावजूद दुकानदार या सर्विस सेंटर आपका सामान ठीक करने से मना करता है, तो आप भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत कानूनी और आसान तरीके से शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
1. सबसे पहले दुकानदार, डीलर या कंपनी के ऑफिशियल सर्विस सेंटर को सामान का खरीद बिल और वारंटी कार्ड दिखाएं।
2. यदि वे सुनने से मना कर दें, तो भारत सरकार की राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर कॉल करें।
3. आप चाहें तो व्हाट्सएप नंबर ‘8800001915’ के जरिए मैसेज भेज कर भी शिकायत कर सकते हैं।
4. आप ऑनलाइन INGRAM पोर्टल या NCH ऐप पर जाकर आवश्यक दस्तावेज जैसे खरीद बिल, वारंटी कार्ड, खराब सामान की फोटो और बातचीत की जानकारी के साथ अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
कहां कितने तक की होती है सुनवाई
पांच लाख रूपए तक की वस्तु या सेवा की सुनवाई जिला स्तर पर जिला फोरम में होगी। 20 लाख रूपये तक की सुनवाई राज्य स्तर पर राज्य आयोग में होगी। वही 20 लाख से अधिक वस्तु या सेवा की सुनवाई राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय आयोग में सुनवाई होगी। जिला फोरम के निर्णय के विरुद्ध आप चाहे तो राज्य आयोग में कर सकते है। वही राज्य आयोग के निर्णय के विरुद्ध अपील राष्ट्रीय आयोग में की जा सकती है।