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‘अच्छे-बुरे आतंकी का नाटक बंद करो’, UN में भारत ने सरेआम उतार दी पाकिस्तान की इज्जत, दुनिया को चेताया भी​

India Slams Pakistan at UN: आतंकवाद पर दुनिया की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? शायद यह कि आज भी कई देश इसे अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से देखते हैं. कहीं आतंकवादी ‘रणनीतिक संपत्ति’ बन जाते हैं तो कहीं उन्हें ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ जैसी श्रेणियों में बांट दिया जाता है. भारत लंबे समय से इस […]

India Slams Pakistan at UN: आतंकवाद पर दुनिया की सबसे बड़ी कमजोरी क्या है? शायद यह कि आज भी कई देश इसे अपने राजनीतिक हितों के हिसाब से देखते हैं. कहीं आतंकवादी ‘रणनीतिक संपत्ति’ बन जाते हैं तो कहीं उन्हें ‘अच्छा’ और ‘बुरा’ जैसी श्रेणियों में बांट दिया जाता है. भारत लंबे समय से इस सोच का विरोध करता रहा है. अब संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने एक बार फिर बेहद स्पष्ट शब्दों में दुनिया को यही संदेश दिया है कि आतंकवाद का कोई रंग, धर्म या श्रेणी नहीं होती. भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने बिना किसी देश का नाम लिए ऐसा संदेश दिया जिसे पाकिस्तान पर सीधा हमला माना जा रहा है. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई तभी सफल होगी जब दुनिया दोहरे मानदंड छोड़कर हर आतंकवादी और उसके मददगार के खिलाफ समान कार्रवाई करेगी. भारत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि आतंकवाद के योजनाकारों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को न्याय के कटघरे तक पहुंचाना ही असली परीक्षा है.

भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के लिए नई तकनीकों के इस्तेमाल और सीमा पार आतंकी नेटवर्क को लेकर चिंता बढ़ रही है. संयुक्त राष्ट्र में भारत ने साफ कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब भी ‘अच्छे और बुरे आतंकवादी’ की सोच से बाहर नहीं निकला तो आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई कमजोर पड़ती जाएगी. भारत ने वित्तीय नेटवर्क, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डार्क वेब और सोशल मीडिया के जरिए फैल रहे आतंकवाद पर भी दुनिया को आगाह किया. साथ ही आतंकवाद के पीड़ितों को न्याय दिलाने और वैश्विक सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया.

UN में भारत का सीधा संदेश, आतंकवाद पर नहीं चलेगा दोहरा रवैया
संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में अंतरराष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मानदंड पूरी तरह छोड़ने होंगे. उन्होंने कहा कि आतंकवाद के अपराधियों, योजनाकारों, वित्तपोषकों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना हर देश की जिम्मेदारी है. सदस्य देशों को इस दिशा में पूरा सहयोग करना चाहिए ताकि कोई भी आतंकवादी कानून से बच न सके.

भारत ने कहा कि आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकना वैश्विक रणनीति का सबसे अहम हिस्सा होना चाहिए. इसके लिए देशों के बीच वित्तीय खुफिया जानकारी का आदानप्रदान बढ़ाना होगा. साथ ही Financial Action Task Force के मानकों को प्रभावी तरीके से लागू करना जरूरी है. भारत ने यह भी कहा कि दुनिया के किसी भी हिस्से को आतंकवाद के लिए सुरक्षित ठिकाना नहीं बनने दिया जाना चाहिए.

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में यह भी चेताया कि आतंकवादी अब तेजी से नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. एन्क्रिप्टेड संचार, ड्रोन, स्वायत्त हथियार, सोशल मीडिया, विशेष मैपिंग ऐप, ऑनलाइन कट्टरपंथ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता , डीपफेक, वर्चुअल एसेट्स और डार्क वेब जैसे माध्यम आतंकवाद के नए हथियार बनते जा रहे हैं. भारत ने कहा कि तकनीक की रफ्तार नियामक व्यवस्था से कहीं अधिक तेज है. इसलिए सुरक्षित और विश्वसनीय डिजिटल इकोसिस्टम विकसित करना समय की जरूरत है ताकि आतंकवादी इन तकनीकों का दुरुपयोग न कर सकें.

भारत ने कहा कि आतंकवाद के पीड़ितों को वैश्विक चर्चा के केंद्र में रखा जाना चाहिए. अक्सर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केवल प्रक्रियाओं और संस्थागत व्यवस्था पर बात होती है, जबकि पीड़ितों की आवाज दब जाती है. भारत ने कहा कि उन्हें सम्मान, न्याय और पुनर्वास दिलाने के लिए और मजबूत प्रयास किए जाने चाहिए. इसके साथ ही क्षमता निर्माण कार्यक्रम लाभार्थी देशों की जरूरतों के अनुरूप होने चाहिए,

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संपादकीय टीम

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