केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा, 2023 में सफलता के भ्रामक दावों पर कड़ी कार्रवाई की है। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने इस मामले पर वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर पर 7 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर ने यूपीएससी परीक्षा में पास हुए अभ्यर्थियों का श्रेय लेने वाला एक भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित किया था। सीसीपीए ने पाया कि संस्थान के विज्ञापनों में ज्यादातर जिन सफल अभ्यर्थियों का उल्लेख किया गया था, वो सिर्फ उसके फ्री ‘इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम’ से जुड़े थे। ये एक शॉर्ट टर्म प्रोग्राम है, जो अभ्यर्थियों के प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा में सफल होने के बाद शुरू होता है।

यूपीएससी के रिजल्ट्स घोषित होने के तुरंत बाद संस्थान ने अपनी वेबसाइट पर किए भ्रामक दावे
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने एक बयान में कहा कि वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर ने यूपीएससी के रिजल्ट्स घोषित होने के तुरंत बाद अपनी वेबसाइट पर दावा किया था कि टॉप 10 में शामिल 8 और टॉप 50 में शामिल 37 रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी उसके छात्र हैं। संस्थान ने ये भी दावा किया था कि हर साल यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चयनित होने वाले 30 प्रतिशत से ज्यादा अधिकारी उसके छात्र होते हैं। मुख्य आयुक्त निधि खरे और आयुक्त अनुपम मिश्रा की अध्यक्षता वाले सीसीपीए ने पाया कि विज्ञापन में शामिल टॉप 10 में से 8 अभ्यर्थियों में से 7 और टॉप 50 रैंक वाले अभ्यर्थियों में 37 में से 29 अभ्यर्थियों ने सिर्फ फ्री इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में नामांकन कराया था।
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कई सालों से जानकारी छिपा रहा था संस्थान
हालांकि, वाजीराम एंड रवि आईएएस स्टडी सेंटर ने इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था। केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण ने कहा कि जानकारी छिपाने का ये मामला सिर्फ साल 2023 तक सीमित नहीं था। जांच में कई सालों से इस तरह की जानकारी सार्वजनिक नहीं करने का एक समान प्रतिरूप सामने आया। सीसीपीए के अनुसार, साल 2021 में सफल अभ्यर्थियों में से 86.36 प्रतिशत, साल 2022 में 78.31 प्रतिशत, साल 2023 में 97.56 प्रतिशत और साल 2024 में 71.69 प्रतिशत अभ्यर्थी सिर्फ इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम से जुड़े थे। हालांकि, किसी भी साल ये जानकारी संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं दी गई।





