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UPI Explained: क्या कैश इकोनॉमी पर आना चाहती है सरकार, 2000 से ऊपर के पेमेंट पर यहां है हर सवाल का जवाब​

लाखों भारतीयों के लिए UPI से पेमेंट करना रोजमर्रा की बात हो गई है. बस एक क्विक स्कैन, एक PIN और पेमेंट हो गया. लेकिन UPI ​​चार्ज को लेकर हाल की चर्चाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या यूजर्स को भविष्य में बड़े UPI पेमेंट करने के लिए पैसे देने पड़ सकते […]

लाखों भारतीयों के लिए UPI से पेमेंट करना रोजमर्रा की बात हो गई है. बस एक क्विक स्कैन, एक PIN और पेमेंट हो गया. लेकिन UPI ​​चार्ज को लेकर हाल की चर्चाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है: क्या यूजर्स को भविष्य में बड़े UPI पेमेंट करने के लिए पैसे देने पड़ सकते हैं? सोमवार को सरकार ने इस मामले का एक अहम पहलू साफ कर दिया है. 2,000 रुपए तक के UPI ट्रांजैक्शन पर बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर कोई डायरेक्ट या इनडायरेक्ट चार्ज नहीं लगा सकते. लेकिन 2,500 रुपए, 5,000 रुपए या 20,000 रुपए के पेमेंट का क्या? यहीं पर स्थिति को थोड़ा समझने की जरूरत है.

सरकार ने असल में क्या कहा है?

वित्त मंत्रालय ने 14 सितंबर के एक नोटिफिकेशन के जरिए बताया कि 2,000 रुपए तक के UPI ट्रांजैक्शन और RuPayपावर्ड डेबिट कार्ड पेमेंट ऐसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके हैं जिन पर बैंक और सिस्टम प्रोवाइडर चार्ज नहीं लगा सकते. नोटिफिकेशन में साफ तौर पर कहा गया है कि इन तरीकों से पेमेंट करने या लेने वाले व्यक्ति पर कोई भी बैंक या सिस्टम प्रोवाइडर डायरेक्ट या इनडायरेक्ट रूप से कोई चार्ज नहीं लगा सकता.

इसका मतलब है कि अगर कोई कस्टमर 2,000 रुपए का UPI पेमेंट करता है, तो उसे बैंक या पेमेंट सिस्टम प्रोवाइडर द्वारा ट्रांज़ैक्शन फीस जोड़ने की चिंता करने की जरूरत नहीं है. यही सुरक्षा RuPay डेबिट कार्ड से किए गए पेमेंट पर भी लागू होती है.

तो, क्या 2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा?

अपनेआप नहीं. यह वह हिस्सा है जिसे आसानी से गलत समझा जा रहा है. सरकार के हालिया नोटिफिकेशन में यह नहीं कहा गया है कि 2,000 रुपए से ज्यादा का UPI पेमेंट करने वाले व्यक्ति को अब फीस देनी होगी. इसके बजाय, पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में हालिया बदलाव कुछ मामलों में चार्ज लगाने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करते हैं.

सरकार ने पहले संकेत दिया था कि भविष्य में कोई भी मर्चेंट डिस्काउंट रेट एक तय सीमा से ऊपर के कुछ मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक ही सीमित रहेगा. उसने यह भी कहा है कि UPI पेमेंट करने वाले कस्टमर्स को ट्रांजैक्शन चार्ज का सामना नहीं करना पड़ेगा.

दूसरे शब्दों में, 2,000 रुपए कस्टमर्स के लिए फ्री UPI पेमेंट की कोई नई घोषित अधिकतम सीमा नहीं है. अभी ऐसी कोई कस्टमर फीस घोषित नहीं की गई है जो सिर्फ इसलिए लागू हो जाए क्योंकि UPI पेमेंट 2,000 रुपए से ज्यादा हो गया है.

यूपीआई पेमेंट पर सरकार क्यों लगा रही है चार्ज?

2,000 रुपए का आंकड़ा इसलिए अहम हो गया है क्योंकि सरकार के हालिया नोटिफिकेशन में इस रकम तक के UPI ट्रांजैक्शन को खास तौर पर ‘सुरक्षित कैटेगरी’ में रखा गया है. बड़ी पॉलिसी बहस इस बात पर है कि UPI इकोसिस्टम इतने बड़े और बढ़ते ट्रांजैक्शन वॉल्यूम को संभालने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च कैसे उठाएगा.

UPI का विस्तार बहुत तेजी से हुआ है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, UPI पर मौजूद बैंकों की संख्या FY201617 में 44 से बढ़कर जुलाई 2026 तक 741 हो गई. जुलाई 2026 में मासिक UPI ट्रांजैक्शन का आंकड़ा रिकॉर्ड 2,366 करोड़ तक पहुंच गया. सरकार का तर्क है कि इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और फ्रॉड रोकने पर खर्च बढ़ने के साथ इस सिस्टम के लिए एक टिकाऊ रेवेन्यू मॉडल की जरूरत है. यहीं पर MDR की बात आती है.

96 बनाम 4 फीसदी..आखिर कौन करता है 2000 से ज्यादा वाला P2M ट्रांजैक्शन?

अब सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर सरकार ने ये लिमिट 2000 रुपए ही क्यों रखी है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि मौजूदा समय में अभी भी 96 फीसदी यूपीआई पेमेंट 2000 रुपए तक के होते हैं, जोकि पर्सन टू मर्चेंट कैटेगिरी के तहत आते हैं. पी2एम कैटेगिरी के तहत बाकी 4 फीसदी पेमेंट 2000 रुपए से ज्यादा देखने को मिलते हैं. जोकि काफी कम संख्या है. ऐसे में इसका आम लोगों का असर काफी कम देखने को मिलेगा. रिपोर्ट के अनुसार सरकार 2 हजार रुपए से ज्यादा के पर्सन टू मर्चेंट यूपीआई पेमेंट पर 0.30 फीसदी से लेकर 0.50 फीसदी तक देखने को मिल सकता है. इसका मतलब है कि अगर कोई 5000 रुपए से ज्यादा का पेमेंट करेगा तो मर्चेंट को एमडीआर के तौर पर 0.30 से 0.50 फीसदी के हिसाब से 15 से 25 रुपए चुकाने होंगे.

MDR क्या है और इसका पेमेंट कौन कर सकता है?

MDR, यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट, डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए लिया जाने वाला शुल्क है. UPI को लेकर चर्चा इस बात पर केंद्रित रही है कि क्या ज्यादा कीमत वाले UPI पेमेंट स्वीकार करने वाले कुछ बड़े मर्चेंट्स के लिए ऐसा शुल्क लागू किया जा सकता है. सरकारी अधिकारियों ने संकेत दिया था कि भविष्य में लगने वाला MDR मामूली हो सकता है और एक निश्चित सीमा से ऊपर के चुनिंदा मर्चेंट ट्रांजैक्शन तक सीमित हो सकता है. रिपोर्ट्स में संभावित दरें 0.25 फीसदी से 0.4 फीसदी के दायरे में बताई गई हैं, हालांकि सरकार के हालिया नोटिफिकेशन में ऐसी कोई दर नहीं बताई गई है. अगर MDR लागू किया जाता है, तो यह मर्चेंट या पेमेंट इकोसिस्टम पर लगने वाला शुल्क होगा. इसका मतलब यह नहीं है कि UPI के जरिए 5,000 रुपए का पेमेंट करने वाले कस्टमर के बैंक अकाउंट से अपने आप कोई अतिरिक्त शुल्क कट जाएगा. सरकार ने बारबार कहा है कि पब्लिक के लिए UPI फ्री रहेगा.

UPI यूजर्स के लिए क्या समझना जरूरी?

आम आदमी के लिए UPI के जरिए 500 रुपए, 1,500 रुपए या 2,000 रुपए का पेमेंट करना फ्री रहेगा. अगर आप UPI के जरिए 5,000 रुपए या 10,000 रुपए का पेमेंट करते हैं, तो अभी सरकार द्वारा घोषित ऐसा कोई कंज्यूमर ट्रांजैक्शन शुल्क नहीं है जो सिर्फ इसलिए लागू हो जाए कि पेमेंट 2,000 रुपए से ज्यादा है. भविष्य में जो बदलाव हो सकता है, वह यह है कि बैंक, पेमेंट कंपनियां और कुछ मर्चेंट्स बड़े ट्रांजैक्शन को प्रोसेस करने की कॉस्ट कैसे वसूलते हैं. इसीलिए, 2,000 रुपए की सीमा को UPI से खर्च करने की नई लिमिट के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. इसे सरकार के उस नए फ्रेमवर्क के हिस्से के तौर पर समझना बेहतर है, जो यह तय करेगा कि डिजिटल पेमेंट पर कहां चार्ज लगाया जा सकता है और कहां नहीं.

ऑफलाइन UPI ​​डिजिटल पेमेंट सिस्टम का अगला टेस्ट

इस बीच, ऑफलाइन UPI ​​पर भी काम चल रहा है. Ezeepay के CEO और फाउंडर शम्स तबरेज ने एनडीटीवी की रिपोर्ट में कहा कि UPI ‘टैप एंड पे’ उन स्थितियों में डिजिटल पेमेंट को ज्यादा आसान बना सकता है जहां मोबाइल इंटरनेट कनेक्टिविटी ठीक नहीं रहती. यह टियर 2 और 3 शहरों और ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए बहुत मायने रखता है. उन जगहों पर नेटवर्क हमेशा स्थिर नहीं रहता, इससे डिजिटल पेमेंट पूरा करना मुश्किल हो जाता है. फाइनेंशियल इन्क्लूजन के नजरिए से, ये टूल्स मददगार हैं, क्योंकि ये जरूरी स्टेप्स को कम करते हैं. ये खरीदारों और दुकानदारों, दोनों के लिए आसान हैं.

तबरेज ने आगे कहा कि अगर कोई व्यक्ति फोन टैप करके पेमेंट कर सकता है और उसे काम करने वाले डेटा कनेक्शन का इंतजार नहीं करना पड़ता, तो जिदगी आसान हो जाती है. इससे लोगों को डिजिटल पेमेंट के साथ ज्यादा सहज महसूस करने में भी मदद मिलती है. UPI का व्यापक विकास अब सिर्फ ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ाने के बारे में नहीं है, बल्कि अलगअलग कनेक्टिविटी स्थितियों और इस्तेमाल के मामलों में डिजिटल पेमेंट को ज़्यादा सुलभ बनाने के बारे में भी है. भारत में डिजिटल पेमेंट अपनाने के अगले चरण के लिए, भरोसेमंदता और इस्तेमाल में आसानी

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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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