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UP Transfer Policy 2026-27: योगी सरकार ने लागू की नई तबादला नीति, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बदले नियम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए नई वार्षिक स्थानांतरण नीति की घोषणा कर दी है । मुख्य सचिव एस.पी. गोयल द्वारा जारी इस शासनादेश के तहत प्रदेश के सरकारी अमले में बड़े फेरबदल की तैयारी शुरू हो गई है । इस नई नीति का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि सभी स्तर के स्थानांतरण 31 मई, 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरे कर लिए जाएंगे ।

UP Transfer Policy 2026-27: योगी सरकार ने लागू की नई तबादला नीति, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बदले नियम
UP Transfer Policy 2026-27: योगी सरकार ने लागू की नई तबादला नीति, अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए बदले नियम

समूह ‘क’ और ‘ख’ के अधिकारियों के लिए कड़े नियम

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नई नीति के अनुसार, समूह ‘क’ और ‘ख’ के वे अधिकारी जो एक जिले में 03 साल और एक मंडल में 07 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं, उनका तबादला अनिवार्य होगा । इन वर्गों में कुल कार्यरत अधिकारियों के अधिकतम 20 प्रतिशत तक ही तबादले किए जा सकेंगे । 20 प्रतिशत से अधिक स्थानांतरण की स्थिति में सीधे मुख्यमंत्री की अनुमति लेना अनिवार्य होगा । साथ ही, समूह ‘क’ के अधिकारियों को उनके गृह जनपद में तैनाती नहीं मिलेगी ।

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के लिए क्या है खास?

समूह ‘ग’ और ‘घ’ के कर्मचारियों के लिए स्थानांतरण की सीमा अधिकतम 10 प्रतिशत तय की गई है । विशेष परिस्थितियों में इसे 20 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है, जिसके लिए विभागीय मंत्री की मंजूरी आवश्यक होगी । शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि समूह ‘ग’ के कर्मचारियों का पटल (Seat) परिवर्तन भी कड़ाई से लागू किया जाएगा ।

आकांक्षी जिलों और विकासखण्डों पर विशेष जोर

सरकार ने बुंदेलखंड और 08 आकांक्षी जिलों (चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र, फतेहपुर, बलरामपुर, सिद्धार्थ नगर, श्रावस्ती और बहराइच) में शत-प्रतिशत तैनाती का लक्ष्य रखा है । इन क्षेत्रों में तैनात कर्मियों को तब तक कार्यमुक्त नहीं किया जाएगा, जब तक उनका विकल्प (रिलीफ) वहां कार्यभार ग्रहण न कर ले । हालांकि, यह प्रतिबंध IAS और IPS जैसे वरिष्ठ अधिकारियों पर लागू नहीं होगा ।

मानवीय आधार और तकनीक का समावेश

नीति में दिव्यांग कार्मिकों और ऐसे माता-पिता जिनके बच्चे गंभीर बीमारी या दिव्यांगता से ग्रसित हैं, उन्हें विशेष राहत दी गई है । यदि पति-पत्नी दोनों सरकारी सेवा में हैं, तो उन्हें एक ही जिले में तैनात करने का प्रयास किया जाएगा । भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए समूह ‘ख’ और ‘ग’ के तबादलों में ‘मेरिट बेस्ड ऑनलाइन ट्रांसफर सिस्टम’ को प्राथमिकता दी जाएगी ।

सख्त अनुशासन और जवाबदेही

तबादला होने के बाद यदि कोई कर्मचारी एक सप्ताह के भीतर कार्यभार ग्रहण नहीं करता, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और उनके विरुद्ध विभागीय कार्यवाही की जाएगी । स्थानांतरण आदेशों को अब ‘मानव संपदा पोर्टल’ पर अनिवार्य रूप से अपलोड करना होगा, जिसके बिना संबंधित कर्मी का वेतन आहरण नहीं हो सकेगा ।

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