Viral

UP में एक बार फिर साथ आ सकते हैं राहुल और अखिलेश, सपा ने बनाया टिकट बंटवारे का फार्मूला

UP में एक बार फिर साथ आ सकते हैं राहुल और अखिलेश, सपा ने बनाया टिकट बंटवारे का फार्मूला

यूपी में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो गई हैं. इसी के साथ सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन भी आकार लेने लगा है. खबर है कि यूपी में विधानसभा चुनाव के लिए सपा-कांग्रेस सीट बंटवारे पर मंथन शुरू हो चुका है. सपा ने अपनी पार्टी में इसकी जिम्मेदारी रिटायर्ड IAS आलोक रंजन को सौंपी है. सर्वे टीम का नेतृत्व पूर्व आईएएस अधिकारी आलोक रंजन कर रहे हैं.

UP में एक बार फिर साथ आ सकते हैं राहुल और अखिलेश, सपा ने बनाया टिकट बंटवारे का फार्मूला
UP में एक बार फिर साथ आ सकते हैं राहुल और अखिलेश, सपा ने बनाया टिकट बंटवारे का फार्मूला

सूत्रों की मानें तो आलोक रंजन ने अपनी रिपोर्ट में कांग्रेस को गठबंधन के तहत 70 से 75 सीटें देने का सुझाव दिया है. इन सीटों का चयन किस आधार पर होगा इसका भी फार्मूला तैयार किया गया है. समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए जो फार्मूला तय किया है, उसके लिए सबसे पहले संभावित उम्मीदवारों की जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए सर्वे करवा रही है. उम्मीदवारों की मजबूती को दो स्तरों पर परखा जा रहा है. पहला- प्राइवेट एजेंसी के सर्वे द्वारा. दूसरा-स्थानीय नेताओं (लोकल लीडर्स) के फीडबैक के आधार पर होगा.

अखिलेश यादव खुद कर रहे सर्वे की मॉनिटरिंग

इस पूरे सर्वे की निगरानी खुद सपा प्रमुख कर रहे हैं. दावा है कि इस बार टिकट वितरण में किसी भी तरह की सिफारिश नहीं चलेगी. केवल सर्वे और फीडबैक को ही प्राथमिकता दी जाएगी. पार्टी केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मैदान में उतारेगी, जिनका जनता में मजबूत जनाधार हो, छवि बेदाग हो और जो ‘जिताऊ कैंडिडेट’ हों.

सूत्रों की मानें तो अखिलेश यादव ने इस 70 से 75 सीटों के अलावा इसके 8 से 10 कांग्रेस के ऐसे नेताओं के टिकट अलग से दे सकते हैं, जिनके चुनाव जितने की पूरी संभावना हो. अखिलेश गठबंधन में तय हुई सीटों से अलग कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू, कांग्रेस के प्रवक्ता अखिलेश सिंह, पूर्व सांसद पीएल पुनिया की बहू को भी सीट दे सकते हैं.

Khabar Monkey

अखिलेश ने अपने विधायकों-सांसदों से मांगी लिस्ट

सपा अध्यक्ष अखिलेश ने अपनी पार्टी के नेताओं, सांसदों और विधायकों से सुझाव मांगे हैं कि उनके जिलों में कांग्रेस को कौन-कौन सी सीटें दी जा सकती हैं. ऐसी कौन सी सीट है जिसमें जातीय समीकरण कांग्रेस के लिए उपयुक्त है. सपा मानती है कि यूपी में कुछ सीटें ऐसी हैं, जहां पर सवर्ण वोटर्स कांग्रेस के साथ होते हैं.

सभी 403 सीटों पर संभावित उम्मीदवारों की तलाश

सूत्रों के मुताबिक, सपा कांग्रेस के लिए लगभग 60 से 80 सीटों की सूची तैयार कर रही है, जबकि सभी 403 सीटों पर अपने संभावित उम्मीदवारों की भी पहचान कर रही है. कांग्रेस शुरुआती बातचीत में करीब 120 सीटों की मांग रख सकती है. हालांकि, अंतिम समझौता लगभग 70-80 सीटों के आसपास हो सकता है. दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व गठबंधन के पक्ष में हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई नेता सीटें कम होने की आशंका के चलते असहज हैं.

गठबंधन को लेकर नेताओं की अलग-अलग राय

कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता मानते हैं कि चुनाव पूर्व गठबंधन से भाजपा को “तुष्टिकरण” और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर हमला करने का मौका मिलेगा, इसलिए वे गठबंधन के खिलाफ भी राय रख रहे हैं. उधर, सपा नेताओं का तर्क है कि कांग्रेस का प्रदेश में संगठनात्मक आधार कमजोर है, जबकि कांग्रेस का दावा है कि 2024 लोकसभा चुनाव में गठबंधन की सफलता में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही.

दोनों दलों के रिश्तों में पहले भी उतार-चढ़ाव रहे हैं. 2023 में बयानबाजी को लेकर तनाव हुआ था, लेकिन बाद में राहुल गांधी और अखिलेश यादव की बातचीत के बाद 2024 लोकसभा चुनाव के लिए समझौता हुआ था. कांग्रेस जीतने योग्य सीटों पर जोर दे रही है और चाहती है कि उसे सामाजिक समीकरणों के लिहाज से मजबूत सीटें मिलें. यही मुद्दा सीट बंटवारे में सबसे बड़ा विवाद बन सकता है.

khabarmonkey@gmail.com

Leave a Reply