अक्सर जब हम दिल की सेहत की बात करते हैं, तो हमारा पूरा ध्यान केवल कोलेस्ट्रॉल पर होता है। लेकिन ब्लड टेस्ट (Lipid Profile) में एक और खतरनाक विलेन छिपा होता है, जिसे ट्राइग्लिसराइड्स (Triglycerides) यानी खून में मौजूद एक प्रकार का फैट कहते हैं। कार्डियोलॉजिस्ट्स के अनुसार, अगर आपके खून में ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर 300 mg/dL के पार पहुंच चुका है, तो यह दिल के लिए एक गंभीर खतरे की घंटी है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को कई गुना बढ़ा देता है। राहत की बात यह है कि सही डॉक्टरी सलाह, कड़े अनुशासन और एक सटीक डाइट प्लान की मदद से इसे कंट्रोल किया जा सकता है।

एम्स के पूर्व कंसल्टेंट और साओल हार्ट सेंटर के फाउंडर एंड डायरेक्टर डॉ बिमल छाजेड़ के मुताबिक शरीर में ट्राइग्लिसराइड का स्तर बढ़ना हार्ट डिजीज, फैटी लिवर, मोटापा, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। अगर किसी व्यक्ति का ट्राइग्लिसराइड स्तर 300 mg/dL से अधिक है तो उसे तुरंत अपने लाइफस्टाइल और डाइट पर ध्यान देने की जरूरत है। आइए देश के जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट से सीधे समझते हैं कि ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने का असली कारण क्या है और इसे कम करने के लिए आपकी थाली (Diet) में कौन से बदलाव होने सबसे जरूरी हैं।
ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने का असली कारण क्या है?
खराब डाइट का सेवन करने से ट्राइग्लिसराइड बढ़ने का खतरा ज्यादा रहता है। डाइट में प्रोसेस फूड, फ्राइड फूड, मीठे फूड, ज्यादा चीनी, मिठाइयां, कोल्ड ड्रिंक्स, सफेद ब्रेड, मैदा, पेस्ट्री और अन्य रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का सेवन करने से शरीर अतिरिक्त कैलोरी को ट्राइग्लिसराइड्स में बदलकर जमा करने लगता है जो दिल के लिए खतरा बनता है।
ट्राइग्लिसराइड्स 300 से ज्यादा है तो डाइट में करें ये बदलाव
चीनी और मीठे ड्रिंक्स से दूरी बनाएं
डॉ. छाजेड़ के अनुसार, अतिरिक्त चीनी शरीर में जाकर ट्राइग्लिसराइड में बदल सकती है, इसलिए सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड फ्रूट जूस, मिठाइयां, केक, पेस्ट्री और चाय-कॉफी में अतिरिक्त चीनी का सेवन कम करना चाहिए। इसके बजाय सादा पानी, नींबू पानी या नारियल पानी का सेवन बेहतर विकल्प हो सकता है।
रोजाना 30 से 45 मिनट करें वॉक
नियमित शारीरिक गतिविधि शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को ऊर्जा के रूप में उपयोग करने में मदद करती है। एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि रोजाना कम से कम 30 से 45 मिनट तेज चाल से चलें। इसके साथ हल्का योग और स्ट्रेचिंग भी फायदेमंद हो सकती है।
सफेद चावल और मैदा का सेवन कंट्रोल करें
रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे सफेद ब्रेड, पिज्जा, बर्गर, नूडल्स, पास्ता और बिस्किट ट्राइग्लिसराइड के स्तर को बढ़ा सकते हैं। इन फूड्स का सेवन करने के बजाय आप ओट्स, दलिया, बाजरा, ज्वार, रागी और मल्टीग्रेन आटे से बनी रोटियों का सेवन करें।
फाइबर से भरपूर खाना खाएं
फाइबर शरीर में फैट के अवशोषण को कम करने में मदद करता है। हरी पत्तेदार सब्जियां, खीरा, गाजर, लौकी, करेला, सेब, नाशपाती, दालें और बीन्स जैसे खाद्य पदार्थ ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल करने में मददगार हो सकते हैं।
देर रात खाना खाने की आदत छोड़ें
एक्सपर्ट के मुताबिक देर रात खाना खाना आपके दिल की सेहत के लिए खतरा है। एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आप दिल को हेल्दी रखना चाहते हैं तो आप सोने से 3 घंटे पहले खाना खाएं। एक्सपर्ट ने बताया देर रात खाना खाने से शरीर में अतिरिक्त फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। रात का खाना जल्दी खाएं और लेट-नाइट स्नैकिंग से बचें।
तले हुए और पैकेज्ड फूड से बचें
चिप्स, नमकीन, डीप फ्राइड स्नैक्स, फास्ट फूड और इंस्टेंट नूडल्स जैसे खाद्य पदार्थों में फैट की मात्रा अधिक होती है, जो ट्राइग्लिसराइड स्तर बढ़ा सकते हैं। ऐसे में कम तेल वाला या संतुलित भोजन चुनना बेहतर माना जाता है।
अच्छी नींद लें और तनाव कम करें
डॉ. छाजेड़ का कहना है कि नींद की कमी और लगातार तनाव भी ट्राइग्लिसराइड बढ़ाने में भूमिका निभा सकता हैं। रोजाना 7 से 8 घंटे की नींद लेना, सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और मेडिटेशन या गहरी सांस लेने जैसी तकनीकों का अभ्यास करना दिल के लिए फायदेमंद हो सकता है।
हार्ट हेल्थ के लिए कैसी हो डाइट
एक्सपर्ट ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल रखने के लिए ओट्स, दालें, बीन्स, हरी सब्जियां और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को नियमित रूप से डाइट में शामिल करने की सलाह देते हैं।
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कब पड़ सकती है दवा की जरूरत?
डॉ. छाजेड़ के अनुसार, कुछ लोगों में ट्राइग्लिसराइड बढ़ने का कारण जेनेटिक होता है उनके लिए लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करना पर्याप्त नहीं होता। ऐसे लोग डॉक्टर की सलाह के मुताबिक दवाओं का सेवन करें।
डिस्क्लेमर:यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है। अगर आपका ट्राइग्लिसराइड्स स्तर 300 या उससे अधिक है, तो बिना कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के सिर्फ डाइट के भरोसे नहीं रहें। डॉक्टर की सलाह पर जीवनशैली में बदलाव के साथ-साथ जरूरी दवाएं लें।












