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SEBI एक्सचेंज सेल्फ-लिस्टिंग पर बनाएगा पैनल, BSE के शेयरों में गिरावट​

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. बाजार नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया स्टॉक एक्सचेंजों की सेल्फलिस्टिंग को लेकर एक नई कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. सेल्फलिस्टिंग का सीधा सा मतलब है कि कोई भी स्टॉक एक्सचेंज अपने शेयरों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर […]

शेयर बाजार के निवेशकों के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है. बाजार नियामक संस्था सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया स्टॉक एक्सचेंजों की सेल्फलिस्टिंग को लेकर एक नई कमेटी बनाने पर विचार कर रही है. सेल्फलिस्टिंग का सीधा सा मतलब है कि कोई भी स्टॉक एक्सचेंज अपने शेयरों को अपने ही प्लेटफॉर्म पर खरीदबिक्री के लिए उपलब्ध करा सके. सीएनबीसीटीवी18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस खबर का असर शेयर बाजार पर तुरंत देखने को मिला है. खबर बाहर आते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के शेयरों में 2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. इसके बाद शेयर की कीमत 3,124.7 रुपये पर आ गई. ये पूरा मामला एक्सचेंजों के अपने ही प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होने से जुड़ा है.

नियमों में बदलाव की तैयारी

मौजूदा नियमों के तहत भारत में कोई भी स्टॉक एक्सचेंज खुद के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट नहीं हो सकता. अगर किसी एक्सचेंज को शेयर बाजार में आना है, तो उसे अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी के प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होना पड़ता है. रिपोर्ट के अनुसार सेबी अब इसी नियम की समीक्षा करने जा रहा है. अगर ये नए नियम मंजूर हो जाते हैं, तो ये पहले से लिस्टेड एक्सचेंजों पर भी लागू होंगे. हालांकि सेबी के लिए सबसे बड़ी चुनौती हितों के टकराव को रोकना है. पैनल सबसे पहले गवर्नेंस स्ट्रक्चर में सुधार पर काम करेगा. प्राइमरी एक्सचेंज के पास ही निगरानी की पहली जिम्मेदारी रहने की उम्मीद है.

ग्लोबल मार्केट का क्या है हाल

सेल्फलिस्टिंग का मुद्दा भारत में नया नहीं है. साल 2015 में भी सेबी ने इस पर लंबी बहस की थी. तब हितों के टकराव का हवाला देते हुए इस आइडिया को खारिज कर दिया गया था. लेकिन दुनिया के कई प्रमुख बाजारों में सेल्फलिस्टिंग की अनुमति है. अमेरिका का उदाहरण लें तो न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की मूल कंपनी इंटरकांटिनेंटल एक्सचेंज खुद एनवायएसई पर लिस्टेड है. वहां इसके शेयरों की ट्रेडिंग होती है. हाल ही में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के चेयरमैन श्रीनिवास इंजेती ने भी सेबी से इस फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. उनकी ये टिप्पणी तब आई जब एक दिन पहले ही उनका एक्सचेंज बीएसई पर लिस्ट हुआ था.

बाजार में वर्चस्व की जंग

भारतीय शेयर बाजार में एनएसई का दबदबा किसी से छिपा नहीं है. कैशमार्केट ट्रेडिंग में एनएसई की हिस्सेदारी करीब 93 फीसदी है. वहीं ऑप्शंस ट्रेडिंग में भी ये 75 फीसदी पर काबिज है. कुछ रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है कि बीएसई पर लिस्ट होने के बाद एनएसई “परमिटेड टू ट्रेड” कैटेगरी के जरिए अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेड कर सकता है. पीएल कैपिटल की एक रिसर्च के मुताबिक अगर एनएसई ऐसा करता है, तो वित्त वर्ष 2027 में बीएसई की कमाई पर 1 से 2 फीसदी का असर पड़ सकता है. ये स्थिति तब बनेगी जब बीएसई के कैश मार्केट शेयर में कोई सुधार नहीं होता.

शेयरों की चाल पर दिखा असर

नए नियमों की सुगबुगाहट ने बाजार का मूड बदल दिया है. जहां एक तरफ सेबी की नई योजना की खबरों से बीएसई के शेयर टूटे हैं. वहीं दूसरी तरफ एनएसई के शेयरों में भी बाजार में लिस्टिंग के कुछ दिन बाद प्रॉफिट बुकिंग देखी गई. सोमवार को एनएसई के शेयर अपने इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग प्राइस से नीचे आ गए. अब पूरे वित्तीय जगत की नजरें सेबी के अगले कदम पर टिकी हैं. अगर सेबी सेल्फलिस्टिंग को हरी झंडी दिखाता है, तो बाजार का पूरा गणित बदल सकता है.

Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए. TV9 भारतवर्ष अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है.
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संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

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