मंगलवार, 29 सितंबर 2026 ब्रेकिंग
Mercury Retrograde: बुध की उल्टी चाल से 3 राशियों की बढ़ेगी भागदौड़, खर्च और सेहत को लेकर रहें सतर्क​ | Nifty 50 Rebalancing: विप्रो की जगह निफ्टी 50 में कल आ रहा है BSE, इन शेयरों पर क्या पड़ेगा असर?​ | Rajkummar Rao की नेशनल अवॉर्ड विनिंग ‘Shahid’ आखिरकार OTT पर रिलीज़, लेखक Apurva Asrani बोले-‘क्या अब डर की राजनीति खत्म हो रही है?’​
दिल्ली 32°C ☀️ |
728 x 90 Advertisement
विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
Viral

संभल हिंसा: कौन है मुल्ला अफरोज, जिसके केस में UP सरकार पर लगा 10 लाख का जुर्माना? परिवार से कारोबार तक A-टू-Z कहानी​

Sambhal violence: उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन को रद्द कर दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना […]

Sambhal violence: उत्तर प्रदेश के संभल हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरोपी मुल्ला अफरोज को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है. अदालत ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत जारी प्रिवेंटिव डिटेंशन को रद्द कर दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. वहीं, कोर्ट के फैसले के बाद संभल में उसके घर पर सन्नाटा पसरा हुआ है. पड़ोसी भी चुप्पी साधे हुए हैं.

मुल्ला अफरोज संभल के दीपा सराय इलाके का रहने वाला है. 24 नवंबर 2024 की हिंसा के बाद उसका नाम जांच में सामने आया. बाद में पुलिस ने उसे हिंसा से जुड़े मामलों में आरोपी बनाया. वह करीब 42 वर्ष का बताया जाता है और अनाज के कारोबार से जुड़ा रहा है. उसके पिता अफसर हुसैन व्यापारी थे, जिनका निधन हो चुका है. अफसर हुसैन ने दो शादियां की थीं. पहली पत्नी का बेटा मुल्ला अफरोज है.

अफरोज शादीशुदा है और उसके तीन बच्चे हैं. उसके जेल जाने के बाद पत्नी बच्चों के साथ मायके में रह रही है. फिलहाल उसके घर पर कोई नहीं रहता. स्थानीय स्तर पर उसके पड़ोसियों ने भी उसके बारे में बातचीत करने से इनकार किया.

संभल हिंसा में कैसे आया नाम?

मामला 24 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है. इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी. पुलिस जांच के दौरान मुल्ला अफरोज का नाम सामने आया और उस पर हिंसा में हथियार उपलब्ध कराने और हत्या से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए. हालांकि, ये आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं और आरोप साबित होना बाकी है.

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में दुबई में रह रहे शारिक साठा का भी नाम सामने आया था. जांच एजेंसियों ने उस पर हिंसा की साजिश और अपने नेटवर्क के जरिए स्थानीय लोगों को निर्देश देने के आरोप लगाए. पुलिस ने मुल्ला अफरोज को उसके नेटवर्क से जुड़ा व्यक्ति बताते हुए कार्रवाई की थी.

जनवरी 2025 में हुई गिरफ्तारी

मुल्ला अफरोज को हिंसा के करीब 55 दिन बाद जनवरी 2025 में गिरफ्तार किया गया था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिकॉर्ड में याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील दी गई थी कि हिंसा से जुड़े शुरुआती एफआईआर में उसका नाम नहीं था और बाद में पुलिस के सामने कबूलनामे के आधार पर उसे मामलों में जोड़ा गया. अदालत के रिकॉर्ड में इन दलीलों का उल्लेख है.

बाद में उसे एक मामले में हाईकोर्ट से जमानत मिली. इसके बाद 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश जारी किया गया. जून 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी NSA चुनौती को खारिज कर दिया था. इसके बाद उसने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों रद्द की NSA हिरासत?

सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पुलिस हिरासत में दर्ज कथित कबूलनामे की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया था. 8 सितंबर को अदालत ने पूछा था कि क्या पुलिस हिरासत में दिए गए ऐसे कबूलनामे के आधार पर NSA के तहत निवारक हिरासत के लिए जरूरी सब्जेक्टिव सैटिस्फैक्शन बनाया जा सकता है. इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने NSA के तहत मुल्ला अफरोज की हिरासत रद्द कर दी है.

विज्ञापन
728 x 90 Advertisement
शेयर करें:
Author Bio Pic

संपादकीय टीम

खबर मंकी की अनुभवी एडिटोरियल डेस्क। हमारे लेखक और संपादक दिन-रात निष्पक्ष, सटीक और तीव्र समाचार आप तक पहुँचाने के लिए काम करते हैं।

🐒 KHABAR MONKEY