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Roti For Diabetes: डायबिटीज और मोटापा में गेहूं की रोटी फायदेमंद या नुकसानदेह? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद

Roti For Diabetes: डायबिटीज और मोटापा में गेहूं की रोटी फायदेमंद या नुकसानदेह? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद

गेहूं कार्बोहाइड्रेट का एक प्रमुख स्रोत है और आयुर्वेद में इसे मधुर रस वाला माना जाता है। हालांकि, गेहूं का सेवन अपने आप वजन बढ़ाने या डायबिटीज का कारण नहीं बनता। वजन बढ़ना आमतौर पर कुल कैलोरी सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित जीवनशैली से जुड़ा होता है। वहीं, डायबिटीज मरीजों में गेहूं से बने खाद्य पदार्थ ब्लड शुगर को प्रभावित कर सकते हैं, इसलिए इन्हें उचित मात्रा में, फाइबर, प्रोटीन और सब्जियों के साथ संतुलित रूप से सेवन करने की सलाह दी जाती है। भारतीय योग गुरु, लेखक, शोधकर्ता और टीवी पर्सनालिटी डॉक्टर हंसा योगेंद्र के मुताबिक आजकल सोशल मीडिया और हेल्थ ट्रेंड्स में अक्सर यह दावा किया जाता है कि गेहूं खाना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है, वजन बढ़ाता है और डायबिटीज का कारण बनता है।

Roti For Diabetes: डायबिटीज और मोटापा में गेहूं की रोटी फायदेमंद या नुकसानदेह? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद
Roti For Diabetes: डायबिटीज और मोटापा में गेहूं की रोटी फायदेमंद या नुकसानदेह? जानिए क्या कहता है आयुर्वेद

कई लोग वजन कम करने के लिए सबसे पहले रोटी छोड़ने की सलाह देते हैं। एक्सपर्ट ने बताया समस्या गेहूं में नहीं, बल्कि उसे खाने के तरीके, मात्रा और खराब लाइफस्टाइल में छिपी होती है। एक्सपर्ट के मुताबिक गेहूं ऊर्जा का एक बड़ा स्रोत हैं। साबुत गेहूं का आटा फाइबर, विटामिन-बी, आयरन, मैग्नीशियम और कई फायदेमंद प्लांट बेस्ड यौगिकों से भरपूर होता है। एक चपाती में लगभग 2 से 3 ग्राम फाइबर होता है, जो पाचन को बेहतर बनाने, आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करने और ब्लड शुगर के अवशोषण को धीमा करने में मदद करता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि गेहूं का सेवन कैसे नुकसान पहुंचाता है और इसे कैसे खाएं कि सेहत को फायदा पहुंचे।

गेहूं की रोटी खाने का सही तरीका क्या है?

गेहूं की रोटी को अगर आप अकेले बिना फाइबर के कॉम्बिनेशन के खाएंगे तो आपकी सेहत को नुकसान पहुंचा सकती है। कम प्रोसेस्ड या होल व्हीट आटे से बनी रोटी सेहत को फायदा पहुंचा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि रोटी को अकेले खाने के बजाय दाल, सब्जी, दही या किसी प्रोटीन स्रोत के साथ खाएं। इससे पाचन प्रक्रिया धीमी होती है और ब्लड शुगर तेजी से नहीं बढ़ता। भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाना और खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक करना भी पाचन के लिए फायदेमंद माना जाता है।

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क्या गेहूं की रोटी डायबिटीज और मोटापे की वजह है?

विशेषज्ञों के अनुसार, डायबिटीज, मोटापा, पीसीओएस और फैटी लिवर जैसी समस्याओं के पीछे केवल गेहूं जिम्मेदार नहीं होता। देर रात खाना, शारीरिक गतिविधियों की कमी, जरूरत से ज्यादा भोजन करना, तनाव और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन भी महत्वपूर्ण होता हैं। जब गेहूं को अत्यधिक प्रोसेस्ड रूप में और ज्यादा मात्रा में खाया जाता है, तब यह सेहत पर नकारात्मक असर डाल सकता है।

आयुर्वेद क्या कहता है?

आयुर्वेद में गेहूं को पोषण देने वाला, ताकत बढ़ाने वाला और शरीर को स्थिरता प्रदान करने वाला अनाज माना गया है। हालांकि जिन लोगों में कफ की प्रवृत्ति अधिक होती है या जिनका पाचन कमजोर होता है, उनमें ज्यादा मात्रा में गेहूं खाने से भारीपन और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी शारीरिक जरूरतों और पाचन क्षमता के अनुसार गेहूं का सेवन करना चाहिए।

ग्लूटेन को लेकर क्या है सच्चाई?

विशेषज्ञों का कहना है कि केवल उन लोगों को ग्लूटेन से पूरी तरह बचने की जरूरत होती है जिन्हें सीलिएक रोग (Celiac Disease) होता है। वहीं कई लोगों को होने वाली पेट संबंधी परेशानियां खराब गट हेल्थ, प्रोसेस्ड फूड या जरूरत से ज्यादा खाने के कारण भी हो सकती हैं। यदि किसी को लंबे समय तक डायरिया, गंभीर ब्लोटिंग या बिना कारण एनीमिया जैसी समस्याएं हों तो डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है।

गेहूं के प्रमुख फायदे

गेहूं एक ऐसा अनाज है जिसका सेवन  शरीर को स्थिर ऊर्जा देता है। इसमें मौजूद फाइबर पाचन बेहतर बनाता है और आंतों की सेहत में सुधार करता है। इसमें मौजूद विटामिन-बी नर्वस सिस्टम और एनर्जी मेटाबॉलिज्म में मदद करता है। संतुलित आहार के रूप में इसका सेवन करने से ये दिल की सेहत में सुधार करता है।

गेहूं का सेवन करते हैं तो इन बातों का रखें ध्यान

एक्सपर्ट के मुताबिक गेहूं का सेवन करते हैं तो उसके साथ मीठा खाने से परहेज करें। रात में भारी भोजन का सेवन नहीं करें। ज्वार,बाजरा और रागी जैसे अनाज को अपनी डाइट का हिस्सा बनाएं। जिन लोगों की बॉडी एक्टिविटी कम है वो सिर्फ खाने में 1-2 मीडियम साइज की रोटी का सेवन करें। रोटी का सेवन सब्जी और प्रोटीन के साथ करें। सही मात्रा, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और सक्रिय जीवनशैली के साथ गेहूं हेल्दी डाइट का हिस्सा बन सकता है। रोटी छोड़ने से पहले अपनी आदतों और लाइफस्टाइल पर ध्यान देना अधिक जरूरी है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी और स्वास्थ्य संबंधी सुझाव प्रसिद्ध विशेषज्ञ डॉ. हंसा योगेंद्र के विचारों और सामान्य जागरूकता पर आधारित हैं। यह किसी भी तरह से व्यक्तिगत चिकित्सा सलाह, निदान या डॉक्टर के उपचार का विकल्प नहीं है। यदि आप गंभीर डायबिटीज, सीलिएक रोग , पीसीओएस या फैटी लिवर जैसी किसी पुरानी बीमारी से पीड़ित हैं, तो अपनी डाइट या जीवनशैली में कोई भी बड़ा बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।

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